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उत्तराखंडः यहां दम तोड़ रही मनरेगा योजना, वित्तीय वर्ष में मिला केवल इतना रोजगार
Mon, 13 May 2019 03:36 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal
यशंवत बडियारी, अमर उजाला, देवाल
यशंवत बडियारी, अमर उजाला, देवाल
Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal
Updated Mon, 13 May 2019 03:36 PM IST
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मनरेगा के अंतर्गत 2018-19 में 6012 पंजीकृत परिवारों में से 409 परिवारों को ही सौ दिन का रोजगार मिल पाया। ब्लाक की 1073 योजनाओ में नौ करोड़ 1.6 लाख रूपया खर्च हुआ। धनराशि न मिलने से मैटीरियल अंश का 2 करोड़ 48 लाख 72 हजार रुपए भुगतान रुका है।
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मनरेगा के अंर्तगत गांवों में कई प्रकार की योजनाएं बनायी जा रही हैं। मनरेगा से मिलने वाली धनराशि को सड़कों की मरम्मत, खेेती आदि पर खर्च किया जाता है। रोजगारपरक योजना होने के बावजूद 10 प्रतिशत परिवारों को भी सौ दिन का रोजगार नही मिलता है।
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बित्तीय साल 2017-18 में 358 परिवारों को 100 दिन का रोजगार मिला था। प्रधान संघ केअध्यक्ष पुष्कर फर्स्वाण तथा महामंत्री हीरा राम ने कहा मनरेगा कार्यों में हीला-हवाली या देरी से ग्रामीण क्षेत्रों का विकास नहीं हो पाता है।
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इस साल की कार्ययोजना बना ली गयी है। जल्दी काम शुरू किया जाएगा। रुके हुए भुगतान के बारे में उच्चधिकारियों को रिर्पोट भेजी गयी है। एक माह के अंदर मैटीरियल अंश का भुगतान होने की उम्मीद है।
- एमपी भटट, बीडीओ, देवाल