{"_id":"798bc284ded62730fc5194ea296d1154","slug":"lokayukta-in-uttarakhand-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"लोकायुक्त के लिए अभी करें और इंतजार","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
लोकायुक्त के लिए अभी करें और इंतजार
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
Updated Thu, 21 Aug 2014 09:04 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
लोकायुक्त की नियुक्ति प्रक्रिया पूरी करने के लिए उत्तराखंड सरकार छह महीने का समय बढ़ाने के लिए अध्यादेश लाएगी। कानूनी रूप से 180 दिन 26 अगस्त को पूरे हो रहे हैं।
विज्ञापन
राज्यपाल की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा ड्राफ्ट
अब पांच दिन में नियुक्ति प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकती। सुराज एवं भ्रष्टाचार उन्मूलन एवं जनसेवा विभाग ने ड्राफ्ट तैयार कर लिया है। उम्मीद है कि आजकल में राज्यपाल की मंजूरी के लिए इसे भेजा जाएगा।
विज्ञापन
यह तीसरी मर्तबा होगा जब लोकायुक्त की नियुक्ति प्रक्रिया के लिए समय बढ़ाने की कवायद की जा रही है। कोई भी विधेयक विधानसभा में पास होने के बाद राज्यपाल की मंजूरी मिलते ही लागू मान लिया जाता है।
विज्ञापन
लेकिन उसके रूल्स एवं रेगुलेशन, नियुक्ति प्रक्रिया आदि पूरा करने के लिए 180 दिन का समय तय होता है। बीसी खंडूड़ी सरकार के लोकायुक्त को लागू करने में 180 दिन यूं ही गुजर गए।
इसके बाद राज्य की कांग्रेस सरकार ने खंडूड़ी के लोकायुक्त अधिनियम को निरस्त कर केंद्र की यूपीए सरकार का एक्ट एडाप्ट कर लिया। 26 अगस्त को नए एक्ट के भी 180 दिन पूरे हो जाएंगे।
मुख्य सचिव सुभाष कुमार ने कहा कि समय बढ़ाने के अलावा अब कोई रास्ता भी नहीं है। मिली जानकारी के मुताबिक सुराज एवं भ्रष्टाचार उन्मूलन व जनसेवा विभाग ने समय बढ़ाए जाने का अध्यादेश लाने के लिए ड्राफ्ट तैयार कर लिया है।
एक दो दिन में राज्यपाल की मंजूरी के लिए अध्यादेश का ड्राफ्ट राजभवन भेजा जाएगा। मंजूरी मिलते ही अध्यादेश लागू कर दिया जाएगा और सरकार को लोकायुक्त की चयन प्रक्रिया के लिए 180 दिन या जितना सरकार जरूरत समझेगी उतना समय मिल जाएगा।
ग्यारह महीने से प्रदेश में नहीं लोकायुक्त
पिछले ग्यारह महीनों से राज्य में कोई लोकायुक्त नहीं है। विगत 23 सितंबर 2013 को लोकायुक्त न्यायमूर्ति एमएम घिल्डियाल अपना कार्यकाल पूरा कर रिटायर हो गए हैं। तब से अब तक यह पद रिक्त चल रहा है।
750 से ज्यादा मुकदमे लंबित
देहरादून। राज्य में पिछले 11 महीने से लोकायुक्त नहीं होने भ्रष्टाचार के ज्यादातर मामलों की सुनवाई रुक गई है। सूत्रों की माने तो इस समय लोकायुक्त कार्यालय में 750 से ज्यादा मुकदमे लंबित हैं।
लोकायुक्त नहीं होने के कारण इनकी सुनवाई आगे नहीं बढ़ रही है, क्योंकि एक्ट में प्रावधान है कि लोकायुक्त नहीं होगा तो किसी मामले का निस्तारण भी नहीं हो सकेगा।
खंडूड़ी सरकार का लोकायुक्त
अक्तूबर 2011 में बीसी खंडूड़ी ने लोकायुक्त बिल पास कराकर राष्ट्रपति की मंजूरी केलिए भेजा। 03 सितंबर 2013 को राष्ट्रपति ने मंजूरी दी, 09 सितंबर 2013 को केंद्रीय गृह मंत्रालय ने उत्तराखंड विधायी विभाग को एक्ट की मंजूरी की सूचना दे दी।
24 सितंबर 2013 को विधायी विभाग ने बिल को प्रकाशित कराने के लिए सरकारी प्रेस पर भेजा। लेकिन इस एक्ट में विवाद यह था कि न्यायिक अधिकारियों को भी इसके अधीन कर दिया गया था।
कांग्रेस सरकार का लोकायुक्त (केंद्रीय एक्ट)
इस एक्ट से न्यायिक अफसरों को बाहर कर दिया गया। चयन समिति में मुख्यमंत्री, स्पीकर, उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश व नेता प्रतिपक्ष, उच्च न्यायालय को रखा गया।
विगत फरवरी में केंद्र के इस एक्ट को राज्य सरकार ने भी स्वीकार कर विधानसभा में पास करा लिया। इसके बाद 14 मई को चयन समिति की बैठक भी हुई लेकिन बात आगे नहीं बढ़ी।