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बाबा केदार की सुरक्षित और सुलभ यात्रा के दावे हवा हवाई
विनय बहुगुणा/ अमर उजाला, रुद्रप्रयाग
Updated Tue, 20 Jun 2017 01:06 PM IST
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- फोटो : amarujala
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आपदा के बाद से केदारनाथ की यात्रा को सुरक्षित और सुलभ बनाने के दावे हवा हवाई हो गए हैं। तीन वर्ष में यात्रा पटरी पर आने के साथ ही दौड़ने लगी हैं, लेकिन श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुविधा को लेकर कोई कार्य नहीं हो पाया है। इसके विपरीत सुरक्षित केदारनाथ के नाम पर सरकार का पूरा ध्यान हवाई यात्रा को बढ़ावा देने में लगा रहा।
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16/17 जून 2013 की आपदा ने केदारनाथ धाम सहित केदारपुरी में भारी तबाही मचाई थी। गौरीकुंड से रुद्रप्रयाग तक व्यापक नुकसान हुआ था। तब सरकार ने बाबा केदार की यात्रा को सुरक्षित और सुलभ बनाने के लिए गौरीकुंड-केदारनाथ पैदल मार्ग पर व्यापक सुरक्षा इंतजाम, रामाबाड़ा से गौरीकुंड तक रोपवे निर्माण और केदारनाथ में केबल कार संचालित करने की घोषणा की थी, लेकिन इस दिशा में कार्य शुरू होना तो दूर योजना तक नहीं बन पाई है।
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पूर्व सीएम हरीश रावत ने केदारनाथ और केदारघाटी के अपने 37 दौरों में इन घोषणाओं को हर हाल में पूरा करने का आश्वासन दिया था, लेकिन ढाई वर्ष में इस दिशा में कार्य शुरू होना तो दूर योजना तक नहीं बन पाई। यात्रा के मुख्य पैदल मार्ग गौरीकुंड-केदारनाथ पर भी डेंजर जोन का ट्रीटमेंट नहीं हो पाया है। दो वर्ष में पैदल मार्ग पर भूस्खलन व चट्टान धंसने से चीरबासा और भीमबली में दो यात्रियों की मौत हो चुकी है। शुरुआती चार किमी मार्ग अति संवेदनशील है लेकिन यहां सुरक्षा उपाय नहीं किए गए हैं।
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सड़क की मांग की हो रही अनदेखी
केदारनाथ धाम के लिए वर्ष 1975 में अविभाजित यूपी में गौरीकुंड-रामबाड़ 8 किमी हल्का मोटर मार्ग स्वीकृत हो चुका है। तत्कालीन कैबिनेट मंत्री नारायण दत्त तिवारी ने मार्ग निर्माण के लिए 2 करोड़ रुपये स्वीकृत कराए थे। 1978 में लोनिवि ऊखीमठ डिवीजन द्वारा मार्ग का कार्य शुरू कर दो किमी कटिंग की गई, जिस पर 18 लाख रुपये खर्च भी हुए थे, लेकिन आगे का कार्य वनाधिनियम के कारण रोक दिया गया। तब से मोटर मार्ग की मांग होती आ रही है।
रोपवे भी फाइलों में बंद
वर्ष 2005-06 में रामबाड़ा से केदारनाथ के लिए 3.5 किमी रोपवे निर्माण की घोषणा की गई। सर्वेक्षण कर लागत 72 करोड़ रुपये बताई गई, लेकिन किसी कंपनी ने हाथ आगे नहीं बढ़ाया। जून 2013 के बाद प्रदेश सरकार ने पुन: रोपवे निर्माण की घोषणा की, लेकिन आज तक इस दिशा में कोई कार्रवाई नहीं हो पाई है।
ढाई करोड़ के वैकल्पिक मार्ग बदहाल
विषम परिस्थितियों में केदारनाथ धाम तक पहुंच और रेस्क्यू के लिए शासन द्वारा वर्ष 2014 में चौमासी-केदारनाथ और त्रियुगीनारायण-केदारनाथ वैकल्पिक पैदल मार्ग की स्वीकृति दी गई। ढाई करोड़ में केदारनाथ वन प्रभाग द्वारा इन वैकल्पिक रास्तों का निर्माण किया गया, लेकिन मार्गों पर यात्रा संचालन तो दूर ट्रेकिंग तक संभव नहीं हैं।
4 से 13 हो गई हेली कंपनियां
वर्ष 2013 की आपदा के बाद तत्कालीन सरकार द्वारा सुरक्षित यात्रा के नाम पर केदारनाथ के लिए हेली सेवा को खूब बढ़ावा दिया गया। वर्ष 2012 तक जहां सिर्फ 4 कंपनियों के चार हेलीकॉप्टर फाटा से केदारनाथ के लिए उड़ान भर रहे थे। वहीं, वर्ष 2014 में हेली कंपनियों की संख्या 8, वर्ष 2015 में 10, वर्ष 2016 में 11 और वर्ष 2017 में 13 तक पहुंच गई। हेली कंपनियों द्वारा 2015 में 44 करोड़ और 2016 में 56 करोड़ की कमाई की गई। यात्रा के नाम पर हेलीकॉप्टर केदारघाटी के आसमान में प्रतिदिन औसतन 241 से 260 शटल कर रहे हैं।
केदारनाथ मुख्य पैदल मार्ग की सुरक्षा को लेकर पूरी सतर्कता बरती जा रही है। यात्रा को सुरक्षित और सुलभ बनाने के लिए पूर्व में क्या घोषणाएं हुई, इनके बारे में मुझे जानकारी नहीं हैं। रामबाड़ा-गौरीकुंड रोपवे को लेकर शासन स्तर पर विचार किया जा रहा है।
-मंगेश घिल्डियाल, जिलाधिकारी रुद्रप्रयाग