मार्केटिंग सुविधा की योजना बना रही 13 मंडी समितियों को करारा झटका
किसानों की आय दोगुनी करने के लिए बेहतर मार्केटिंग सुविधा की योजना बना रही मंडी समितियों को करारा झटका लगा है। प्रदेश की 13 मंडी समितियां इस साल मंडी शुल्क से होने वाली आय के घटने से घाटे में पहुंच गई हैं।
इस साल मंडी समितियों का करीब पांच करोड़ का राजस्व घटा है।अब उत्तराखंड कृषि उत्पादन विपणन बोर्ड ने घाटे में चल रही मंडी समितियों के सचिवों को आय बढ़ाने के निर्देश दिए हैं।
किसानों को विपणन की सुविधा उपलब्ध कराने वाली मंडी समितियां खुद घाटे में पहुंच गई है। फल, सब्जी, अनाज के क्रय-विक्रय पर लगने वाले मंडी शुल्क से ही मंडी समितियों की आय होती है। इसी से समितियां किसानों को बेहतर मार्केटिंग सुविधाएं और मंडियों में विकास कार्य कराती हैं।
कुमाऊं मंडल की रुद्रपुर, काशीपुर, सितारगंज और अन्य मंडियों में धान कम पहुंचने से मंडी समितियों की आय प्रभावित हुई। पिछले वर्ष की तुलना में धान क्रय-विक्रय से प्राप्त होने वाले मंडी शुल्क में 12 करोड़ रुपये के राजस्व का नुकसान हुआ है। इसे देखते हुए बोर्ड ने आय बढ़ाने के लिए सचिवों पर दबाव बनाया है।
मंडी शुल्क ही समितियों की आय का मुख्य साधन
उत्तराखंड कृषि उत्पादन एवं विपणन एक्ट के अनुसार मंडी समितियां अनाज पर 2.5 प्रतिशत और फल-सब्जी पर 1.5 प्रतिशत मंडी शुल्क लेती है। यही शुल्क मंडी समितियों की आय का मुख्य साधन है। इसके साथ ही दुकानों के किराए से भी मंडी समितियों की कमाई होती है।
मंडी समितियों को आय बढ़ाने के लिए टैक्स चोरी रोकने के लिए निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही सचिवों को रोजाना मंडी में माल की आवक को दर्ज कर निगरानी रखने को कहा गया है। -राम बिलास यादव, अपर सचिव, कृषि
मंडी समितियां आय में कमी (लाख रुपये में)
सितारगंज 58
हरिद्वार 28
हल्द्वानी 60
काशीपुर 90
रुद्रपुर 100
जसपुर 37
रामनगर 13.15
किच्छा 37
बाजपुर 35
गदरपुर 45
विकासनगर 1.75
नानकमत्ता 1.60
कोटद्वार 1.95