मातृसदन ने एम्स प्रशासन पर लगाए गंभीर आरोप, कहा झूठी दलीलें देकर सुप्रीम कोर्ट से लिया स्टे
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मातृसदन के परमाध्यक्ष स्वामी शिवानंद सरस्वती ने कहा कि स्वामी सानंद के शरीर देने के मामले में ऋषिकेश एम्स प्रशासन ने सुप्रीम कोर्ट में झूठी दलीलें देकर स्टे ले लिया। उन्होंने कहा कि स्वामी सानंद की मांग पूरी न होने पर मातृसदन का संघर्ष जारी रहेगा।
मातृसदन के परमाध्यक्ष स्वामी शिवानंद सरस्वती ने बुधवार को मातृसदन में पत्रकारों से वार्ता कर रहे थे। उन्होंने कहा कि स्वामी सानंद ने अपनी पूरी जिंदगी गंगा को बचाने के लिए कुर्बान कर दी। एम्स ऋषिकेश उन्हें साधुओं के रीति रिवाजों को पूरा करने नहीं दे रहा है।
उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट में एम्स स्वामी सानंद के अंग प्रत्यर्पण के संदर्भ में कोई उत्तर नहीं दे पाया। जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जिस आधार पर स्टे लिया गया है, उसे लिखित में प्रमाणिकता के साथ प्रस्तुत किया जाए।
स्वामी सानंद के कहा कि बुधवार को ब्रह्मचारी आत्मबोधानंद के अनशन का आठवां दिन था, लेकिन प्रशासन की तरफ से स्वास्थ्य की जांच के लिए डाक्टरों की टीम अभी तक नहीं भेजी गई है।
शुक्रवार को आना है फैसला
बता दें कि स्वामी सानंद के अंतिम दर्शन के लिए उनकी पार्थिव देह हरिद्वार के मातृ सदन में रखने के आदेश पर रोक लगाने के निर्णय के खिलाफ दायर याचिका पर फैसला शुक्रवार को आएगा।
सुप्रीम कोर्ट ने आज सुनवाई में कहा कि स्वामी सानंद का शव फिलहाल एम्स ऋषिकेश में रहेगा। सुप्रीम कोर्ट ने एम्स ऋषिकेश से इस मामले में एसएलपी दाखिल करने के लिए कहा है। सुप्रीम कोर्ट शुक्रवार को तय करेगा कि स्वामी सानंद का शव हरिद्वार के मातृ सदन को दिया जाए या नहीं।
याचिका डॉ. विजय वर्मा की ओर से दायर की गई है। डॉ. वर्मा की ही याचिका पर नैनीताल हाईकोर्ट ने 26 अक्तूबर को गंगा की रक्षा के लिए बलिदान दे चुके स्वामी सानंद के शव को आठ घंटे के लिए मातृ सदन में रखने का आदेश दिया था, लेकिन उसी दिन सुप्रीम कोर्ट ने उस आदेश पर रोक लगा दी थी।
सोमवार को डॉ. वर्मा ने चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष अपनी याचिका का उल्लेख करते हुए जल्द सुनवाई की गुहार लगाई। उन्होंने कहा कि यह मसला लोगों की संवेदना से जुड़ा हुआ है। उन्होंने कहा कि वैसे भी 18 दिनों के बाद मृत शरीर के अंगों को दूसरे मानव शरीर में प्रत्यर्पण नहीं किया जा सकता।