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Dehradun News: स्थानीय बोली नहीं बन रही उपचार में बाधा, मैत्री डेस्क बनी जरिया

Wed, 06 Sep 2023 12:31 AM IST
Dehradun Bureau देहरादून ब्यूरो
Updated Wed, 06 Sep 2023 12:31 AM IST
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Local dialect is not becoming a hindrance in the
अनुवादक बन कर्मचारी चिकित्सकों बता रहे मरीजों की समस्या
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पीएचसी कालसी ने मरीजों की सुविधा के लिए की अच्छी पहल



प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र कालसी में दूरदराज के क्षेत्रों से आने मरीजों के उपचार में स्थानीय बोली बाधा नहीं बन रही है। अस्पताल प्रशासन ने जौनसारी बोली में मरीजों से बातचीत करने और उनकी मदद के लिए मैत्री हेल्प डेस्क बनाया है। हेल्प डेस्क के कर्मचारी अनुवादक की भूमिका निभाकर चिकित्सक को मरीज की परेशानी बताते हैं, यही नहीं जांच से लेकर दवा लेने तक भी मरीजों की पूरी सहायता करते हैं। खासकर बुजुर्ग मरीजों ने अस्पताल की इस अच्छी पहल की जमकर सराहना की है।



कालसी विकासखंड के 111 ग्राम पंचायतों के लोग प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर निर्भर हैं। यहां रोजाना 150 से 200 मरीज उपचार के लिए पहुंचते हैं। कई मरीज जौनसारी बोली में ही बात करते हैं। स्थानीय बोली में मरीज की ओर से बताए गए बीमारी के लक्षण चिकित्सक की समझ में नहीं आते हैं। वहीं चिकित्सक की ओर से मरीजों को दी गई सलाह भी उनकी समझ से परे होती है।
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पीएचसी के प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉ. वसीम कुरैशी ने बताया कि मरीजों को हो रही असुविधा को देखते हुए अस्पताल प्रशासन ने शनिवार से मैत्री हेल्प डेस्क शुरू किया है। उन्होंने बताया कि हेल्प डेस्क का काउंटर अस्पताल के मुख्य द्वार के पास बनाया गया है। बताया कि जैसे ही पारंपरिक वेषभूषा पहने और बुजुर्ग मरीज अस्पताल में प्रवेश करते हैं हेल्प डेस्क पर तैनात कर्मचारी खुद उनके पास जाते हैं।
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कर्मचारी मरीजोें का पर्चा बनवाने के बाद उनको चिकित्सक के पास ले जाते हैं। मरीज अपनी स्थानीय बोली में अपनी परेशानी बताता है और कर्मचारी उसका अनुवाद करता है। इसके बाद चिकित्सक की दी गई सलाह, जांच और दवाओं के सेवन से संबंधित जानकारी को कर्मचारी मरीजों को स्थानीय बोली में समझाता है। कर्मचारी मरीजों की जांच और दवा दिलवाने में भी मदद करते हैं।
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