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Dehradun News: फर्जी दस्तावेजों से मालिक बन जाते माफिया और भटकते रहते भू स्वामी

Sat, 15 Jul 2023 01:48 AM IST
Dehradun Bureau देहरादून ब्यूरो
Updated Sat, 15 Jul 2023 01:48 AM IST
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Mafia becomes owner with fake documents and landowner keeps wandering
ऑफिस के अंदर रिकाॅर्ड रूम में इतना बड़ा ‘खेल’ सालों से चल रहा था और किसी को भनक तक नहीं लगी। जनसुनवाई में आई महिला ने रिकॉर्ड में जमीन के दस्तावेज बदलने के आरोप लगाए तो डीएम सोनिका ने जांच के आदेश दे दिए। हालांकि, उनका शक तब गहराया जब आईएएस प्रेमलाल की पावर ऑफ अटार्नी लेकर कुछ लोग 60 बीघा जमीन पर अपना दावा करने लगे।
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डीएम ने दस्तावेजों की जांच कराई तो रिकाॅर्ड रूम से फाइल ही गायब मिली। इसके बाद प्रशासन ने इस मामले की गंभीरता से जांच शुरू की तो परत दर परत खुलती चली गई और गिरोह का पर्दाफाश हो गया। पीलीभीत के नगरिया तहसील पूरनपुर के रहने वाले मक्खन सिंह ने दावा किया कि 1984 में उनके पिता कश्मीर सिंह के नाम सुश्री प्रेमलाल ने इस जमीन की पावर ऑफ अटार्नी की थी। बाद में कश्मीर सिंह ने मक्खन सिंह के नाम इसकी पावर ऑफ अटार्नी कर दी। जांच में दावे गलत साबित हुए हैं।
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दरअसल, यह पूरा मामला चाय बागान और सीलिंग की जमीन से जुड़ा हुआ है। देहरादून में हजारों बीघा ऐसी जमीन है जो सीलिंग में अतिरिक्त भूमि में दर्ज की गई थी। जिला प्रशासन और हाईकोर्ट ने सीलिंग की अतिरिक्त भूमि पर खरीद-फरोख्त पर रोक लगाई हुई है। जब यह प्रक्रिया हुई तब इस पर ठीक तरह से सरकारी कब्जा नहीं लिया गया और न ही इसे दस्तावेजों में ठीक से दर्ज किया गया। इसी का लाभ उठाकर भू-माफिया और रजिस्ट्रार कार्यालय के कर्मचारी सालों से जमीन पर अवैध कब्जा कराने में लगे हैं।
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अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व रामजी शरण शर्मा ने बताया कि फर्जी विक्रय, दानपत्र और दस्तावेज में छेड़खानी कर फर्जी मालिकाना हक जताया जा रहा है। यह सभी दावे सीलिंग की जमीनों, चाय बागान, लीची के बाग, शत्रु संपत्ति, निष्कांत संपत्ति, निशक्तजनों की निजी संपत्तियों, विदेश में रहने वालों की जमीनें और ग्राम सभा की भूमि पर किए जा रहे हैं।

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ऐसे चलता था ‘खेल’
फर्जी दस्तावेजों को रिकाॅर्ड में शामिल करा दिया जाता था। जबकि असली कागज या फाइल रिकाॅर्ड से गायब कर दी जाती थी। इसके बाद सरकारी जमीन होने पर भूमाफिया पैरोकारी के अभाव में आसानी से जमीन कब्जा लेते थे, जबकि निजी भूमि होने पर भू स्वामी दावे करता रहता था और कागजों के अभाव में उसकी सुनवाई नहीं होती थी। ऐसे मामले सालों तक कोर्ट में चलते और माफिया नकली कागजादों के जरिये निर्माण करा लेता।
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