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Hindi News ›   Uttarakhand ›   Dehradun News ›   Leader of Opposition Yashpal Arya raised questions on giving operation of Kailas Mansarovar Yatra in private hands

kailash Mansarovar: यात्रा का संचालन निजी हाथों में देने पर उठे सवाल, नेता प्रतिपक्ष ने कहा- मामले में पुनर्विचार करे सरकार

Sat, 21 May 2022 04:52 PM IST
रेनू सकलानी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Published by: रेनू सकलानी Updated Sat, 21 May 2022 04:52 PM IST
सार

बीते वर्षों तक यात्रा का बड़ा भू-भाग पैदल ही तय किया जाता था, लेकिन अब समूचे यात्रा मार्ग में सड़क पहुंच गई है। अब जब निगम को प्रतिकूल हालात में यात्रा संचालन का प्रतिफल और बेहतर ढंग से मिलना था। तब सरकार ने यात्रा संचालन का काम बिना किसी निविदा के आठ वर्षों के लिए एक निजी कंपनी को दे दिया।

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Leader of Opposition Yashpal Arya raised questions on giving operation of Kailas Mansarovar Yatra in private hands
कैलास मानसरोवर यात्रा - फोटो : file photo

विस्तार

कुमाऊं मंडल विकास निगम (केएमवीएन) की ओर से वर्ष 1981 से प्रसिद्ध कैलास मानसरोवर यात्रा संचालित की जा रही है। अब जब समूचे यात्रा मार्ग में सड़क पहुंच गई है और निगम को इसका लाभ मिलता, तब सरकार ने यात्रा संचालन का काम बिना किसी निविदा के आठ वर्षों के लिए एक निजी कंपनी को दे दिया।

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यह वक्तव्य देते हुए नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने इस मामले में सरकार पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए जवाब मांगा है। नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने कहा कि निगम को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए केएमवीएन ने वर्ष 1994 से भारतीय सीमा से आदि कैलास यात्रा शुरू की थी। शुरुआत के प्रतिकूल हालात में यात्रा संचालित कर निगम ने यात्रा मार्ग में लगभग एक दर्जन टीआरसी और कैंप आदि स्थापित किए।
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प्रतिकूल मौसम के बावजूद यहां दर्जनों निगम कर्मियों ने तैनाती के क्रम में सेवाएं दीं। क्षेत्र के ग्रामीणों को भी रोजगार से जोड़ा गया। यह यात्रा आज निगम की विशिष्ट पहचान बन गई है। बीते वर्षों तक यात्रा का बड़ा भू-भाग पैदल ही तय किया जाता था लेकिन अब समूचे यात्रा मार्ग में सड़क पहुंच गई है। अब जब निगम को प्रतिकूल हालात में यात्रा संचालन का प्रतिफल और बेहतर ढंग से मिलना था।

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तब सरकार ने यात्रा संचालन का काम बिना किसी निविदा के आठ वर्षों के लिए एक निजी कंपनी को दे दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि निजी कंपनी दशकों से बनाई गई निगम की सुविधाओं का सदुपयोग तो करेगा, लेकिन निगम को इसका कोई लाभ नहीं मिलेगा। आर्य ने बताया कि 56 हजार रुपये के टिकट में सरकार या निगम के हिस्से में मात्र 12400 रुपये की धनराशि आएगी।  


उन्होंने कहा कि अब यदि पर्यटन के क्षेत्र में दशकों से काबिज होने, बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर, स्टाफ, सरकारी सिस्टम सपोर्ट होने के बावजूद निगम कुछ वर्षों पूर्व स्थापित निजी कंपनी से कमतर है तो यह सरकारी सिस्टम पर सवालिया निशान है? आर्य ने कहा कि निगम से यात्रा की जिम्मेदारी हटाने से कर्मचारियों और निगम के भविष्य पर भी प्रश्न चिन्ह्र खड़ा हो गया है।


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उन्होंने कहा कि यदि सरकार को यह काम निजी कंपनी को ही देना था तो इसके लिए खुली निविदाएं क्यों नहीं आमंत्रित की गईं। इससे स्पष्ट होता है कि इस मामले में भ्रष्टाचार हुआ है। उन्होंने सरकार से इस मामले में पुनर्विचार कर निगम को पुन: यात्रा संचालन की जिम्मेदारी दिए जाने की मांग की है। 

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