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नए साल में छूट जाएगा क्रूर ग्रहों का साथ
कौशल सिखौला/अमर उजाला, हरिद्वार
Updated Wed, 05 Mar 2014 07:15 PM IST
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वक्री होकर एक ही राशि में चल रहे शनि, मंगल और राहु का साथ अब छूटने वाला है। मंगल तुला राशि का त्याग कर कुछ ही दिनों में कन्या राशि में छलांग लगाएंगे। इस वर्ष के आखिरी सप्ताह में पड़ रहा समसप्तक योग देश की राजनीति में विशेष परिवर्तन लाने वाला है।
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कहीं अचानक सुनामी भी
वर्तमान संवत् के शेष दिनों में बहुत कुछ बदल रहा है। अनेक पंचांगों ने आशंका व्यक्त की है कि यह बदलाव विश्व में कहीं न कहीं अचानक सुनामी भी ला सकता है।
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वर्तमान में शनि, मंगल और राहु तीनों क्रूर ग्रह तुला राशि में एक साथ चल रहे हैं। मंगल का वक्री होना दुर्भिक्ष तथा शनि की वक्र चाल भयंकर रोग लाती है।
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नव संवत्सर नया संदेश
सुखद बात यह है कि तीनों ग्रह का एक राशि में साथ चलने का यह क्रम 24 मार्च तक ही जारी रहेगा। 25 मार्च को शनि और राहु का साथ छोड़कर मंगल कन्या राशि में एकाएक छलांग लगाएंगे।
ज्योतिषाचार्यों के अनुसार यह स्थिति रोग, आपदा और सत्ता परिवर्तन के हालात पैदा करती है। वर्तमान संवत्सर का समापन 31 मार्च को हो जायेगा। एक अप्रैल को नव संवत्सर नया संदेश लेकर आ रहा है।
इसके बावजूद वर्तमान संवत्सर के आखिरी सात दिनों में सूर्य और मंगल का समसप्तक योग पड़ रहा है। यह योग अस्थिरता लेकर आता है। विशेष रूप से राजा की नैया डगमगाने लगती है।
पंचांगों की धारणा एक समान
काशी पंचांग, मार्तण्ड पंचांग, देवीदयाल पंचांग, गंगा पंचांग, श्रीकृष्ण पंचांग आदि के अनुसार शनि, मंगल और राहु की वक्री गति दूरगामी परिणाम देती है। यदि मंगल ग्रह शनि और राहु का साथ एक माह और बनाए रखते तो ज्योतिषीय दृष्टि से अनर्थ हो सकता था।
सूर्य ने हस्तक्षेप कर मंगल को कन्या में भेजा और बाहर निकले मंगल के साथ स्वयं समसप्तक योग बना लिया। वर्ष के आखिरी सप्ताह में बने इस योग से धरती पर आने वाले अनेक संकट टल गये हैं।