राज्य आंदोलनकारियों और वकीलों का सचिवालय कूच, रोकने पर पुलिस से हुई नोकझोंक
वकीलों की मांगें ...
- प्रदेश के वकीलों की सुरक्षा के लिए दूसरे राज्यों की तरह एडवोकेट प्रोटेक्शन एक्ट लागू किया जाए।
- अन्य प्रदेशों की तरह कल्याणकारी योजनाओं के लिए कल्याण कोष की स्थापना की जाए।
- वकीलों को बैठने के लिए जमीन देने के साथ ही चैंबर का निर्माण कराया जाए
- नवंबर 2000 से पहले के वकीलों को राज्य आंदोलनकारी घोषित किया जाए।
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अन्य प्रदेशों की तर्ज पर अधिवक्ता एक्ट लागू करने, पुरानी जेल परिसर में चैंबर के लिए प्रस्तावित जमीन के आवंटन में हो रही देरी समेत चार सूत्री मांगों को लेकर शुक्रवार को वकीलों ने सचिवालय कूच किया। इस दौरान पीएचक्यू के पास लगी बैरिकेडिंग पर पुलिस ने उन्हें रोक दिया। इस पर वकीलों की पुलिस से नोकझोंक हो गई और इसके बाद मौके पर हंगामा हो गया। किसी तरह मामला शांत हुआ तो वकीलों ने सिटी मजिस्ट्रेट को ज्ञापन सौंपा।
बार एसोसिएशन के अध्यक्ष मनमोहन कंडवाल और सचिव अनिल कुमार शर्मा के नेतृत्व में वकील कोर्ट परिसर में एकत्र हुए। उसके बाद उन्होंने दून अस्पताल चौक, लैंसडोन चौक होते हुए सचिवालय कूच किया। इसे देखते हुए परेड ग्राउंड से सचिवालय तक पुलिस फोर्स लगाई गई थी। सचिवालय जाने से बैरिकेडिंग पर रोकने पर वकील भड़क उठे और नारेबाजी शुरू कर दी।
एसपी सिटी श्वेता चौबे ने उनसे ज्ञापन देने को कहा। लेकिन बार एसोसिएशन अध्यक्ष ने कैबिनेट स्तर के मंत्री को ही ज्ञापन देने की बात कही। चेतावनी भी दी जल्द एक प्रस्ताव पास कर निर्णय लिया जाएगा कि कोई वकील किसी नेता का मुकदमा न लड़े। साथ ही प्रदेशस्तर पर आंदोलन करने का भी निर्णय लेंगे। उन्होंने कहा कि मांगें पूरी नहीं होने के कारण उन्हें सचिवालय कूच करना पड़ रहा है।
16 फरवरी 2018 को शहरी विकास मंत्री मदन कौशिक ने पुरानी जेल परिसर में निर्माणाधीन न्यायालय भवन के पास चैंबर के लिए जमीन देने की घोषणा करते हुए भूमि पूजन किया था। लेकिन, अभी तक आवंटित नहीं हुई। इसको लेकर कई दफा प्रतिनिधिमंडल मुख्यमंत्री समेत संबंधित अधिकारियों से मिल चुका है। राज्य आंदोलन में भी वकीलों ने अहम योगदान दिया है।
ऐसे में नौ नवंबर 2000 से पहले के अधिवक्ताओं को आंदोलनकारी घोषित किया जाए। इसके बाद वकीलों ने सिटी मजिस्ट्रेट को ज्ञापन दिया। अधिवक्ताओं में बार काउंसिल सदस्य सुरेंद्र पुंडीर, मनमोहन, राकेश गुप्ता, अनिल पंडित, रंजन सोलंकी, प्रकाश, अधिवक्ता अश्वनी शर्मा, शिवा वर्मा, आशीष बंसल, दीपक गुप्ता, आशीष कुमार, मनीष राजपूत, सुनीता प्रकाश, मधु ठाकुर, कमल यादव के साथ ही हल्द्वानी एवं कोटद्वार बार एसोसिएशन के अध्यक्ष आदि मौजूद रहे।
जुलूस के दौरान पार्षद के भाई की पिटाई, पुलिस से झड़प
वकीलों के जुलूस के दौरान हेलमेट न लगाने को लेकर हुए विवाद में भाजपा पार्षद के भाई की पिटाई कर दी गई। पुलिस ने बीच में आकर मुश्किल से युवक को बचाया। भीड़ ने सीएफओ की गाड़ी में बैठाए गए युवक को बाहर खींचने का प्रयास किया। इस दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच नोक-झाेंक हो गई। हालांकि इस मामले में देर रात तक कोई तहरीर नहीं आई है।
शुक्रवार दोपहर अधिवक्ताओं का जुलूस सचिवालय की तरफ जा रहा था। इसी दौरान भाजपा पार्षद का भाई मेडिकल स्टोर से दवा लेकर उधर से निकल रहा था। एक शख्स ने हेलमेट न लगाने को लेकर पार्षद के भाई का विरोध किया। इस बात को लेकर बात इतनी बढ़ी कि उनमें मारपीट हो गई। इसी बीच एकत्र हुए लोगों ने पार्षद के भाई को गिराकर लात-घूंसे बरसाने शुरू कर दिए।
जुलूस में पहुंची पुलिस ने भीड़ के चुंगल से उसे निकालकर पास में खड़ी सीएफओ की गाड़ी में ले गई। भीड़ भी पुलिस के पीछे आ गई। कुछ युवकाें ने सरकारी वाहन से युवक को बाहर निकालने का प्रयास किया। पुलिस ने विरोध किया तो मौके पर हंगामा हो गया। काफी देर तक पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तीखी झड़प होती रही।
पुलिस का कहना था कि युवक अब उनकी अभिरक्षा में है। यदि वह किसी तरह की कानूनी कार्रवाई चाहते है तो लिखित में शिकायत कर सकते हैं। शहर कोतवाल शिशुपाल नेगी ने भीड़ को समझा-बुझाकर शांत किया। पुलिस का कहना है कि इस मामले में दोनों पक्षों की तरफ से अभी कोई तहरीर नहीं आई है।