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Coronavirus Lockdown 4.0 : बच्चों की मस्ती की पाठशाला पर भी कोरोना का असर

Thu, 21 May 2020 09:51 AM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal Updated Thu, 21 May 2020 09:51 AM IST
सार

  • गर्मी की छुट्टियों में शहर में 20 से ज्यादा जगह लगते थे समर कैंप, इस साल आयोजन की उम्मीद नहीं

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Lockdown 4.0 in Uttarakhand Latest News Update : summer camp will not organise this time
समरकैंप में डांस की मस्ती में झूमते बच्चे । - फोटो : File Photo

विस्तार

बच्चों की मस्ती की पाठशाला पर भी कोरोना का असर पड़ा है। कोरोना के खतरे के चलते इस साल गर्मियों की छुट्टियों में लगने वाले समर कैंप के आयोजन की उम्मीद बेहद कम है। ज्यादातर आयोजक इस वर्ष आयोजन के पक्ष में भी नहीं हैं। उनका मानना है कि अभिभावक भी कोरोना के डर के चलते बच्चों को समर कैंप भेजने से बचेंगे। 

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गर्मियों की छुट्टियों में राजधानी में अलग-अलग स्थानों पर 20 से ज्यादा बड़े समर कैंप आयोजित होते हैं। इनमें इनडोर और आउटडोर 10 से 15 तक एक्टिविटी कराई जाती है। इसके अलावा दर्जनों छोटे-छोटे कैंप भी लगते हैं, जिनमें दो-तीन एक्टिविटी होती है।
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आमतौर पर मई आखिरी हफ्ते और जून में स्कूलों की छुट्टी रहती है। इस दौरान बच्चों को मनोरंजन के साथ कुछ नया सिखाने के लिए अभिभावक भी उन्हें समर कैंप में भेजते हैं। यति स्केट्स के अरविंद गुप्ता एशियन स्कूल और जीआरडी एकेडमी में समर कैंप लगाते हैं, जिनमें 800 से एक हजार तक बच्चे शामिल होते हैं।

उनके कैंप में रोलर स्केटिंग, जुंबा, बैडमिंटन, बॉस्केटबाल, फुटबाल, कराटे, लॉन टेनिस, एथलेटिक्स, क्रिकेट, योग, बेंबू, आर्ट एंड क्रॉफ्ट, डांस, पर्सनेलिटी डेवलपमेंट प्रोग्राम, ड्राइंग-पेंटिंग की एक्टिविटी होती है। इसके अलावा हर हफ्ते एक दिन कंपटीशन भी होता है। उन्होंने बताया कि कुछ विशेष एक्टिविटी के लिए अभिभावक पूछ रहे हैं, लेकिन इनकी संख्या बेहद कम है।


अभिभावक भी नहीं होंगे तैयार

ज्यादातर आयोजकों को लगता है कि कोरोना का खतरा अगर कम भी हो गया, तब भी अभिभावक अपने बच्चों को बाहर भेजने में हिचकेंगे। आयोजक प्रवीन का मानना है कि कोरोना का खतरा कई माह बाद तक भी बना रहेगा।

समर कैंप में कई एक्टिविटी ऐसी है, जिसमें बच्चे घुलते मिलते हैं। लॉकडाउन के कारण बच्चों की पढ़ाई का भी काफी नुकसान हुआ है। ऐसे में अभिभावक एक माह के कैंप के बजाय बच्चों को पढ़ाने पर ज्यादा ध्यान लगाएंगे।

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