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शक के चलते पत्नी-बेटी को मारा, 26 साल बाद उम्रकैद

Wed, 12 Nov 2014 06:39 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून
ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून Updated Wed, 12 Nov 2014 06:39 AM IST
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life imprisonment in murder of wife and daughter.

दुधमुंही बच्ची और पत्नी की हत्या करने वाले दिल्ली डेवलपमेंट अथॉरिटी (डीडीए) के पूर्व इंजीनियर को अदालत ने आजीवन कारावास और पांच हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है। 26 साल पुराने इस मामले में अदालत ने सोमवार को उसे हत्या और साक्ष्य छिपाने का दोषी करार दिया था।

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मूल रूप से सोनीपत हरियाणा एवं हाल निवासी उत्तमनगर, नई दिल्ली सेवाराम गोयल जून 1988 में पिता सत्यनारायण गोयल, पत्नी सरोजबाला और दो बेटियों को चारधाम यात्रा कराने के लिए उत्तराखंड (तब उत्तर प्रदेश) लाया था। उसने भैरोघाटी उत्तरकाशी के पास पहाड़ी से धकेलकर करीब एक साल की छोटी बेटी चीनू और पत्नी की हत्या कर दी थी।
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पुलिस को गुमराह करने के लिए उसने हरिद्वार आकर बच्ची और पत्नी की गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। सीबीआई के विशेष न्यायाधीश अमित कुमार सिरोही की अदालत में हुई सुनवाई में सीबीआई की ओर से 16 गवाह पेश किए गए। मंगलवार को पुलिस ने दोषी को साढ़े ग्यारह बजे अदालत में पेश किया और उसे सवा बारह बजे सजा सुनाई गई।

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छोटी बेटी को नहीं मानता था अपनी

life imprisonment in murder of wife and daughter.

अदालत में लोक अभियोजक अधिकारी पंकज गुप्ता ने कहा कि मार्च 1985 में शादी के बाद पांच जनवरी 1987 को सरोजबाला ने दूसरी बेटी चीनू को जन्म दिया था। सेवाराम मानता था कि चीनू उसकी बेटी नहीं है। वह सरोजबाला को दहेज के लिए परेशान करता था और उसपर कई आरोप लगाए थे।

ये हुई सजा
अदालत ने बच्ची और महिला की हत्या का आरोप साबित होने पर दोषी इंजीनियर को आजीवन कारावास और पांच हजार रुपये अर्थदंड एवं साक्ष्य छिपाने पर दो साल की कैद एवं तीन हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है। दोनो सजाएं साथ चलेंगी।

कम सजा की गुहार
मंगलवार को अदालत में सुनवाई के दौरान सेवाराम गोयल ने अपनी उम्र का हवाला देते हुए कम सजा की गुहार लगाई। उसने कहा कि वह अब बुजुर्ग हो चुका है और पिछले कई साल से यह मुकदमा चल रहा है।

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