{"_id":"6508a1609f0fd315af0083f4","slug":"mahasu-maharaj-the-god-of-justice-loves-his-devotees-very-vikas-nagar-news-c-5-1-drn1030-247786-2023-09-19","type":"story","status":"publish","title_hn":"Dehradun News: विशेष धूप से महकता है देव का गर्भगृह, भेजने वाला आज तक अनाम","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Dehradun News: विशेष धूप से महकता है देव का गर्भगृह, भेजने वाला आज तक अनाम
विज्ञापन
पांच दशक से भी लंबे समय से दिल्ली से भेजी जा रही है धूप
चारों महासू देवता भाईयों के पूजन में धूप का होता है प्रयोग
न्याय के देवता महासू महाराज अपने भक्तों से बड़ा प्रेम करते हैं। एक भक्त की भेंट स्वरूप भेजी धूप की सुगंध महासू देवता को इतना भायी कि अब विशेष सांध्यकालीन पूजन में इसी धूप के धूपन का प्रयोग होता है। पिछले पांच से छह दशक से दिल्ली से धूप भेजी जाती है, लेकिन इस धूप को भेजने वाले का नाम और पता आज तक किसी को मालूम नहीं है।
महासू देवता के मंदिर में सांध्यकालीन पूजन का विशेष विधान है। पूजन में देवता को नगरास के फूल अर्पित किए जाते हैं। पूजन में एक विशेष धूप का भी प्रयोग होता है, जिससे गर्भगृह के साथ पूरा परिसर भी मन को शांति देने वाली सुगंध से भर जाता है। इस दौरान भक्तों का एक अलग ही आध्यात्मिक उर्जा से साक्षात्कार होता है।
महासू देवता मंदिर समिति हनोल के सचिव मोहल लाल सेमवाल ने बताया कि करीब पांच से छह दशक से प्रत्येक वर्ष जनवरी में दिल्ली से विशेष धूप का पार्सल मंदिर में आता है। बताया कि धूप की मात्रा करीब करीब दो से ढाई किलोग्राम के करीब होती है। उन्होंने बताया कि चारों महासू देवता को अटूट श्रद्धापूर्वक भेजी जाने वाले विशेष धूप की सुगंध बहुत प्रिय है। बताया कि ऐसा कोई साल नहीं आया जब धूप मंदिर नहीं पहुंची होगी।
विज्ञापन
मोहनलाल सेमवाल ने बताया कि धूप को बराबर भाग में विभाजित कर बूठिया महासू (बौठा महासू), मैंद्रथ स्थित बासिक महासू, ठडियार (उत्तरकाशी) स्थित पबासिक महासू देवता के मंदिर में भेजा जाता है। उन्होंने बताया कि चारों महासू की सांध्यकालीन पूजा इसी धूप के बने धूपन से होती है। मंदिर समिति के सचिव बताते है कि यह धूप दिल्ली से आती है, लेकिन भेजने वाला कौन इसका आज तक पता नहीं चल पाया है।
राष्ट्रपति भवन से नमक भेजना कोरी अफवाह
सचिव मोहन लाल सेमवाल ने राष्ट्रपति भवन से नमक भेजने वाली बात को सिरे से नकार दिया। उन्होंने बताया कि राष्ट्रपति भवन से मंदिर को किसी तरह का नमक नहीं भेजा जाता है। उन्होंने बताया कि दिल्ली से बस यह धूप आती है। बताया कि राष्ट्रपति भवन के नमक भेजने की बात कोरी अफवाह है।
विज्ञापन
चारों महासू देवता भाईयों के पूजन में धूप का होता है प्रयोग
न्याय के देवता महासू महाराज अपने भक्तों से बड़ा प्रेम करते हैं। एक भक्त की भेंट स्वरूप भेजी धूप की सुगंध महासू देवता को इतना भायी कि अब विशेष सांध्यकालीन पूजन में इसी धूप के धूपन का प्रयोग होता है। पिछले पांच से छह दशक से दिल्ली से धूप भेजी जाती है, लेकिन इस धूप को भेजने वाले का नाम और पता आज तक किसी को मालूम नहीं है।
महासू देवता के मंदिर में सांध्यकालीन पूजन का विशेष विधान है। पूजन में देवता को नगरास के फूल अर्पित किए जाते हैं। पूजन में एक विशेष धूप का भी प्रयोग होता है, जिससे गर्भगृह के साथ पूरा परिसर भी मन को शांति देने वाली सुगंध से भर जाता है। इस दौरान भक्तों का एक अलग ही आध्यात्मिक उर्जा से साक्षात्कार होता है।
विज्ञापन
महासू देवता मंदिर समिति हनोल के सचिव मोहल लाल सेमवाल ने बताया कि करीब पांच से छह दशक से प्रत्येक वर्ष जनवरी में दिल्ली से विशेष धूप का पार्सल मंदिर में आता है। बताया कि धूप की मात्रा करीब करीब दो से ढाई किलोग्राम के करीब होती है। उन्होंने बताया कि चारों महासू देवता को अटूट श्रद्धापूर्वक भेजी जाने वाले विशेष धूप की सुगंध बहुत प्रिय है। बताया कि ऐसा कोई साल नहीं आया जब धूप मंदिर नहीं पहुंची होगी।
विज्ञापन
मोहनलाल सेमवाल ने बताया कि धूप को बराबर भाग में विभाजित कर बूठिया महासू (बौठा महासू), मैंद्रथ स्थित बासिक महासू, ठडियार (उत्तरकाशी) स्थित पबासिक महासू देवता के मंदिर में भेजा जाता है। उन्होंने बताया कि चारों महासू की सांध्यकालीन पूजा इसी धूप के बने धूपन से होती है। मंदिर समिति के सचिव बताते है कि यह धूप दिल्ली से आती है, लेकिन भेजने वाला कौन इसका आज तक पता नहीं चल पाया है।
राष्ट्रपति भवन से नमक भेजना कोरी अफवाह
सचिव मोहन लाल सेमवाल ने राष्ट्रपति भवन से नमक भेजने वाली बात को सिरे से नकार दिया। उन्होंने बताया कि राष्ट्रपति भवन से मंदिर को किसी तरह का नमक नहीं भेजा जाता है। उन्होंने बताया कि दिल्ली से बस यह धूप आती है। बताया कि राष्ट्रपति भवन के नमक भेजने की बात कोरी अफवाह है।