फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   lord save forest in uttarakhand

देवभूमि उत्तराखंड में भगवान बचाते हैं जंगल

Fri, 12 Aug 2016 03:52 PM IST
ब्यूरो /अमर उजाला, चंपावत
ब्यूरो /अमर उजाला, चंपावत Updated Fri, 12 Aug 2016 03:52 PM IST
विज्ञापन
lord save forest in uttarakhand
forest of champawat

उत्तराखंड में चंपावत ब्लॉक के सिमल्टा वन पंचायत का जंगल देवी मां बचाएगी। यहां के जंगल को मां भगवती को अर्पित किया गया।

विज्ञापन


वन पंचायत के सरपंच हरीश चंद्र पांडेय की अध्यक्षता में हुए कार्यक्रम में करीब 300 हेक्टेयर वनों को पांच साल के लिए मां को अर्पित किया गया। उमेश पांडेय, घनश्याम जोशी, बंशीधर, खीम सिंह आदि ने जंगल को बचाने के लिए मां भगवती के सम्मुख ग्रामीणों को शपथ दिलाई।
विज्ञापन


कहा गया कि सिर्फ घास काटें और किसी भी तरह से पेड़ों को नुकसान न पहुंचाया जाए। ग्रामीण केवल पेड़ से गिरने वाली सूखी पत्तियों और लकड़ियों को ही उपयोग में ला सकेंगे। वन क्षेत्राधिकारी बृजमोहन टम्टा ने बताया कि इस वन पंचायत में बांज, देवदार, सुरई के पौधे अधिक मात्रा में है। इस वजह से यहां जल स्रोत भी पर्याप्त है।
विज्ञापन
विज्ञापन


इस मौके पर वन बीट अधिकारी शिवदत्त भट्ट सहित कई लोग मौजूद थे। बाद में पौध रोपण भी किया गया। लोगों की मान्यता है कि एक बार समर्पित कर देने के बाद इस जंगल से किसी भी चीज का दोहन करने से देवी-देवता के कोप का भाजन बनना पड़ता है।

बहरहाल इन इलाकों में देवी के आशीर्वाद से जंगल अधिक सुरक्षित हो रहे हैं। जिससे उनका विस्तार भी तेजी से हो रहा है। ये प्रवृत्ति वनों को बचाने में मददगार हो रही है।

दो वर्ष में छह वन पंचायतों ने चलाई मुहिम

lord save forest in uttarakhand

देवभूमि में देवी-देवता सिर्फ आध्यात्मिक ताकत ही नहीं देते, बल्कि वन संरक्षण में भी भूमिका निभा रहे हैं। बीते दो साल में 6 वन पंचायतों को विभिन्न मंदिरों को समर्पित किया जा चुका है। जंगलों को ईश्वर के आसरे रखने से अवैध कटान और अन्य तरह का नुकसान भी कम हुआ है। साथ ही जंगल भी फले-फूले हैं।

चंपावत वन प्रभाग में 65980.12 हेक्टेयर आरक्षित, 34375.95 सिविल और 22815.70 हेक्टेयर पंचायती वन हैं। सरपंच दीपक बोहरा का कहना है कि यहां वनों को बचाने के लिए मार्च 2014 से अब तक 6 गांवों के जंगलों को देवी को चढ़ाया जा चुका है।

इन इलाकों में दो से पांच साल तक के लिए जंगलों को मां हिंग्लादेवी, इंसाफ के देव गोरलदेव, नागनाथ देव, भगवती देवी को समर्पित किया गया। सेलाखोला, छतकोट, खर्ककार्की, बाजरीकोट, चौकी, कोट अमोड़ी के जंगल देवी-देवताओं को सौंप सुरक्षा की गुहार लगाई गई। देवी को चढ़ाने के बाद ये जंगल फल-फूल रहे हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed