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Dehradun News: ऑनलाइन प्रक्रिया से आसान हुआ विवाह पंजीकरण

Mon, 19 Jan 2026 06:54 PM IST
Dehradun Bureau देहरादून ब्यूरो
Updated Mon, 19 Jan 2026 06:54 PM IST
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Marriage registration made easy with online process
- 27 जनवरी को पूरे होंगे यूसीसी को लागू हुए एक साल
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- यूसीसी लागू होने के बाद अब तक 4,74,447 विवाह पंजीकरण
- पहले पंजीकरण के लिए सब रजिस्ट्रार ऑफिस में होना पड़ता था उपस्थित
अमर उजाला ब्यूरो
देहरादून। उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) को लागू हुए 27 जनवरी को एक साल पूरा हो जाएगा। महिला सशक्तिकरण, बाल अधिकारों की सुरक्षा व नागरिक अधिकारों में समता कायम करने के साथ ही यूसीसी का एक महत्वपूर्ण योगदान प्रक्रियाओं के सरलीकरण के रूप में रहा है। यही कारण है कि यूसीसी लागू होने के एक साल से कम समय में 4,74,447 शादियों का पंजीकरण हो चुका है। पति-पत्नी कहीं से भी ऑनलाइन माध्यम से विवाह पंजीकरण कर रहे हैं। पहले उन्हें दो गवाहों के साथ तय तिथि पर सब रजिस्ट्रार कार्यालय में उपस्थित होना पड़ता था।
यूसीसी लागू होने से पहले उत्तराखंड विवाहों का अनिवार्य रजिस्ट्रीकरण अधिनियम, 2010 के तहत किए जाते थे। यह पूरी प्रक्रिया ऑफलाइन थी, इसलिए पति-पत्नी को दो गवाहों के साथ विवाह पंजीकरण के लिए सब रजिस्ट्रार कार्यालय में उपस्थित होना पड़ता था। लेकिन यूसीसी के लगभग शत प्रतिशत विवाह पंजीकरण ऑनलाइन माध्यम से हो रहे हैं जिसमें दंपति या गवाह कहीं से भी, अपने रिकॉर्ड और वीडियो बयान दर्ज करा, पंजीकरण के लिए आवेदन कर सकते हैं। यही कारण है कि यूसीसी लागू होने के बाद एक साल से कम समय में 19 जनवरी 2026 तक 4,74,447 विवाह पंजीकरण संपन्न हो चुके हैं। इस तरह प्रतिदिन औसत पंजीकरण की संख्या 1400 के करीब पहुंच रही है, जबकि पिछले अधिनियम में विवाह पंजीकरण का औसत प्रतिदिन 67 का आता था।
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लिव इन रिलेशनशिप के 68 पंजीकरण
यूसीसी के लागू होने के बाद प्रदेश में लिव इन रिलेशनशिप में जाने के 68 पंजीकरण किए गए। जबकि दो लोगों ने लिव इन रिलेशनशिप समाप्त करने का प्रमाण पत्र प्राप्त किया। 316 लोगों ने ऑनलाइन माध्यम से ही विवाह विच्छेद किया। यूसीसी तहत आवेदन के बाद विवाह पंजीकरण प्रमाणपत्र जारी करने के लिए 15 दिन की समय सीमा तय है, लेकिन आवेदन करने के बाद औसत पांच दिन के भीतर ही पंजीकरण प्रमाणपत्र प्राप्त हो रहा है। जबकि पुराने अधिनियम में एक तो आवेदकों को भौतिक तौर पर पंजीकरण कार्यालय में उपस्थित होना पड़ता था, उस पर विवाह पंजीकरण के लिए समय सीमा भी तय नहीं थी।
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कोट
उत्तराखंड ने समान नागरिक संहिता लागू करते हुए अन्य राज्यों को दिशा दिखाई है। बीते एक साल में जितनी पारदर्शी और सरलता से यूसीसी के प्रावधानों को लागू किया गया है, उससे लोगों में पूरी प्रक्रिया के प्रति विश्वास बढ़ा है। यही कारण है कि अब बड़ी संख्या में लोग यूसीसी के तहत पंजीकरण करवा रहे हैं। उत्तराखंड समान नागरिक संहिता हर तरह से एक मॉडल कानून साबित हुआ है।-पुष्कर सिंह धामी, मुख्यमंत्री उत्तराखंड
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