आजादी के 70 साल बाद रोशन हुआ गांव, सोलर लाइट से आया उजाला
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यह विडंबना ही है कि आजादी के सात दशक बाद भी उत्तराखंड के गांव बिजली और सड़क से महरूम हैं। देहरादून की सहसपुर विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत ऐसा ही एक गांव धौला-तप्पड़ गांव आजादी के 70 साल बाद रोशन हो गया।
शुक्रवार को गांव में उरेड़ा के तहत सौर ऊर्जा की लाइटें लगी तो गांव वालों की खुशी की ठिकाना नहीं रहा। शाम ढलते ही गांव दुधिया रोशनी से नहा उठा। जिस पर गांव वालों ने रातभर जश्न मनाया। कालसी भूमि संरक्षण वन प्रभाग की तिमली रेंज के जंगल के बीच में बसा होने के चलते गांव तक बिजली नहीं पहुंच सकी थी। इसमें वन विभाग के नियम भी आड़े आ रहे थे।
यहां के 70 परिवारों को अंधेरे में रात गुजारनी पड़ रही थी। रात में जंगली जानवरों का भी डर रहता था। ऐसे में वॉरियर गर्ल्स ने गांव तक बिजली पहुंचाने की ठानी। उन्होंने गांव के वन गुर्जर परिवारों को लामबंद किया। कुछ समय पूर्व उनकी मुलाकात विधायक सहदेव पुंडीर से कराई।
जंगली जानवरों के खतरे के बीच अंधेरे में रात गुजारते थे लोग
विधायक ने गांव पहुंच कर समस्याओं के निराकरण का भरोसा दिलाया था। विधायक के निर्देश पर विभिन्न विभागों के आला अधिकारी भी गांव पहुंचे थे। विधायक ने उरेड़ा को गांव में लाइट लगाने के निर्देश दिए थे। जिसके तहत गांव में 10 लाइटों को लगा दिया गया।
संस्था की अध्यक्ष रेहाना सिद्दकी, ऋतु सैनी, प्रीति सैनी, अनीता सैनी ने बताया कि बिजली न होने से गांव के बच्चों ने अब तक कंप्यूटर भी नहीं देखा था। उनकी संस्था ने गांव पहुंच कर बच्चों को साक्षर करने का काम किया।
उन्हें आधुनिक शिक्षा के प्रति जागरूक किया। वहीं ग्रामीण लियाकत अली, आबिद, गुलाम मोहम्मद आदि ने संस्था के साथ ही विधायक का आभार जताया।
गांव तक बिजली पहुंचाने में ह्यूमन राइट्स एंड आरटीआई एक्टिविस्ट एसोसिएशन का भी विशेष सहयोग रहा। संस्था ने ग्रामीणों की समस्याओं को कई मंचों पर उठाया। अध्यक्ष अरविंद शर्मा और महासचिव भास्कर चुग ने कहा कि बिजली के बाद अन्य सुविधाएं भी जुटाने का प्रयास किया जाएगा।