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वापसी को तैयार हैं भाजपाई, लेकिन पहल कौन करे?
अजित सिंह राठी/ अमर उजाला, देहरादून
Updated Tue, 25 Mar 2014 11:36 AM IST
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लोकसभा के टिकट देने में बढ़त लेने वाली भाजपा उत्तराखंड में चुनाव के लिए गियर-अप नहीं हो पा रही है।
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नेताओं का एक बड़ा तबका सुसुप्त
प्रत्याशी तो सक्रिय हैं लेकिन नेताओं का एक बड़ा तबका सुसुप्त अवस्था में है। पिछले विधानसभा चुनाव में टिकट से वंचित रहे पार्टी के 27 नेताओं ने बतौर निर्दलीय चुनाव लड़ा था।
उनमें से कई वापस आने को तैयार है, लेकिन वापसी केवल कोटद्वार से शैलेंद्र रावत की ही हुई।
पार्टी के राष्ट्रीय सचिव त्रिवेंद्र सिंह रावत एक कार्यक्रम में इस बात की पैरवी कर चुके है कि पुराने नेताओं को पार्टी में लाया जाए।
कर्णप्रयाग से विधायक रहे अनिल नौटियाल पूर्व सीएम निशंक के खास माने जाते है लेकिन वापसी नहीं हो सकी।
पुरोला व देहरादून में राजकुमार का दबदबा
एक नेता ने कहा कि शैलेंद्र रावत की पार्टी में वापसी के पीछे केवल जनरल बीसी खंडूड़ी को फायदा दिलाना है। पूर्व विधायक राजकुमार का पुरोला व देहरादून की कई पॉकेट्स में दबदबा है। कैलाश शर्मा अल्मोड़ा में सक्रिय है।
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पिछले विधानसभा चुनाव में सीटिंग विधायकों के टिकट कटे लेकिन वे पार्टी में बने रहे। कैबिनेट मंत्री रहे खजानदास व गोविंद सिंह बिष्ट, पूर्व विधायक खड़क सिंह बोरा व शेरसिंह गड़िया शामिल हैं।
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लेकिन पार्टी इन नेताओं का भी सदुपयोग नहीं कर रही है। टिकट नहीं मिलने से नाराज होकर पार्टी से अलग होकर अल्मोड़ा से विस चुनाव लड़े कैलाश शर्मा, नरेंद्र नगर से लड़े आदित्य कोठारी, धनोल्टी से राजेश नौटियाल भी पार्टी से बाहर हैं।
जबकि ये सभी सक्रिय राजनीति करने वालों में हैं। नेताओं की यह ऐसी खेप है जो कि चुनावी माहौल बनाने में मददगार हो सकती है।
कई दिग्गजों में पैदा करनी होगी दिलचस्पी
प्रदेश भाजपा प्रभारी व चुनाव प्रभारी अपने चुनाव में व्यस्त है। पूर्व प्रदेश अध्यक्षों में बची सिंह रावत नाराज है ही।
बिशन सिंह चुफाल, बची सिंह रावत, पूरण शर्मा, मनोहरकांत ध्यानी जैसे नेताओं का भी पार्टी ने अभी तक संज्ञान नहीं लिया। पांच साल कैबिनेट मंत्री रहे त्रिवेंद्र सिंह रावत राष्ट्रीय सचिव होने के बहाने यूपी प्रभारी अमित शाह के साथ काम कर रहे है।
पिछले विधानसभा चुनाव में जिनके टिकट काटे गए
धनोल्टी से खजानदास, श्रीनगर से ब्रजमोहन कोटवाल, धारी से गोविंद सिंह बिष्ट, नैनीताल से खड़क सिंह बोरा, कपकोट से शेर सिंह गड़िया ऐसे नेता हैं जिनका टिकट कटा लेकिन पार्टी के प्रति वफादारी निभाते हुए ये सभी भाजपा में बने रहे।
जो बाहर किए गए
थराली से पूर्व विधायक जीएल शाह, कर्णप्रयाग से अनिल नौटियाल, सहसपुर से राजकुमार शामिल हैं। ये सभी पार्टी से बाहर है लेकिन कोटद्वार से शैलेंद्र रावत को पार्टी में शामिल किया जा चुका है।