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Locust Attack: पंतनगर विवि के वैज्ञानिकों ने किसानों को किया अलर्ट, टिड्डी दल से बचाव के बताए उपाय

Thu, 02 Jul 2020 12:30 AM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पंतनगर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पंतनगर Published by: अलका त्यागी Updated Thu, 02 Jul 2020 12:30 AM IST
सार

  • टिड्डी दल के दिखते ही धुआं करने की सलाह्र

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Locust Attack: Pantnagar university Scientists Alert Farmers in Uttarakhand
- फोटो : फाइल फोटो

विस्तार

देश के पश्चिमी राज्यों में टिड्डी दलों के प्रकोप और इन राज्यों की सीमा से सटे उत्तर प्रदेश में भी टिड्डियों के लाखों की संख्या में प्रवेश को देखते हुए पंतनगर कृषि एवं प्रौद्योगिकी विवि के वैज्ञानिकों ने अलर्ट जारी किया है। विवि ने उत्तराखंड के मैदानी व पहाड़ी जनपदों में गन्ना, मक्का व सब्जियों की फसलों पर इनके प्रकोप की संभावना व्यक्त की है।

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वैज्ञानिकों ने सलाह दी है कि टिड्डी दल के दिखते ही धुआं किया जाए अथवा अत्यधिक शोर किया जाए ताकि ये खेतों में उतर ही न सके। पौड़ी जिले के कुछ किसानों से टिड्डी दल के प्रकोप की सूचना मिली है, जिनकी संख्या बहुत कम है।
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माना जा रहा है कि आंधी के कारण ये पौड़ी जिले के पहाड़ी क्षेत्र में प्रवेश कर गए हैं। वैज्ञानिकों ने सभी जिलों के किसानों व कृषि विभाग के कर्मचारियों को इनके आक्रमण से सतर्क रहने को कहा है।  

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फोन नंबर किया जारी

पंतनगर विवि की ओर से टिड्डी दल की उत्तराखंड में निगरानी के लिए गठित समिति के अध्यक्ष डॉ. एसएन तिवारी ने बताया कि शनिवार को टिड्डी दल दिल्ली-हरियाणा की सीमा पर सक्रिय था लेकिन दिल्ली में पूरी तरह से प्रवेश नहीं कर पाया है।

कहा कि टिड्डियां एक समय में अत्यधिक मात्रा में वनस्पतियों का भक्षण करती हैं र्और मार्ग में आने वाली लगभग समस्त वनस्पतियों को चट कर जाती हैं। टिड्डी दलों के दिखाई देने पर किसानों को अत्यधिक शोर करने (ड्रम व टिन बजाकर) और खेत में धुआं करना चाहिए। 

टिड्डी दल दिखे तो यहां करें फोन
डा. तिवारी ने बताया कि किसानों को यदि उनके क्षेत्र में कहीं पर टिड्डी दल का प्रकोप दिखता है तो उन्हें कृषि निदेशालय, उत्तराखंड के फोन नंबर 18001800011 पर अथवा उस जिले के मुख्य कृषि अधिकारी को तत्काल सूचित करना चाहिए।

बचाव के लिए करें छिड़काव

टिड्डी दलों से फसलों को बचाने के लिए क्लोरपाइरीफॉस 20 ईसी का 2.4 मिली. प्रति ली. या क्लोरपाइरीफॉस 50 ईसी का 1.0 मिली. प्रति ली. या डेल्टामेथ्रिन 2.8 ईसी का 1.0 मिली. प्रति ली. या फिप्रोनिल 5 एससी का 0.25 मिली. प्रति ली. या फिप्रोनिल 2.92 एससी का 0.45  मिली. प्रति ली. या लैम्ब्डा साइहैलोथ्रिन 5 ईसी का 1.0 मिली. प्रति ली. या लैम्ब्डा साइहैलोथ्रिन 10 डब्ल्यूपी का 0.5 ग्राम प्रति ली. या मैलाथियान 50 ईसी का 3.7 मिली. प्रति ली. या मैलाथियान 25 डब्ल्यूपी का 7.4 ग्राम प्रति ली. की दर से छिड़काव करना चाहिए।

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