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नेपाल में बीस साल बाद होगा ये काम, लोगों में है बेहद खुशी

Fri, 05 May 2017 09:18 AM IST
विनोद काला/ अमर उजाला, बनबसा (चंपावत)
विनोद काला/ अमर उजाला, बनबसा (चंपावत) Updated Fri, 05 May 2017 09:18 AM IST
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Local body elections in nepal after 20 years
फाइल फोटो - फोटो : demo pic

पड़ोसी राष्ट्र नेपाल में करीब बीस वर्ष बाद होने जा रहे इस काम को लेकर लोगों में बेहद उत्साह दिखाई दे रहा है।

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नेपाल में 20 साल बाद स्थानीय निकाय चुनाव हो रहे हैं। मंगलवार को पहले चरण के नामांकन में तीन राज्यों के 34 जिलों में उम्मीदवारों ने शांतिपूर्ण माहौल में नामांकन कराए। नेपाल में नामांकन शुरू होते ही भारतीय सीमा पर भी सुरक्षा एजेंसियों को सतर्क कर दिया गया है।

मंगलवार को नेपाल में स्थानीय निकाय के पहले चरण के चुनाव के लिए नामांकन कराए गए। राज्य संख्या 3, 4 और 6 में 34 जिलों के स्थानीय निकाय चुनाव में प्रतिभाग करने वाले उम्मीदवारों ने नामांकन कराए। इसमें चार महापालिकाओं, एक उपनगर पालिका, 92 नगरपालिकाओं समेत दो सौ से अधिक ग्राम पंचायतों के लिए शांतिपूर्ण माहौल में नामांकन हुए।

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14 मई को होंगे चुनाव

Local body elections in nepal after 20 years

चुनाव 14 मई को होने हैं। मुख्य निर्वाचन आयुक्त अयोध्या प्रसाद यादव ने बताया कि सुबह 10 बजे से शाम पांच बजे तक नामांकन प्रक्रिया शांतिपूर्ण माहौल में संपन्न हुई। अलबत्ता रूकुम, दैलेक, जुमला में विप्लव गुट के 33 कार्यकर्ताओं को चुनाव विरोधी गतिविधि में लिप्त होने पर पुलिस द्वारा हिरासत में लिए जाने की सूचना है।

मित्रराष्ट्र नेपाल में होने वाले चुनावों पर भारत की भी निगाह टिकी है। सीमा पर सुरक्षा तंत्रों को अलर्ट किया गया है। एसएसबी 57वीं वाहिनी के कमांडेंट एलएम उपाध्याय ने बताया कि भारत-नेपाल सीमा पर एसएसबी पहले से ही सतर्क है। सुरक्षा एजेंसियों को सीमा पर आवागमन करने वालों पर पैनी नजर रखने को कहा गया है।

कहीं महाभियोग न बन जाए चुनावी फांस
नेपाल में अब भी निकाय चुनाव पर खतरा मंडराता दिखाई दे रहा है। नेपाली सरकार की ओर से मुख्य न्यायाधीश के खिलाफ लाया महाभियोग का विरोध सरकार के लिए खतरा बन गया है। इस मुद्दे पर राष्ट्रीय प्रजातंत्र पार्टी ने नेपाली सरकार से समर्थन वापस ले लिया है तो कई अन्य दल सरकार के इस फैसले का विरोध कर महाभियोग वापस लेने की मांग कर रहे हैं। सत्तारूढ़ दल के कुछ नेताओं के स्वर भी महाभियोग के खिलाफ मुखर होने लगे हैं।

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