लोकसभा चुनाव 2019 : भाजपा में अटल और आडवाणी की पीढ़ी का दौर खत्म
गढ़वाल सांसद जनरल बीसी खंडूड़ी और नैनीताल के सांसद भगत सिंह कोश्यारी के लोकसभा चुनाव न लड़ने के साथ ही भाजपा की सियासत में अटल और आडवाणी की पीढ़ी के नेताओं का दौर भी खत्म हो गया है।
ये दोनों दिग्गज पार्टी के कद्दावर राजनेता अटल और आड़वाणी के दौर सबसे प्रमुख और अग्रणीय नेताओं में शुमार रहे हैं। उम्रदराज खंडूड़ी ने स्वास्थ्य कारणों से चुनाव नहीं लड़े। जबकि कोश्यारी ने नए लोगों को अवसर देने के उद्देश्य से चुनाव लड़ने से मना कर दिया।
उम्रदराज नेताओं का प्रभाव कम होता चला गया
जनरल खंडू़ड़ी अटल सरकार में केंद्रीय सड़क एवं परिवहन मंत्री थे। उन्हें तत्कालीन प्रधानमंत्री का सबसे नजदीकी मंत्री माना जाता था। अटल ने उन्हें फ्री हैंड दिया था।
अटल के सक्रिय राजनीति से बाहर होने और आडवाणी के स्थान पर मोदी-शाह की नई जोड़ी का वर्चस्व बढ़ने के बाद उम्रदराज नेताओं का प्रभाव कम होता चला गया। 75 पार नेताओं को टिकट न देने के फार्मूले के बाद तो खंडूड़ी और कोश्यारी की राजनीतिक यात्रा पर विराम मान लिया गया था।
दूसरी पीढ़ी के नेताओं का दौर शुरू हो गया
लेकिन लोकसभा चुनाव से ठीक पहले पार्टी ने अपना ये निर्णय बदल दिया। हलांकि प्रदेश के सबसे अनुभवी और कद्दावर माने जाने वाले दोनों नेताओं ने चुनाव लड़ने से मना कर दिया।
इन दोनों नेताओं के सक्रिय राजनीति से अलग होने के साथ ही दूसरी पीढ़ी के नेताओं का नया दौर शुरू हो गया है। इस पीढ़ी में त्रिवेंद्र, पंत, धामी, कौशिक, सुबोध, धनसिंह रावत के अलावा चुनाव मैदान में उतरे तीरथ सिंह रावत, अजय टम्टा, निशंक शामिल हैं।