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Election 2024: औसत से कम मतदान वाली अल्मोड़ा और गढ़वाल सीटें, चुनाव आयोग ने दिए खास निर्देश

Fri, 05 Apr 2024 07:26 PM IST
अलका त्यागी अमर उजाला ब्यूरो, देहरादून
अमर उजाला ब्यूरो, देहरादून Published by: अलका त्यागी Updated Fri, 05 Apr 2024 07:26 PM IST
सार

Lok Sabha Election 2024 Uttarakhand:  2019 लोकसभा चुनाव में उत्तराखंड का मतदान प्रतिशत 61.88 था। दो लोकसभा अल्मोड़ा और गढ़वाल ऐसी थी, जिनमें मतदान प्रतिशत इससे भी कम पाया गया था।

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Lok Sabha Election 2024 EC order to Improve Uttarakhand Almora and Garhwal seat  below average voting
उत्तराखंड लोकसभा चुनाव 2024 - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

उत्तराखंड की दो लोकसभा सीटें ऐसी हैं, जो देश की 50 कम मतदान प्रतिशत वाली सीटों में शामिल हैं। गढ़वाल और अल्मोड़ा सीटों पर मतदान प्रतिशत बढ़ाने के लिए चुनाव आयोग ने खास तवज्जो दी है। इसके तहत सभी निर्वाचन अधिकारियों को निकायों के साथ मिलकर तेजी से जागरुकता बढ़ाने के निर्देश दिए हैं।

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मुख्य चुनाव आयुक्त ने शुक्रवार को उत्तराखंड समेत देश के 11 राज्यों के निकायों के अफसरों और जिला निर्वाचन अधिकारियों के साथ लंबी बैठक की। बैठक में ये तथ्य सामने आया कि इन सभी राज्यों का मतदान प्रतिशत राष्ट्रीय औसत 67.40 से कम है। 2019 लोकसभा चुनाव में उत्तराखंड का मतदान प्रतिशत 61.88 था। दो लोकसभा अल्मोड़ा और गढ़वाल ऐसी थी, जिनमें मतदान प्रतिशत इससे भी कम पाया गया था।
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इनमें अल्मोड़ा का 52.31 प्रतिशत और गढ़वाल का 55.17 प्रतिशत था। लिहाजा, चुनाव आयोग ने इन लोकसभाओं के नगर निकायों को विशेषकर मतदान प्रतिशत बढ़ाने के लिए कवायद करने के निर्देश दिए हैं। क्योंकि ज्यादातर शहरी इलाके ऐसे हैं, जहां मतदान प्रतिशत काफी कम रहा है।

निकायों में ये काम तत्काल करने होंगे

- आवश्यक चुनाव संदेशों से सुसज्जित सार्वजनिक परिवहन और स्वच्छता वाहन चलाना।
- व्यापक प्रसार के लिए उपयोगिता बिलों में मतदाता जागरूकता संदेशों को शामिल करना।
- रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन (आरडब्ल्यूए) और मतदाता जागरूकता मंचों के साथ सहयोग करना।
- पार्क, बाजार और मॉल जैसे लोकप्रिय सार्वजनिक स्थानों पर सूचनात्मक सत्रों का आयोजन।
- मतदाताओं में रुचि जगाने के लिए मैराथन, वॉकथॉन और साइक्लोथॉन जैसे आकर्षक कार्यक्रम आयोजित करना।
- मतदाता शिक्षा सामग्री का प्रसार करने के लिए होर्डिंग्स, डिजिटल स्पेस, कियोस्क और कॉमन सर्विस सेंटर (सीएससी) सहित विभिन्न प्लेटफार्मों का उपयोग करना।
- व्यापक मतदाता पहुंच और जुड़ाव के लिए सोशल मीडिया प्लेटफार्मों की शक्ति का लाभ उठाना।

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