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देहरादून के इस सैलून में था डकैताें का ‘कंट्रोल रूम’, यहां तैयार होती थी धन्नासेठों की कुंडली  

Fri, 04 Oct 2019 10:36 AM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal राकेश शर्मा, अमर उजाला, देहरादून
राकेश शर्मा, अमर उजाला, देहरादून Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal Updated Fri, 04 Oct 2019 10:36 AM IST
सार

  • पीरू ने ही तैयार की थी ईश्वरन और आरटीओ कर्मी के घर डकैती की जमीन

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पुलिस की गिरफ्त में आरोपी - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

फिल्म शोले में हरीराम नाई का किरदार तो आपको याद ही होगा। वह जेल में होने वाली हर गतिविधि की मुखबिरी जेलर को करता था। हरीराम की तरह ही देहरादून का सैलून संचालक पीरू शहर के धन्नासेठों का दुश्मन नंबर एक था। वह उनकी गोपनीय जानकारी डकैतों को देता था। इसी जानकारी के आधार पर डकैत अपना शिकार चुनते थे। एक तरह से पीरू का सैलून डकैतों का कंट्रोल रूम था, जहां पर शहर के अमीरों की कुंडली तैयार करने का काम होता था। छोटी-छोटी जानकारी पता करने के साथ उनकी कमजोरी पर खास फोकस किया जाता था, ताकि वारदात के समय शिकार विरोध करने की हिम्मत तक ना जुटा सके।

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देहरादून में अभिमन्यु एकडेमी के मालिक आरपी ईश्वरन, आरटीओ आफिस के कर्मचारी के घर डकैती, बिल्डर राकेश बत्ता और प्रमुख चिकित्सक के आवास पर डकैती के प्रयास की घटना का सूत्रधार कोई और नहीं सैलून संचालक मुजिब्बुर रहमान उर्फ  पीरू था। वह डकैतों के मुखबिर तंत्र के रूप में बड़ा किरदार निभाता था। बरसों से राजेन्द्र नगर में सैलून की बदौलत धनाढ्य परिवारों में पीरू का खासा दखल था। ईश्वरन लूटपाट प्रकरण से पहले पीरू के इस खौफनाक चेहरे से कोई वाकिफ नहीं था। 

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सैलून जाती थी आरटीओ कर्मी की पत्नी

डकैती का शिकार हुए आरटीओ कर्मचारी की पत्नी करीब डेढ़ दशक से सैलून की सेवाएं ले रही थी। परिवार के शाही रहन सहन से लेकर काली कमाई तक पीरू ने पूरी जानकारी जुटाई थी। वहीं, इनकम टैक्स की धरपकड़ में नाम आने के बाद आरपी ईश्वरन के परिवार का पूरा चिट्ठा पीरू ने परिचितों के माध्यम से तैयार किया था।

हालांकि, ईश्वरन ने पीरू से मुलाकात से इनकार किया था। बिल्डर राकेश बत्ता पर भी उसके करीबियों की मदद से पूरा होमवर्क किया गया था। पीरू ने ही बत्ता पर विश्वास जमाने के लिए रायपुर के विधायक उमेश शर्मा काऊ के नाम का प्रयोग करने की सलाह दी थी। डकैतों ने दोनों घटनाओं में बाहर रहने वाले उनके बच्चों की जान का डर दिखाकर पीड़ित परिवाराें को घुटने टेकने को मजबूर किया था।

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डकैती के माल में मिलता था हिस्सा 

पीरू अपने नेटवर्क की बदौलत डकैती की रकम में बराबर का हिस्सेदार होता था। पुलिस हिरासत में हैदर ने खुलासा किया कि आरटीओ कर्मचारी के घर से मिले कैश में पीरू और उसके साथी फुरकान के हिस्से में भी 23-23 लाख रुपये आए थे। ईश्वरन लूटपाट प्रकरण में पांच-पांच लाख रुपये की हिस्सेदारी मिलने की खबर है।

 

जाहिर है कि पीरू को सैलून से ज्यादा मुखबिरी का यह काम रास आ रहा था। ऐसे में पीरू के मुखबिर तंत्र में कुछ और लोगों के शामिल होने से भी इंकार नहीं किया जा सकता है। एसएसपी अरुण मोहन जोशी का कहना है कि पुलिस तमाम पहलुओं पर काम कर रही है। पहले वांछित लोगाें की गिरफ्तारी और माल की रिकवरी पर फोकस है। अगले चरण में पर्दे के पीछे छिपे चेहरों को भी बेनकाब किया जाएगा।

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