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गांधी जयंती: मसूरी की वादियों में बापू को मिलती थी नई ऊर्जा, प्रार्थना सभा से जनसभा तक गूंजा अहिंसा का संदेश

Fri, 02 Oct 2026 03:16 PM IST
Renu Saklani सुनील सिलवाल, संवाद न्यूज एजेसी, मसूरी
सुनील सिलवाल, संवाद न्यूज एजेसी, मसूरी Published by: Renu Saklani Updated Fri, 02 Oct 2026 03:16 PM IST
सार

पहाड़ों की रानी से महात्मा गांधी का गहरा संबंध रहा है। ठंडी हवाओं और हिमालय की चोटियों के बीच महात्मा गांधी ने मसूरी में लोगों से संवाद किया। दो दौर की यात्राओं में उन्होंने आजादी की लड़ाई से जुड़े विचार साझा किए और अपने आचरण से देशसेवा का संदेश दिया।

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Mahatma Gandhi mussoorie visit queen of hills gave bapu new energy and spread his message of Peace
मसूरी के सिल्वर्टन मैदान में प्रार्थना सभा को किया था महात्मा गांधी ने संबोधित - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक

विस्तार

महात्मा गांधी ने वर्ष 1929 और 1946 में पहाड़ों की रानी मसूरी में प्रवास किया था। उन्होंने यहां लोगों से संवाद किया और आजादी की लड़ाई के लिए अहिंसा व स्वदेशी का संदेश दिया। गांधी जी के लिए मसूरी आत्मिक शांति और नई ऊर्जा का स्रोत थी।

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गांधी जी पहली बार वर्ष 1929 में मसूरी आए थे। 15 अक्तूबर को हरिद्वार में एक कार्यक्रम के बाद वे देहरादून होते हुए मसूरी पहुंचे। 18 अक्तूबर को उन्होंने नगर पालिका के पार्षदों को संबोधित किया। 24 अक्तूबर तक वे हैप्पी वैली के समीप बिड़ला हाउस में ठहरे। इस दौरान उन्होंने लोगों को अहिंसा, सत्य और स्वदेशी के रास्ते पर चलने का संदेश दिया। उनकी प्रार्थना सभाओं में स्थानीय लोग बड़ी संख्या में जुटते थे।

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वर्ष 1946 में 28 मई को गांधी जी एक बार फिर मसूरी पहुंचे। कुलड़ी स्थित सिल्वर्टन मैदान में उनकी प्रार्थना सभा हुई, जहां बड़ी संख्या में लोग उन्हें सुनने आए। उन्होंने लोगों को अहिंसा अपनाने और आजादी के लिए मजबूती से आगे बढ़ने का संदेश दिया। गांधी जी ने मसूरी को अपने संवाद का केंद्र बनाया और समाज के विभिन्न वर्गों से मुलाकात की।
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चांदी की छड़ी की लगाई बोली और दान कर दी

गांधी जी के 1946 के प्रवास से जुड़ा एक प्रसंग उनकी सादगी दर्शाता है। स्थानीय लोगों ने उन्हें सम्मान के तौर पर चांदी की छड़ी भेंट की थी। गांधी जी ने इसे अपने पास रखने के बजाय इसकी बोली लगवा दी। चांदी की छड़ी 800 रुपये में बिकी, जिसकी पूरी रकम उन्होंने खादी ग्रामोद्योग को दान कर दी। उनके लिए उपहार का मूल्य जनहित में था।

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मसूरी से गांधी जी का रहा आत्मीय जुड़ाव

गांधी जी को मसूरी का प्राकृतिक वातावरण भी आकर्षित करता था। हिमालय की चोटियां, शांत वातावरण और पहाड़ों की सुंदरता का उन्होंने अपने लेखों में भी उल्लेख किया। लेखक अनमोल जैन के अनुसार, महात्मा गांधी का मसूरी से गहरा लगाव था। मसूरी के लाइब्रेरी बाजार का नाम अब गांधी चौक रखा गया है, जो उनकी स्मृतियों को संजोता है।
 
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