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रिटर्न दाखिले में देरी पर भरना होगा जुर्माना

Fri, 03 Feb 2017 12:30 PM IST
संजय त्रिपाठी/ अमर उजाला, देहरादून
संजय त्रिपाठी/ अमर उजाला, देहरादून Updated Fri, 03 Feb 2017 12:30 PM IST
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late on return filing suffers a lot
जेटली - फोटो : Getty

आयकरदाताओं को इस बार अपने रिटर्न दाखिल करने में हीलाहवाली करना भारी पड़ सकता है। वित्त मंत्री ने तय तिथियों के बाद रिटर्न दाखिल करने पर पांच से दस हजार रुपए की पेनाल्टी लगाने की व्यवस्था बजट में की है। जुर्माने के दायरे में न केवल व्यावसायिक फर्में और कंपनियां ही नहीं बल्कि, व्यक्तिगत एवं हिंदू अविभाजित परिवार समेत सभी प्रकार के करदाता आएंगे।

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बुधवार को वित्त मंत्री अरुण जेटली के बजट भाषण में करदाताओं को खुश करने के लिए करमुक्त आय की सीमा और दरों में गिरावट करने की बात तो सामने आ गई, लेकिन एक महत्वपूर्ण सूचना फाइनेंस बिल में सामने आई है। इसके तहत आयकर अधिनियम की धारा 234-ए में संशोधन करते हुए वित्त मंत्रालय ने आयकर रिटर्न दाखिल करने में लापरवाही बरतने वालों पर पेनाल्टी लगाने की व्यवस्था कर दी है। पेनाल्टी की राशि पांच से दस हजार रुपये होगी।
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आयकर विशेषज्ञों के मुताबिक चालू वित्त वर्ष से इस नए प्रावधान को लागू किया गया है। व्यक्तिगत करदाताओं के लिए वित्तीय वर्ष 16-17 का रिटर्न भरने के लिए अंतिम तिथि 31 जुलाई 2017 होगी। नए नियमों के तहत यदि इस तिथि के बाद रिटर्न फाइल किया जाएगा तो पांच हजार रुपये पेनाल्टी लगेगी, जो वर्तमान में शून्य थी। पांच हजार रुपये अर्थदंड के साथ अधिकतम 31 दिसंबर 2017 तक की तिथि तक रिटर्न फाइल करने की छूट रहेगी।
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इस तिथि के बाद भी यदि रिटर्न जमा नहीं होता है तो दस हजार रुपये का अर्थदंड देने के बाद ही रिटर्न स्वीकार किया जाएगा। यह नियम कंपनियों और फर्मों के अलावा सभी प्रकार के करदाताओं के लिए मान्य होगा। इसके अतिरिक्त सीए द्वारा यदि किसी फर्म या कंपनी का आडिट गलत तरीके से किया जाता है तो उस पर भी दस हजार रुपये की पेनाल्टी लगाने का प्रावधान है।

केवल प्राइवेट लिमिटेड और लिमिटेड फर्मों को टैक्स में छूट
देहरादून। आम बजट में 50 करोड़ तक का टर्नओवर करने वाली जिन फर्मों को 30 के बजाय 25 फीसदी टैक्स देने की छूट दी गई है, उनमें केवल प्राइवेट लिमिटेड और लिमिटेड फर्में शामिल होंगी। यह लाभ लिमिटेड लाइबिलिटी पार्टनरशिप वाली फर्मों को नहीं मिलेगा, जबकि बड़ी तादाद में ये फर्में सूक्ष्म, मध्यम एवं लघु उद्योगों का संचालन कर रही हैं। इससे उद्यमियों को बड़ा झटका लगा है।


रिटर्न दाखिल करने वालों की संख्या बढ़ाने के बजाय वित्त मंत्री ने मौजूदा रिटर्न फाइल करने वालों पर ही शिकंजा कस दिया है। यह अच्छा संकेत नहीं है। लिमिटेड लाइबिलिटी पार्टनरशिप फर्मों को टैक्स में छूट न दिए जाने की बात समझ से परे है। इसमें जल्द ही वित्त मंत्रालय के स्तर पर संशोधन किया जाना चाहिए।
- सीए विवेक खन्ना, पूर्व चेयरमैन (सेंट्रल इंडिया रीजनल काउंसिल)

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