हरिद्वार कुंभ 2021: महाकुंभ की अवधि पर मुख्य सचिव के बयान से संतों में रोष, कहा- नहीं मानेंगे सरकार की बात
महाकुंभ की अवधि एक माह की होने से धर्मनगरी में हलचल बढ़ गई है। मुख्य सचिव ओम प्रकाश के एक अप्रैल से महाकुंभ की शुरुआत होने के बयान से अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद में मतभेद उभरकर सामने आ गए हैं।
हरिद्वार महाकुंभ 2021 ः केवल एक माह का होगा कुंभ, मुख्य सचिव ओम प्रकाश ने की पुष्टि
परिषद के अध्यक्ष श्रीमहंत नरेंद्र गिरि ने दो टूक कहा कि संतों को विश्वास में लिए बगैर महाकुंभ की अवधि तय नहीं हो सकती है। 24 या 25 फरवरी को अखाड़ा परिषद की सामूहिक बैठक होगी और कुंभ अवधि का फैसला लेगी।
जबकि महामंत्री श्रीमहंत हरि गिरि ने सरकार के हर फैसले का स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि कोरोनाकाल में खुद को जिंदा रखने के साथ दूसरों की सुरक्षा पहली प्राथमिकता है।
अभी जारी नहीं हुई महाकुंभ की अधिसूचना
महाकुंभ की अधिसूचना अभी जारी नहीं हुई है। मंगलवार को मुख्य सचिव ओम प्रकाश ने एक अप्रैल से महाकुंभ शुरू होने का बयान दिया है। मुख्य सचिव के बयान ने हरिद्वार में हलचल बढ़ा दी है।
अखाड़ा परिषद के अंदरूनी मतभेद भी सामने आ गए हैं। परिषद अध्यक्ष श्रीमहंत नरेंद्र गिरि ने कहा कि मुख्यमंत्री की ओर से पहले ही चार शाही स्नानों की घोषणा कर दी गई है। ऐसे में एक अप्रैल से महाकुंभ होगा तो 11 मार्च का शाही स्नान कैसे होगा।
कोरोना को देखते हुए एक अप्रैल से सरकार का निर्णय ठीक हो सकता है। 25 मार्च से बैरागी संतों का आगमन शुरू हो जाएगा। इससे पहले सरकार को संतों के लिए व्यवस्थाएं सुनिश्चित करनी चाहिए। - बाबा हठयोगी
22 फरवरी को हरिद्वार पहुंच जाऊंगा। 24 या 25 फरवरी को अखाड़ा परिषद की बैठक में कुंभ अवधि को लेकर सामूहिक फैसला लिया जाएगा। सरकार संतों का साथ नहीं होगी तो संत भी साथ नहीं देंगे।
- श्रीमहंत नरेंद्र गिरि, अध्यक्ष अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद
सरकार का हर फैसला मान्य होगा। इसके लिए पहले ही जुबान दे चुका हूं। कोरोना काल में खुद के साथ दूसरों की चिंता और सुरक्षा प्राथमिकता है। कुंभ की अवधि कम या ज्यादा करना सरकार का फैसला है। इसका हृदय से स्वागत होगा।
- श्रीमहंत हरि गिरि, महामंत्री अखाड़ा परिषद