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लोकसभा चुनाव 2019: सियासत के अजब रंग, जो कभी दुश्मन थे, आज हैं संग
Fri, 29 Mar 2019 03:36 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal
Updated Fri, 29 Mar 2019 03:36 PM IST
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भुवन चंद्र खंडूड़ी
- फोटो : अमर उजाला फाइल फोटो
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उत्तराखंड के सियासत के भी बड़े ही अजब रंग है। एक जमाने में जिन दिग्गजों ने एक-दूसरे को पटखनी देने के लिए चुनावी अखाड़े में ताल ठोकी, वे आज एक ही पार्टी में एक साथ खड़े हैं। इस सच की तस्दीक करने के लिए 1998 के लोकसभा चुनाव में झांकना होगा। वो गढ़वाल लोकसभा सीट का चुनाव था।
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भाजपा ने एक बार फिर मेजर जनरल बीसी खंडूड़ी को मैदान में उतारा था। 1996 का चुनाव खंडूड़ी, तिवारी कांग्रेस से चुनाव लड़े और सतपाल महाराज से हार गए थे। पिता की विरासत पर सवार होकर विजय बहुगुणा भी चुनाव मैदान में उतरे। वे कांग्रेस के टिकट पर चुनाव में थे। सतपाल महाराज अखिल भारतीय इंदिरा कांग्रेस (सेकुलर) के टिकट पर चुनाव में उतरे।
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दिलचस्प बात यह है कि इस चुनाव में बहुजन समाज पार्टी के टिकट पर डॉ. हरक सिंह रावत भी चुनाव लड़े। इस चुनाव में जनरल खंडूड़ी को अकेले महाराज ही कुछ टक्कर दे सके। खंडूड़ी ने 55.44 प्रतिशत मत लेकर चुनाव जीता। महाराज को 20.83 फीसद वोट मिले, जबकि कांग्रेस प्रत्याशी बहुगुणा को 12.69 फीसद वोट से संतोष करना पड़ा।
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डॉ. हरक सिंह रावत भी महज फीसद वोट ही ले पाए। इस चुनाव में जिन चार प्रतिद्वंद्वियों ने एक-दूसरे को पराजित करने के लिए एड़ी चोटी का जोर लगाया, बदलते वक्त ने उन्हें एक-दूसरे के संग ला खड़ा किया। आज जनरल बीसी खंडूड़ी भाजपा के सांसद हैं। सतपाल महाराज और डॉ. हरक सिंह रावत भाजपा सरकार के कैबिनेट मंत्री हैं और पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा भाजपा की कोर कमेटी के सदस्य हैं। इस तरह एक-दूसरे के खिलाफ चुनाव लड़े ये चारों दिग्गज भाजपा और उसकी सरकार में अहम ओहदों पर हैं।