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उत्तराखंड: सीएम त्रिवेंद्र ने किया एलान, कानून बनाकर जल्द ही जब्त की जाएंगी बेनामी संपत्ति

Mon, 22 Jul 2019 08:46 AM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Published by: अलका त्यागी Updated Mon, 22 Jul 2019 08:46 AM IST
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Law for Anonymous Property will be Applicable in uttarakhand soon
- फोटो : फाइल फोटो

राज्य सरकार जल्द ही बेनामी संपत्तियों को जब्त करने के लिए सख्त कानून लाने जा रही है। सरकार ने बेनामी संपत्ति कानून का खाका तैयार कर लिया है। मुख्यमंत्री ने रविवार को बालावाला में आयोजित एक कार्यक्रम में यह जानकारी दी।

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उन्होंने कहा कि बेनामी संपति को जब्त करने के लिए एक कठोर कानून बनाया जाएगा, ताकि प्रदेश में कोई भी भ्रष्टाचारी न पनप सके। जब्त बेनामी संपत्ति का उपयोग स्कूल, अस्पताल आदि जनहित कार्यों में किया जाएगा।
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मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कहा कि भ्रष्टाचार के विरुद्ध लड़ाई धर्मयुद्ध की तरह लड़ना होगा। हमारी सरकार अपनी संस्कृति को बढ़ाने वाली, विकास के लिए काम करने वाली तथा भ्रष्टाचार मुक्त हो, इस दिशा में मजबूती से कार्य किए जा रहे हैं।
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भ्रष्टाचार को मिटाने के लिए कई कदम उठाए हैं। इसी के तहत बेनामी संपत्ति को जब्त करने का कानून लाया जा रहा है। मौजूदा प्रावधान को और सख्त व धारदार बनाने में यह कानून काफी कारगर होगा।

क्या है प्रावधान

वर्ष 2006 में केंद्र सरकार ने बेनामी लेनदेन (निषेध) संशोधन एक्ट बनाया था, जिसके तहत बेनामी लेनदेन एक्ट 1988 में संशोधन कर इसे और मजबूत बनाया गया। एक्ट के तहत बेनामी लेनदेन पर रोक है और बेनामी संपत्तियों को जब्त किया जा सकता है।

क्या है बेनामी प्रॉपर्टी
जिसके नाम पर बेनामी संपत्ति खरीदी गई होती है उसे बेनामदार कहा जाता है। बेनामी संपत्ति चल या अचल संपत्ति या वित्तीय दस्तावेजों के रूप में हो सकती है। कुछ लोग अपने काले धन का ऐसे निवेश करते हैं। सामान्य तौर पर इस तरह से अर्जित संपत्तियां बेनामदार के खुद के नाम पर न होकर किसी और के नाम होती हैं।

कितने साल की हो सकती है सजा
वर्ष 1988 के काननू संशोधन कर इस बात का प्रावधान किया गया कि केंद्र सरकार के पास ऐसी प्रॉपर्टी को जब्त करने का अधिकार है। बेनामी संपत्ति की लेनदेन के लिए दोषी पाए गए व्यक्ति को सात साल तक की कैद की सजा हो सकती है और प्रॉपर्टी की बाजार कीमत के एक चौथाई के बराबर जुर्माना लगाया जा सकता है। राज्य में लाए जा रहे कानून में सजा के इन प्रावधानों को सख्त और प्रभावी बनाने की तैयारी है।

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