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सौ साल बाद अज्ञातवास से लौट आए पांडव
अमर उजाला, नागथात
Updated Thu, 26 Dec 2013 10:20 AM IST
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पूरी एक सदी बाद उत्तराखंड के खोफ्टी गांव में महाभारत काल सा नजारा था। मौका था मंडवाणा पर्व का जहां पांडवों ने भिक्षां देहि.. की आवाज लगाते हुए घरों में दस्तक दी।
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ग्रामीणों ने भी दरवाजे पर खड़े युधिष्ठिर, भीम, अर्जुन, नकुल और सहदेव को भरपूर अनाज, दालें दान की। दोपहर बाद पांडवों ने खेतों में हल चलाया। गांव वालों को सुख-समृद्धि का आशीष दिया। पर्व का नौ दिन बाद बुधवार को समापन हो गया।
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पंडित कांतिराम जोशी और मायाराम जोशी ने बताया कि अज्ञातवास के दौरान पांडवों ने लाखामंडल और आसपास के क्षेत्रों में समय गुजारा। उस वक्त उन्हें स्थानीय ग्रामीणों से भिक्षा मांगकर, उनके खेतों में हल चलाकर जीविका चलानी पड़ी।
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उनकी याद में नौ दिन तक चले इस पर्व में गांव के सार्वजनिक स्थान थारी में अखंड जोत जलाई गई। लोगों ने व्रत रखकर पांडवों की पूजा की, साथ ही समृद्धि की कामना भी। पर्व के आखिरी दिन पांडवों और कौरवों के बीच जमीन का बंटवारे की परंपरा भी निभाई गई।
इस दौरान पांडवों ने गांव की परिक्रमा भी की। 100 साल बाद पर्व मनाने के कारण पर बुजुर्गों ने पूर्व में हुए पूजन का हवाला दिया। कहा स्थानीय देवताओं की इच्छा का पालन करते हुए इस पर्व को एक सदी बाद फिर मनाया गया।
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गांव के वयोवृद्ध अतर सिंह, टीकम सिंह भंडारी ने बताया कि उनके सामने भी पहली बार यह पर्व मना है। अब यह कभी भी, किसी भी गांव में मनाया जा सकता है।