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गजब: जंगल के ऊपर 4.5 किमी लंबा 'हवाई रास्ता'

Thu, 14 May 2015 01:25 PM IST
ओमप्रकाश तिवारी/अमर उजाला, देहरादून
ओमप्रकाश तिवारी/अमर उजाला, देहरादून Updated Thu, 14 May 2015 01:25 PM IST
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longest flyover of uttarakhand.

उत्तराखंड में जंगलमय और मंगलमय सफर की राह खुल गई है। यहां देहरादून-कोटद्वार मार्ग के बीच चिल्लरखाल से लालढांग में 4.5 किलोमीटर लंबा ग्रीन फ्लाईओवर बनाया जाएगा। लैंसडौन वन प्रभाग में 100 से अधिक पिलरों के सहारे बनने वाले उत्तराखंड के पहले ग्रीन फ्लाईओवर के लिए वन विभाग की ओर से हरी झंडी मिलने के बाद मुख्यमंत्री हरीश रावत की भी स्वीकृति मिल चुकी है।

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निर्माण पूरा होने के बाद लोग फ्लाईओवर के नीचे हरेभरे जंगल, उसमें टहलते हाथी, टाइगर आदि वन्यजीवों का दीदार भी कर सकेंगे।

बताया गया कि लोक निर्माण विभाग ने इस हवाई रास्ते को मूर्तरूप देने के लिए चार कंसलटेंट कंपनियों का चयन किया है। विभागीय अधिकारियों के साथ कंपनियों की 15 मई को बैठक होनी है। इसके बाद चारों कंपनियां 25 मई को फ्लाईओवर के संबंध में अपना प्रपोजल जमा करेंगी।
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जिस कंपनी का प्रपोजल बेहतर पाया जाएगा, उसका चयन फ्लाईओवर के डिजाइन, ड्राइंग और सर्वे आदि का काम करने के लिए किया जाएगा।

यूपी होकर नहीं गुजरना होगा, 2500 करोड़ लागत

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सूत्रों का कहना है कि कंसलटेंट कंपनी फाइनल होने के बाद 20 दिन में काम शुरू कर देगी। तीन से चार माह में कंपनी फ्लाईओवर कैसे बनेगा और उसकी क्या लागत आएगी, यह रिपोर्ट विभाग को सौंप देगी। इसके बाद शासन को तय करना होगा कि वह किस कंपनी से फ्लाईओवर का निर्माण कराए। पैसा कहां से लाए।

सूत्र बताते हैं कि फ्लाईओवर का निर्माण पीपीपी मोड पर कराया जा सकता है। इसके निर्माण पर फिलहाल 2500 करोड़ रुपये की लागत आने का अनुमान लगाया गया है।

देहरादून से कोटद्वार जाने के लिए अभी उत्तराखंड के लोगों को यूपी से होकर गुजरना पड़ता है। इससे जहां रास्ते की दूरी बढ़ जाती है, वहीं समय भी अधिक लगता है। वाहनों को यूपी में टैक्स आदि भी चुकाना पड़ता है। प्रदेश के लोगों की बहुत दिनों से मांग है कि दून को कोटद्वार से जोड़ने के लिए चिल्लरखाल-लालढांग सड़क को बनाया जाए।

डामरीकरण पर करीब 9 करोड़ रुपये खर्च करने के बाद सड़क का निर्माण रोक दिया गया था। उस समय सड़क निर्माण के लिए वन विभाग से अनुमति नहीं ली गई थी।

फ्लाईओवर से वन्य जीवों की मस्ती में नहीं पड़ेगा खलल

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वन विभाग का कहना था चिल्लरखाल से लालढांग तक सड़क बनाने से वन्य जीवों की दिनचर्या में खलल पड़ेगा, जिससे उनका व्यवहार प्रभावित होगा और वह हिंसक हो जाएंगे। इससे मानव और वन्यजीव संघर्ष बढ़ेगा।

इसके बाद शासन के निर्देश पर प्रमुख वन संरक्षक (वन्यजीव) धनंजय मोहन की अध्यक्षता में गठित समिति ने जून-2014 में सौंपी रिपोर्ट में आरक्षित वन क्षेत्र से गुजरने वाली 11.5 किमी लंबी सड़क के लिए जंगल के बीच से 7.5 किमी लंबा फ्लाईओवर बनाने का प्रस्ताव दिया।

लेकिन इतना लंबा फ्लाईओवर बनाने में लागत अधिक आने की वजह से समिति ने 12 सितंबर 2014 को दोबारा सौंपी अपनी रिपोर्ट में फ्लाईओवर को 4.5 किलोमीटर बनाने की अनुमति दी है। अब आगे का काम लोक निर्माण विभाग कर रहा है। फ्लाईओवर बनने के बाद लोगों को दून से कोटद्वार जाने के लिए यूपी जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी।

सीएम का कहना
चिल्लरखाल-लालढांग सड़क पर वन क्षेत्र में बनने वाले फ्लाईओवर की लगभग सभी बाधाएं दूर कर ली गई हैं। वाइल्ड लाइफ बोर्ड से सहमति मिल चुकी है। सरकार इस प्रोजेक्ट पर बेहद गंभीर है। कार्य तेजी से चल रहा है। जल्द ही निर्माण कार्य शुरू हो जाएगा।
-हरीश रावत, मुख्यमंत्री
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इच्छाशक्ति हो तो कुछ भी नामुमकिन नहीं

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ग्रीन फ्लाईओवर बनाने में तमाम तरह की दिक्कतें आ सकती हैं। लेकिन यदि विकास को गति देनी है तो इस तरह के प्रोजेक्ट बनाने ही पड़ते हैं। दुनियाभर में इस तरह के कार्य किए गए हैं जो पहले असंभव दिखते थे। उत्तरी मैक्सिको की पहाड़ियों में दुनिया का सबसे ऊंचा पुल बनाया गया है तो चीन ने समुद्र पर दुनिया का सबसे लंबा पुल बना दिया। यदि यह देश ऐसा कर सकते हैं तो हम क्यों नहीं कर सकते हैं?

चिल्लरखाल-लालढांग सड़क जंगल के बीच से बनाई जा रही है। यहां पर बहुत से जंगली जानवर रहते हैं। यह हाथियों का गलियारा भी है। जहां से सड़क गुजरेगी वहां पर दो प्राकृतिक नाले भी हैं। इसलिए इस क्षेत्र में जंगल के ऊपर से 4.5 किलोमीटर लंबा फ्लाईओवर बनाने की रिपोर्ट दी गई है। ऐसा होने पर वन्य जीवों की दिनचर्या प्रभावित नहीं होगी।
-धनंजय मोहन, प्रमुख वन संरक्षक

जंगल में फ्लाईओवर बनाने के लिए शर्त यह भी है कि उसके सभी कंपोनेंट बाहर बनाए जाएं। मौके पर केवल असेंबलिंग की जाए। एक बार निर्माण शुरू हो तो उसे तय समय पर पूरा कर दिया जाए, ताकि इसके निर्माण कार्य से वन्यजीव प्रभावित न हों।
-नितीशमणि त्रिपाठी, डीएफओ लैंसडौन

जानिए, दुनिया के खास पुलों के बारे में

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सबसे ऊंचा पुल मैक्सिको में
उत्तरी मैक्सिको की पहाड़ियों में दुनिया का सबसे ऊंचा पुल बनाया गया है। बलुआर्ट नामक यह पुल 403 मीटर यानी 1322 फुट ऊंचा है। यह 1124 मीटर यानी 3687 फुट लंबा है।

दुनिया का सबसे लंबा पुल चीन में
चीन में बने दुनिया के सबसे लंबे पुल की लंबाई 42.4 किलोमीटर है। चार साल में इसका निर्माण किया गया। पुल के साथ समुद्र में सुरंग भी बनाई गई है। इसे बनाने में 10 अरब युआन यानी 1.55 अरब डॉलर खर्च हुआ है। पुल को 5200 खंभों पर खड़ा किया गया है। इससे पहले दुनिया का सबसे लंबे पुल का रिकॉर्ड अमेरिकी प्रांत लाऊसिआना का लेक पॉंटमचार्ट्रेन था। चीन का पुल अमरीकी पुल से चार किलोमीटर अधिक लंबा है।

कोलकाता में प्रस्तावित देश का सबसे लंबा फ्लाईओवर
पश्चिम बंगाल सरकार ने कोलकाता में गड़िया से बांग्लादेश सीमा पर स्थित बनगांव तक 100 किलोमीटर लंबे फ्लाईओवर के निर्माण की योजना बनाई है। यदि यह बना जाता है तो यह देश ही नहीं दुनिया का सबसे लंबा ऐसा फ्लाईओवर होगा जिस पर कार और ट्रक समेत दूसरे वाहन भी चलेंगे। पश्चिम बंगाल के शहरी विकास मंत्री फिरहाद हाकिम इसे तीन साल में बनाना चाहते हैं। इस पर एक हजार करोड़ से एक लाख करोड़ रुपये तक खर्च आ सकता है।

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