फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Dehradun News ›   Lok Sabha Election 2024 Uttarakhand Human-wildlife conflict migration disaster burning issues in Garhwal seat

Election 2024: गढ़वाल सीट पर ये पांच ज्वलंत मुद्दे, जनता के बीच जा रहे प्रत्याशी करेंगे इन सवालों को सामना

Tue, 19 Mar 2024 02:59 PM IST
रेनू सकलानी राकेश खंडूड़ी, अमर उजाला ब्यूरो, देहरादून
राकेश खंडूड़ी, अमर उजाला ब्यूरो, देहरादून Published by: रेनू सकलानी Updated Tue, 19 Mar 2024 02:59 PM IST
सार

Lok Sabha Election 2024 Uttarakhand: प्रदेश में  24 वर्षों में पलायन नहीं थमा। गांव खाली हो रहे हैं और कस्बों में आबादी का दबाव बढ़ रहा है। ग्रीष्मकालीन राजधानी को विकास का इंतजार है।

विज्ञापन
Lok Sabha Election 2024 Uttarakhand Human-wildlife conflict migration disaster burning issues in Garhwal seat
उत्तराखंड लोकसभा चुनाव 2024 - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

गढ़वाल संसदीय सीट पर मानव-वन्यजीव संघर्ष, पलायन, आपदा आज भी उतने ही ज्वलंत मुद्दे हैं, जितने 24 वर्षों पहले अविभाजित उत्तरप्रदेश के समय थे। संसदीय चुनाव के एलान के साथ ही प्रचार में उतरे भाजपा और कांग्रेस के प्रत्याशियों को ये मुद्दे निश्चित तौर पर मथेंगे। चार पर्वतीय जिले पौड़ी, चमोली, रुद्रप्रयाग और नैनीताल के रामनगर को शामिल करते हुए बनी इस संसदीय सीट के लोग दशकों से वन्यजीव संघर्ष की समस्या से जूझ रहे हैं।

विज्ञापन


कोटद्वार के भाबर क्षेत्र और तराई तक हाथियों, बंदरों, सुअरों ने खेती को न सिर्फ उजाड़ा है, बल्कि अब तक गांवों से लेकर कस्बे दिन ढलते ही गुलदारों-बाघों की दहाड़ और हमलों से दहशत में हैं। अब जबकि राजनीतिक दलों के प्रत्याशी और कार्यकर्ता लोकलुभावन चुनावी वादों को लेकर जनता के बीच जा रहे हैं, ऐसे में इन मुद्दों से पैदा हो रहे प्रश्नों का भी उन्हें सामना करना होगा। अमर उजाला गढ़वाल लोस को प्रभावित करने वाले ऐसे पांच प्रमुख मुद्दों की पड़ताल की है। पेश ये रिपोर्ट

विज्ञापन

पलायन से गांव खाली, शहरों व कस्बों पर दबाव

पलायन उत्तराखंड राज्य की सबसे बड़ी समस्या है। इस समस्या के निवारण के लिए राज्य सरकार ने पलायन आयोग तक बनाया है। 2018 से अब तक आयोग ने राज्य के सभी जिलों में पलायन की तस्वीर दिखाई है। उसके अध्ययन से पता चलता है कि गढ़वाल लोकसभा सीट में पौड़ी ऐसा जिला है, जहां 2001 से 2011 के बीच 10 वर्षों में आबादी 1.4 फीसदी घट गई। अल्मोड़ा जिले को छोड़ दें तो राज्य के बाकी सभी जिलों में आबादी बढ़ी है। रिपोर्ट बताती है कि पिछले पांच साल में ये रुझान यह दिखा रहा कि राज्य बनने से पहले लोग दूसरे राज्यों में पलायन करते थे, लेकिन राज्य बनने के बाद पौड़ी, रुद्रप्रयाग, चमोली और क्षेत्र के अन्य पर्वतीय हिस्से में गांव के गांव खाली हो रहे हैं और उनके कस्बों और शहरों में आबादी का दबाव बढ़ रहा है। इससे पर्वतीय कस्बों पर उनकी धारण क्षमता से अधिक दबाव बढ़ रहा है। रिपोर्ट बताती है कि 10 वर्ष में पौड़ी जिले में ही 517 गांव भुतहा हो गए। रुद्रप्रयाग में पांच साल में तीन फीसदी लोगों ने पलायन किया। चमोली में 16 फीसदी लोग घर-बार छोड़कर दूसरे स्थानों पर चले गए। क्षेत्र में रिवर्स पलायन की कोशिशें अभी नाकाफी हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन
Trending Videos

खेत हुए उजाड़, गांव हुए खाली, कस्बों में पहुंच रहे बाघ-गुलदार

गढ़वाल लोकसभा सीट की दूसरी सबसे गंभीर समस्या मानव वन्यजीव संघर्ष की है। वन विभाग के आंकड़ों को ही लें तो राज्य बनने के बाद प्रदेश में 1,115 लोगों की वन्यजीव हमलों में जान जा चुकी है। संसदीय सीट के कोटद्वार और सतपुली वाले इलाके से लगातार हाथियों के आबादी वाले क्षेत्र में घुसने और फसलों को नुकसान पहुंचाने की घटनाएं लगातार हो रही हैं। श्रीनगर गढ़वाल में गुलदार और बाघ के हमलों की वारदात पिछले दिनों ही सामने आई थी। रिपोर्ट के मुताबिक, अकेले पौड़ी जिले में वन्यजीव हमले में तीन लोगों की मौत हो चुकी है। चमोली जिले में भालू के हमले की घटनाएं सामने आ चुकी हैं। समस्या सिर्फ वन्यजीवों के हमलों की नहीं है। बंदरों, सुअरों, हाथियों के कारण फसलें उजाड़ होने लगी हैं। बंदर खेती को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचा रहे हैं। नतीजा यह है कि लोगों ने खेती छोड़ दी है और वे काम धंधे की तलाश में देहरादून या अन्य किसी शहर में पलायन कर चुके हैं। पलायन की एक मुख्य वजह जंगली जानवर भी हैं।

गैरसैंण : नाम की ग्रीष्मकालीन राजधानी, विकास का इंतजार

राज्य की ग्रीष्मकालीन राजधानी गैरसैंण भी गढ़वाल संसदीय सीट में शामिल है। स्थानीय जनता के लिए ग्रीष्मकालीन राजधानी का विकास भी एक अहम मुद्दा है। गैरसैंण को गर्मियों की राजधानी घोषित करने का श्रेय भाजपा को जाता है, लेकिन क्षेत्र के लोगों को गैरसैंण के राजधानी जैसे विकास का अब भी इंतजार है। जब त्रिवेंद्र सिंह रावत मुख्यमंत्री थे, तब उन्होंने गैरसैंण में अगले 10 साल में 25 हजार करोड़ रुपये का निवेश विकास में कराने का लक्ष्य रखा था, लेकिन यह घोषणा जमीन पर नहीं उतर पाई। सत्ता में बैठे हुक्मरान और नीति नियंता अभी गैरसैंण के विकास मॉडल पर चिंतन में उलझे हैं।

आपदा : रैणी हादसा, फिर जोशीमठ.. आगे भी खतरा ही खतरा

संसदीय क्षेत्र में आपदा के मुद्दे भी चुनाव में उम्मीदवारों से हल मांगेगा। पिछले पांच वर्षों के दौरान गढ़वाल क्षेत्र ने कई बड़ी और छोटी प्राकृतिक आपदाओं का सामना किया। इनमें सात फरवरी 2022 को रैणी आपदा सबसे भीषण रही, जिसमें 206 लोग मारे गए। जोशीमठ शहर में भू-धंसाव तो देश और दुनिया की सबसे बड़ी सुर्खी बना है। बेशक इस आपदा में एक भी व्यक्ति की मृत्यु नहीं हुई, लेकिन जोशीमठ शहर आज भी एक बड़े खतरे की जद में हैं। सरकार के सामने जोशीमठ के लोगों को बचाने की बड़ी चुनौती है। जोशीमठ आपदा के बाद सरकार पर्वतीय शहरों की धारण क्षमता के अध्ययन करा रही है, लेकिन ये समस्या दूसरे मुद्दों से भी जुड़ी है। गांवों में स्वास्थ्य, शिक्षा व रोजगार का अभाव और वन्यजीवों की बढ़ते हमलों के कारण गांव-गांव खाली हो रहे हैं और शहरों और कस्बों में उनकी क्षमता से ज्यादा आबादी का दबाव बढ़ रहा है, जो कई शहरों के लिए जोशीमठ जैसे खतरे पैदा कर सकता है। चुनाव में जनता के यह प्रश्न प्रत्याशियों से जवाब मांगेंगे।

ये भी पढ़ें...Elections 2024: साक्षात्कार...विवाह में अड़चन नहीं, होली मिलन-पार्टियों का राजनीतिक इस्तेमाल खर्च में जुड़ेगा

रामनगर-लालढांग सड़क : कम नहीं हो पाई गढ़वाल-कुमाऊं की दूरी

गढ़वाल सीट पर एक बड़ा और ज्वलंत मुद्दा रामनगर-लालढांग सड़क का है। इस सड़क के बनने से न सिर्फ कार्बेट पार्क के पर्यटकों को, बल्कि संसदीय क्षेत्र की बहुत बड़ी आबादी को राहत मिल सकती है। रामनगर-कालागढ़-पाखरो-चिल्लरखाल- लालढांग सड़क के निर्माण के लिए प्रदेश सरकार की ओर से भी कई प्रयास हुए, लेकिन कार्बेट टाइगर रिजर्व (सीटीआर) में होने के कारण ये मार्ग नहीं बन पाया, जबकि अविभाजित उत्तरप्रदेश के समय रोडवेज की बसें इस मार्ग से कोटद्वार तक जाती थीं। इस मार्ग के बनने गढ़वाल और कुमाऊं की दूरी काफी कम हो जाएगी। कोटद्वार और रामनगर जाने के लिए यह एक कम दूरी का आसान वैकल्पिक मार्ग साबित हो सकता है। चुनाव में इस मार्ग की मांग कर रही जनता प्रत्याशियों के सामने इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाएगी।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed