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शहीद पिता के जज्बे पर नाज है इन्हें

Sat, 26 Jul 2014 01:35 AM IST
अमर उजाला, देहरादून
अमर उजाला, देहरादून Updated Sat, 26 Jul 2014 01:35 AM IST
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martyr man singh gusain

रुड़की के आदर्श शिवाजी निवासी शहीद मानसिंह गुसाईं के बेटे उम्मेद सिंह और दो बेटिया ममता और कविता उस समय बहुत छोटे थे जब उनके पिता कारगिल में दुश्मनों का मुकाबला करते हुए मातृभूमि की रक्षा के लिए शहीद हो गए।

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पिता की यादों के सहारे जीवन की कठिन डगर पर आगे बढ़ रहे तीनों बच्चों को अपने पिता के जज्बे पर नाज है।

दोनों बहनों की पढ़ाई लिखाई के साथ ही बीमार मां की जिम्मेदारी संभालने वाले उम्मेद सिंह ने बीकॉम तक पढ़ाई पूरी कर ली है और वे एक काबिल सीए बनना चाहते हैं।
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उनकी इच्छा तो वैसे फौज में जाकर पिता की तरह जांबाज सैनिक बनने की थी लेकिन परिवार की देखरेख की जिम्मेदारी के चलते वह ऐसा नहीं कर सके।

गढ़वाल राइफल्स में तैनात थे मान स‌िंह

martyr man singh gusain

उम्मेद ने बताया कि कारगिल युद्ध के समय 18 गढ़वाल राइफल्स के जवान के रूप में बिहार में तैनात थे। वहां से उनकी बटालियन मोर्चा लेने के लिए कश्मीर गई। जहां उनके पिता ने दुश्मनों से लोहा लेते हुए अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया।

उस समय उम्मेद सात वर्ष के थे जबकि एक बहन दो साल व दूसरी बहन कुछ महीने की ही थी। परिवार के अन्य सदस्यों के सहयोग से तीनों भाई-बहनों की पढ़ाई लिखाई की राह आसान हो गई।

एक बहन ने इंटर पास कर लिया है जबकि दूसरी इंटर में हैं। तीनों ही पढ़ लिखकर ऐसा कोई काम करना चाहते हैं जिससे अपने पिता का नाम रोशन कर सके।

उम्मेद ने बताया कि सेना का उन्हें अभी भी परिवार के सदस्यों की तरह ही पूरा प्यार और सहयोग मिल रहा है। मां उमा देवी के इलाज से लेकर भाई बहनों की पढ़ाई व अन्य समस्याओं के समाधान के लिए गढ़वाल राइफल्स के सैनिकों ने सहयोग दिया है।

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