देहरादून: जमीन विवाद को लेकर नगर निगम में कर्मचारियों ने जड़ा ताला, जमकर की नारेबाजी
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नगर निगम की जमीन का मामला गरमा गया है। सोमवार को कर्मचारियों ने निगम के कार्यालय में तालाबंदी कर दी। इसके बाद पार्षदों ने परिसर में जमकर नारेबाजी की।
पार्षद भूपेंदर कठैत, सतीश कश्यप समेत अन्य पार्षदों ने रविवार को विवार के चलते मेयर विनोद चमोली के साथ धक्कामुक्की को लेकर विरोध जताया।
बता दें कि, कोतवाली से सटी करोड़ों रुपये की भूमि को लेकर विवाद चल रहा है। नगर निगम प्रशासन का दावा है कि भूमि निगम की संपत्ति है। वहीं, दूसरे पक्ष के ताहिर अतहर का दावा है उक्त भूमि पर उनका मालिकाना हक है।
भूमि का मामला न्यायालय में चल रहा था। ताहिर अतहर और पैरोकारी करने वाले अधिवक्ता पिछले दिनों सिटी मजिस्ट्रेट से मिले। उनका कहना है कि भूमि पर अपर सिविल जज सीनियर डिवीजन से उनके पक्ष में फैसला हुआ है।
सिटी मजिस्ट्रेट के आदेश पर पुलिस की मौजूदगी में ताहिर अतहर पक्ष ने उक्त भूमि की आठ दिसंबर को चारदीवारी कर दी। इसकी भनक लगने पर नगर निगम प्रशासन ने रात में गेट और कुछ निर्माण तुड़वा दिया।
ये था मामला
रविवार को भूमि को लेकर फिर विवाद हो गया। नगर निगम की टीम जेसीबी लेकर भूमि की चहारदीवारी तोड़ने पहुंची, तो ताहिर अतहर पक्ष के लोग विरोध में खड़े हो गए। हंगामा होने से दर्जनों लोगों की भीड़ जुट गई।
पीएसी और पुलिस फोर्स भी पहुंच गई। कुछ लोगों ने मेयर विनोद चमोली के साथ धक्का मुक्की भी की। पुलिस ने एकत्र भीड़ को भगा दिया। विनोद चमोली वहीं कुर्सी डालकर बैठ गए और सिटी मजिस्ट्रेट को बुलाकर उक्त भूमि पर नगर निगम को कब्जा दिलाने की मांग करने लगे।
तनातनी की खबर सुनकर नगर निगम के आयुक्त विजय कुमार जोगदंडे, नगर निगम के अधिकारी और सीओ भी मौके पर पहुंच गए। देर शाम तक दोनों पक्षों के बीच हंगामा चलता रहा। ताहिर अतहर पक्ष के वकील ने न्यायालय के आदेश की प्रति दिखाते हुए साढ़े तीन बीघा भूमि पर अपना हक जताया।
जबकि, मेयर विनोद चमोली ने कहा कि 1923 को नगर निगम की चार बीघा पांच बिसवा भूमि 90 साल की लीज पर जानकी दास एंड कंपनी को दी गई थी। लीज 2013 में खत्म हो चुकी है। मेयर का कहना है कि ताहिर अतहर का दावा झूठा है।