अमर उजाला मास्टरक्लास में बोले अली अब्बास जफर, फिल्मों में 'ये नहीं हो पाएगा' जैसी स्थिति नहीं होती
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बॉलीवुड डायरेक्टर अली अब्बास जफर मसूरी रोड स्थित डीआईटी विश्वविद्यालय में मास्टर क्लास लगाने पहुंचे हैं। अमर उजाला ‘मास्टर क्लास विद अली अब्बास जफर’ में वे प्रशंसकों से रूबरू हुए। कार्यक्रम में कॉलेज स्टूडेंट्स के साथ ही अन्य लोग भी पहुंचे हैं। अली कार्यक्रम के दौरान फिल्म इंडस्ट्री के अपने अनुभव साझा करने के साथ ही प्रशंसकों से बातचीत की।
इस दौरान उन्होंने कहा कि एक दिन में कोई भी सुपरस्टार नहीं बनता। उसके लिए आपको वर्षों मेहनत करनी होती है। अपनी मेहनत और हुनर पर विश्वास रखते हुए लगातार संघर्ष करने का माद्दा रखना पड़ता है। तब जाकर कहीं आपको एक मौका मिलता है। मौके को भुनाते हुए अपना बेस्ट देने वाले ही आगे बढ़ते हैं।
उन्होंने कहा कि मुझे लगता है जब आप फिल्म बनाने हैं तो यहां 'ये कैसे होगा, नहीं हो पाएगा' जैसी स्थिति नहीं होती है। पहले भी कुछ नहीं था और आगे भी नहीं होगा। इसी के बीच से हमे आगे बढ़कर अपने लक्ष्य को पूरा करना होता है।
डीआईटी विश्वविद्यालय सभागार में आईएमएस यूनिसन यूनिवर्सिटी के वीसी प्रो. गौतम सिन्हा, प्रोवीसी डा. रवितेष श्रीवास्तव ने अली अब्बास जफर का स्वागत किया। प्रशंसकों ने अली से उनकी जिंदगी और फिल्मी करियर से जुड़े कई सवाल पूछे। साथ ही फिल्म उद्योग और सिनेमा के मौजूदा स्वरूप को लेकर भी चर्चा की। अली ने बताया कि उन्होंने दून के मार्शल स्कूल से अपनी पढ़ाई की है। दिल्ली विश्वविद्यालय के किरोडीमल कॉलेज से साइंस स्ट्रीम से ग्रेजुएशन किया। यहां थिएटर करने के बाद उन्होंने मुंबई फिल्म इंडस्ट्री का रुख किया।
नए कलाकारों और फिल्म मेकर्स को उन्होंने काम सीखने की सलाह दी। अली ने कहा कि अदाकारी, स्क्रिप्ट राइटिंग, स्टोरी राइटिंग, टेक्निशियन बनने के लिए हजारों लोग रोजाना मुंबई पहुंचते हैं। इनमें से बड़ी संख्या ऐसे लोगों की होती है, जिन्हें उस काम की एबीसीडी तक मालूम नहीं होती। सोचिये ऐसे लोगों को कोई भी मौका क्यों देगा। उन्होंने कहा कि पहले अगर आप अपने हुनर को संवारने पर मेहनत करेंगे तो करियर खुद ब खुद संवर जाएगा।
कार्यक्रम का मुख्य प्रायोजक पर्यटन विभाग और सहयोगी प्रायोजक हाईप शूज रहे। मास्टर क्लास अमर उजाला की एक सीरीज है, जिसके तहत आम पाठकों और छात्र-छात्राओं को फिल्म जगत की हस्तियों से मुलाकात और बातचीत का मौका दिया जाता है।
फैन ने शाहरुख खान के साथ फिल्म में मांगा रोल
इस दौरान कार्यक्रम में पहुंचे एक फैन ने उनसे शाहरुख खान के साथ फिल्म में रोल मांगा। उन्होंने कहा कि वे उन्हें रोल जरूर दें जिससे वे देहरादून का नाम रोशन कर सकें।अली ने कहा कि कई बार आपको अच्छे और सही दिशा दिखाने वाले लोग मिलेंगे। लेकिन, कुछ ऐसे लोग भी हो सकते हैं, जो आपको गलत ले जा सकते हैं। जब आप फिल्म इंडस्ट्री में संघर्ष कर रहे होंगे तो कई लोग आपको बरगलाएंगे, घुमाएंगे, गलत करने का प्रयास करेंगे।
ऐसे में आपको भी अच्छे-बुरे की पहचान करनी आनी चाहिए। शॉर्टकट से सफलता पाने की तमन्ना में कई बार हम वह सब करते हैं, जो नहीं करना चाहिए। जब काम नहीं आता तो फिर इस तरह के शॉर्टकट ढूंढे जाते हैं, लेकिन यह गलत है।
लड़ाई लड़ने जैसा है फिल्म बनाना
अली ने कहा कि फिल्म बनाना एक लड़ाई लड़ने जैसा है। धूप-गर्मी-बारिश-तूफान चाहे कैसी भी परिस्थिति हो, हमें अपना काम करना होता है। फिल्म निर्माण से जुड़ी यूनिट युद्ध लड़ने की तरह काम करती है। उन्होंने ‘टाइगर जिंदा है’ फिल्म के एक सीन का उदाहरण दिया, जिसे माइनस 26 डिग्री तापमान में फिल्माया गया था।
देशभक्ति मेरे खून में है
अली की फिल्मों में मनोरंजन की हैवी डोज के साथ देशभक्ति का संदेश भी होता है। इस पर अली ने कहा कि उनके खून में देशभक्ति है। उनके पिता फौज में थे। उनका बचपन देहरादून में बीता है। यहां भारतीय सैन्य अकादमी को देखकर उनके अंदर देशप्रेम का भाव पैदा हुआ। उन्होंने कहा कि फिल्म यूनिट से जुड़े सब लोग केवल निर्देशक की सोच को आगे बढ़ाते हैं। निर्देशक के दिमाग में फिल्म का फ्रेम होता है। उसमें कैसी अदाकारी हो, कैसी लोकेशन और बैकग्राउंड, सब उसे पता होता है। जब वह यूनिट से इसे साझा करता है तो सब लोग मिलकर उसे पूरा करने की कोशिश करते हैं।
आसान नहीं फिल्म इंडस्ट्री की राह
फिल्म इंडस्ट्री की राह आसान नहीं है। लोग वर्षों तक मेहनत करने के बाद भी आगे नहीं बढ़ पाते। लेकिन अगर आपके अंदर एक्स फैक्टर है, तो मुश्किलें आसान हो सकती है। आपको सबसे अलग देखने और करनी की कोशिश करनी होती है। जो लोग बिना मेहनत किए या रातों-रात स्टार बनना चाहते हैं, उनके लिए इंडस्ट्री नहीं है।
आज भी नहीं बना पाया मुकाम
मुझे आज भी नहीं लगता कि मैंने बॉलीवुड में अपना मुकाम बना लिया है। मैं पहली पीढ़ी से हूं। मैं आज भी खुद को बाहरी मानता हूं। जरूरी नहीं कि मेरी आने वाली पीढ़ी भी यही काम करे।
ईमेल न करें स्क्रिप्ट
अली ने बताया कि नए लेखकों को किसी को भी अपनी स्क्रिप्ट ईमेल नहीं करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ समय में यह काफी व्यवस्थित इंडस्ट्री बन गई है। वहां स्क्रिप्ट राइटर्स, जूनियर आर्टिस्ट समेत अन्य के संगठन बने हुए हैं। वहां रजिस्टर करने के बाद अगर किसी को आपको काम पसंद आया तो फायदा मिल सकता है।
अब तक नहीं ली डिग्री
12वीं में अली के 85 फीसदी अंक थे, जिसके चलते उन्हें किरोड़ीमल कॉलेज में एडमिशन मिल गया। इसके बाद उन्होंने थिएटर करना शुरू कर दिया, जिससे उनकी परसेंटेज गिरकर 46 पर पहुंच गई। उन्होंने बताया कि आज तक उन्होंने ग्रेजुएशन की डिग्री नहीं ली है। अब कॉलेज वाले बुला रहे कि आप आओ, हम एक प्रोग्राम कर आपको डिग्री देंगे।
काफी समय नाराज रहे पिता
साइंस की पढ़ाई छोड़कर थिएटर और फिल्म निर्माण में जाने के उनके फैसले पर पिता ने सख्त नाराजगी जताई। अली ने बताया कि जब उन्होंने अपने परिवार में यह बात बताई तो पिता ने कहा कि तुम दिल्ली जाकर नशा तो नहीं करने लगे। लंबे समय तक उनकी यह नाराजगी जारी रही।
हर कलाकार होता है अलग
एक निर्देशक किसी भी कलाकार में सबसे पहले क्या देखता है। यह सवाल अली के सामने आया तो उन्होंने बताया कि हर कलाकार अलग होता है। लेकिन फिर भी आत्मविश्वास और रोल के अनुसार ढलने का गुण होना चाहिए। भाषा पर पकड़ होनी जरूरी है।
2007 में शुरू किया था करियर
हिंदी सिनेमा में अपनी बैक टू बैक ब्लॉकबस्टर फिल्मों के चलते अली को बॉलीवुड का डायरेक्टर नंबर वन भी कहा जाता है। सलमान खान के साथ फिल्म सुल्तान, टाइगर जिंदा है और भारत की कामयाबी के बाद उन्होंने कारोबार के मामले में भी निर्देशक राज कुमार हिरानी की बराबरी की है। उनकी टाइगर जिंदा है और सुल्तान 300 करोड़ और भारत फिल्म 200 करोड़ रुपये के क्लब में शामिल है।
अब तक ये रिकॉर्ड सिर्फ हिरानी के पास था। उनकी दो फिल्में पीके व संजू ने 300 और थ्री इडियट ने 200 करोड़ रुपये से अधिक की कमाई की है। अली अब्बास जफर इन दिनों प्राइम वीडियो के साथ एक वेब सीरीज पर काम कर रहे हैं। चर्चा है कि उनकी अगली फिल्म शाहरुख खान के साथ हो सकती है।
जफर ने अपने फिल्मी करियर की शुरुआत असिस्टेंट डायरेक्टर के तौर पर की। साल 2007 में रिलीज हुई फिल्म 'मैरीगोल्ड' में जफर असिस्टेंट डायरेक्टर थे। 'मैरीगोल्ड' में सलमान खान और अमेरिकी अभिनेत्री अली लार्टर की मुख्य भूमिका थी। इसके बाद वो यशराज फिल्म्स से जुड़े। फिल्म 'झूम बराबर झूम', 'टशन', 'न्यूयॉर्क' और 'बदमाश कंपनी' में जफर असिस्टेंट डायरेक्टर थे।
जफर की पहली निर्देशित फिल्म साल 2011 में रिलीज हुई 'मेरे ब्रदर की दुल्हन' है। रोमांटिक कॉमेडी इस फिल्म में इमरान खान, कटरीना कैफ और अली जफर की मुख्य भूमिका है जबकि आदित्य चोपड़ा ने इसे प्रोड्यूस किया।
फिल्म बॉक्स ऑफिस पर हिट रही थी। साल 2014 में उन्होंने रणवीर सिंह, अर्जुन कपूर और प्रियंका चोपड़ा को लेकर फिल्म 'गुंडे' बनाई। फिल्म को दर्शकों के साथ-साथ समीक्षकों की भी सराहना मिली। यह फिल्म भी यशराज फिल्म्स के बैनर तले बनी थी।