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महासमर 2019 : 80 के दशक तक कांग्रेस का कमाल, 90 के बाद भाजपा ने मचाया धमाल

Sat, 16 Mar 2019 10:38 AM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal राकेश खंडूड़ी, अमर उजाला, देहरादून
राकेश खंडूड़ी, अमर उजाला, देहरादून Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal Updated Sat, 16 Mar 2019 10:38 AM IST
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Lok sabha elections 2019 history of bjp and congress in uttarakhand
प्रतीकात्मक तस्वीर

अविभाजित उत्तर प्रदेश के समय से उत्तराखंड में हुए लोकसभा चुनाव में 50 के दशक से लेकर 80 के दशक तक कांग्रेस ने कमाल का प्रदर्शन किया तो 90 के दशक के बाद चुनावी सियासत बदल गई। चुनाव में दूसरे व तीसरे स्थान के लिए संघर्ष करने वाली भाजपा ने धमाल मचाना शुरू कर दिया। आज प्रदेश की चुनावी सियासत में भाजपा सबसे बड़ी और ताकतवर पार्टी है। उसकी प्रचंड जीत के बावजूद यदि कांग्रेस उसका सामना कर पा रही है तो उसके पीछे एक ही वजह है कि उत्तराखंड में उसकी जड़े बहुत गहरी हैं। ये संसदीय चुनावों के इतिहास से प्रमाणित होता है।

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बेशक आज कांग्रेस बहुत कमजोर हो, लेकिन संसदीय चुनावों का एक काल खंड ऐसा भी आया जब सियासी पंडित ये मान बैठे थे कि कांग्रेस का सूरज शायद ही कभी डूबेगा। वर्ष 1951 से लेकर वर्ष 2014 के दौरान 16 लोकसभा चुनाव हुए। इन चुनावों में कांग्रेस ने 59.15 फीसदी की दर से सीटें जीतीं। इस अवधि में 71 सीटों के लिए चुनाव हुए, जिनमें से कांग्रेस ने 42 सीटें जीतीं। उसके लिए 50 से 80 के दशक का दौर स्वर्ण काल की तरह माना जा सकता है। दरअसल, यह वह अवधि थी, जिसमें उसने सबसे अधिक 35 सीटें जीतीं। लोस चुनाव के शुरुआती दो दशक में उसके सामने कोई सियासी दल नहीं टिक पाया। इस पर्वतीय भूभाग पर भाजपा को कमल खिलाने में पूरा एक दशक लग गया। 1991 के लोकसभा चुनाव में उसने जीत का जो सिलसिला शुरू किया तो फिर पीछे मुड़कर नहीं देखा। इस दौरान उसने 71 में से 21 सीटें जीतीं और ये सभी सीटें 90 के दशक के बाद हुए लोस चुनावों में उसने हासिल की। 2014 के लोस चुनावों में पांचों सीटें जीतकर भाजपा ने भगवा बुलंद किया।

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तथ्यों की नजर में

कांग्रेस का स्वर्णकाल
- 1951 से लेकर 2014 तक 16 लोकसभा चुनाव हुए
- 71 सीटों में से कांग्रेस ने 42 सीटों पर दर्ज की जीत
- 1989 तक हुए नौ लोस चुनावों में 35 सीटों पर जीत
- 06 बार सभी सीटों में क्लीन स्वीप करने का कमाल

कांग्रेस का संक्रमणकाल
- 1991 के लोस चुनाव से हुआ संक्रमणकाल शुरू
- 09 सीटें जीत सकी 90 के बाद हुए चुनावों में
- 04 चुनाव ऐसे थे, जिनमें एक भी सीट नहीं मिली
- 03 चुनाव 90 के दशक के बाद जीरो सीट वाले

‘कमल’ का कमाल

- 1991 के लोस चुनाव से भाजपा का जलवा शुरू
- 05 सीट जीतकर कांग्रेस का कर दिया था सफाया
- 21 सीटें जीतीं अब तक हुए लोकसभा चुनावों में
- 90 के दशक के बाद खिलता चला गया कमल
- 2014 में पांचों सीटें जीतकर प्रचंड बहुमत हासिल
 

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ये भी जानें

1951 सीटें-05    कांग्रेस-4    निर्दलीय-01
1957 सीटें-05    कांग्रेस-05
1962 सीटें-05    कांग्रेस-05
1967 सीटें-05    कांग्रेस-05
1971 सीटें-05    कांग्रेस-05
1977 सीटें-04    बीएलडी-04
1980 सीटें-04    कांग्रेस आई-04
1984 सीटें-04    कांग्रेस-04
1989 सीटें-04    कांग्रेस-03    जनता दल-01
1991 सीटें-04    कांग्रेस-0    भाजपा-04
1996 सीटें-04    तिवारी कांग्रेस-02    भाजपा-02
1998 सीटें-04    कांग्रेस-0        भाजपा-04
1999 सीटें-04    कांग्रेस-01        भाजपा-03 
2004 सीटें-05    कांग्रेस-01        भाजपा-03    सपा-01
2009 सीटें-05    कांग्रेस-05        भाजपा-0
2014 सीटें-05    कांग्रेस-0            भाजपा-05
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