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लॉकडाउन: हरिद्वार में अस्थि विसर्जन पर लगी रोक हटी, गाड़ी चालक के अलावा परिवार के दो लोगों को आने की अनुमति

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हरिद्वार Published by: अलका त्यागी Updated Thu, 07 May 2020 09:42 PM IST

सार

  • अस्थि विसर्जन के लिए कार चालक के अलावा दो व्यक्ति आ सकते हैं हरिद्वार
  • प्रदेश सरकार ने कैबिनेट की बैठक में प्रस्ताव पारित कर यह रोक हटा दी
Lockdown 3.0: Uttarakhand cabinet removes ban on bone Immersion in haridwar ganga
- फोटो : सांकेतिक तस्वीर
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विस्तार

लॉकडाउन के बाद हरिद्वार में पिछले करीब 40 दिनों से अस्थि विसर्जन पर लगी रोक हटाने के लिए हरिद्वार के तीर्थ पुरोहितों का दबाव आखिरकार काम आ ही गया। गुरुवार को प्रदेश सरकार ने कैबिनेट की बैठक में प्रस्ताव पारित कर यह रोक हटा दी है। अब गाड़ी चालक के अलावा दो व्यक्ति हरिद्वार आकर अपने दिवंगत परिजन की अस्थियों का विसर्जन कर सकते हैं।

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लॉकडाउन लागू होने के बाद से हरिद्वार में अस्थि विसर्जन पर पूरी तरह रोक लगा दी गई थी। अन्य राज्यों से लोग अस्थियां लेकर बकायदा प्रशासन की अनुमति लेकर आ रहे थे लेकिन हरिद्वार के तीनों बॉर्डर से ही उन्हें वापस लौटना पड़ रहा था। हर रोज विभिन्न राज्यों के लोग अपने तीर्थ पुरोहितों से हालात के बारे में जानकारी ले रहे थे। बार-बार प्रयास करने के बाद भी पुलिस अधिकारी अस्थियां लेकर आने वालों को जिले में प्रवेश नहीं दे रही थी।

तीन दिन पहले ही श्री गंगा सभा के अध्यक्ष प्रदीप झा और महामंत्री तन्मय वशिष्ठ ने शहरी विकास मंत्री मदन कौशिक से मुलाकात कर उन्हें एक ज्ञापन दिया था जिसमें मांग की गई थी कि अस्थि विसर्जन पर रोक हटा दी जाए। भले ही एक या दो परिजन को ही आने की अनुमति दी जाए।

इस बारे में मुख्यमंत्री और केंद्र सरकार को भी ज्ञापन भेजे गए थे शहरी विकास मंत्री मदन कौशिक ने इस मामले में सद्भावना पूर्वक विचार कर निर्णय लेने का भरोसा दिलाया था। आखिरकार गंगा सभा के तीर्थ पुरोहितों का दबाव काम आया और कैबिनेट की बैठक में अस्थि विसर्जन के लिए आने वाले लोगों पर लगी रोक हटा दी गई।

शहरी विकास मंत्री मदन कौशिक ने इस आशय की पुष्टि की  है कि प्रदेश सरकार ने जो निर्णय लिया है उसके अनुसार गाड़ी लेकर आने वाले चालक के अलावा दिवंगत व्यक्ति के दो परिजन भी अस्थि विसर्जन के लिए आ सकते हैं।  40 दिनों से हरिद्वार के तीर्थ पुरोहित कोई भी अस्थि विसर्जन नहीं करा पा रहे थे।  
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