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भारत-चीन सीमा को जोड़ने वाले इन चार रास्तों पर है बड़ा 'खतरा', जापान बना रहा यह रणनीति

Mon, 16 Apr 2018 07:37 AM IST
न्यूज डेस्क/अमर उजाला, देहरादून
न्यूज डेस्क/अमर उजाला, देहरादून Updated Mon, 16 Apr 2018 07:37 AM IST
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 Landslide zones found on india china border japan will help to renovate
उत्तराखंड में चीन सीमा को जोड़ने वाले हाईवे पर भूस्खलन के कारण आवाजाही और सैन्य साजोसामान की जो आपूर्ति बार-बार बाधित होती थी, वह अब नहीं होगी। जरूरत पड़ने पर चीन सीमा तक भारतीय सेना बोफोर्स तोप जैसी बड़ी आर्टिलरी भी ले जा सकेगी।
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दरअसल वन विभाग ने एनएच-58 (गढ़वाल) और एनएच-87 एक्सटेंशन (कुमाऊं) पर भूस्खलन की दृष्टि से संवेदनशील चार स्थानों का चयन किया है, जिन्हें जापान की मदद से भूस्खलन मुक्त बनाया जाएगा।
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इसके लिए जापानी विशेषज्ञों की टीम राज्य में पहुंच चुकी है। जापान इस काम के लिए आर्थिक मदद तो कर ही रहा है साथ ही ‘जापान तकनीकी सहायता परियोजना’ के तहत उसके विशेषज्ञों की टीम नेे राज्य में डेरा भी डाल दिया है।
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शक जायका

संवेदनशील स्थानों का होगा अध्ययन

 Landslide zones found on india china border japan will help to renovate

जापानी विशेषज्ञों की मदद से सबसे पहले चीन सीमा को जोड़ने वाले एनएच-58 (गढ़वाल) पर स्थित नीरगाड़ (नरेंद्र नगर वन प्रभाग प्रभाग) और एनएच-87 एक्सटेंशन (कुमाऊं) पर स्थित पाडली (नैनीताल वन प्रभाग) में भू-स्खलन रोकने का काम शुरू होगा।

इसके अलावा एनएच-58 को लिंक करने वाले जवाड़ी प्रथम और जवाड़ी द्वितीय (रुद्रप्रयाग) पर भी भूस्खलन रोकने का काम होगा। अपर मुख्य वन संरक्षक व जायका परियोजना के निदेशक अनूप मलिक के अनुसार, वन मुख्यालय ने इन योजनाओं के लिए तीन स्पेशल टीमों का गठन किया है।

संवेदनशील स्थानों का होगा अध्ययन
जिन चार संवेदनशील स्थानों का चयन किया है, उसमें पहले जियोलॉजी अध्ययन, आठ साल की बरसात का डाटा, वाटर डिस्चार्ज समेत सभी तरह की सूचनाओं को एकत्र किया जाएगा।

इन सूचनाओं के आधार पर जापान की क्रिप वर्क तकनीक, स्टील डैम और सिलिंडर चेकडैम से भूस्खलन प्रभावित क्षेत्र का उपचार होगा। वन विभाग की योजना है कि जापान की मदद से भूस्खलन रोकने के साथ पूरी प्रणाली को सीखा जाए, जिससे भविष्य में राज्य स्तर पर ही काम हो सके।

 Landslide zones found on india china border japan will help to renovate

क्रिप वर्क तकनीक : स्टील और कंक्रीट के ब्लॉक बनाकर पूरे भू-क्षरण इलाके को बांध दिया जाता है और चारों तरफ घास, झाड़ी को लगाकर वेजिटेटिव ट्रीटमेंट किया जाता है।
स्टील डैम : स्टील का ढांचा लगाकर वहीं की मिट्टी, पत्थर भरा जाता है।

जापान और उत्तराखंड की भौगोलिक स्थितियां और समस्याएं एक जैसी हैं। जापान ने सौ वर्ष से 10 से 12 परिष्कृत प्रणालियां विकसित की हैं, जिनके शानदार परिणाम आए हैं। अब उन्हीं तकनीक के माध्यम से राज्य में चार जगहों पर भूस्खलन का खतरा कम करने के लिए काम शुरू किया गया है।

जापान की टीम पहुंच चुकी है, उनके अन्य विशेषज्ञ भी लगातार दौरा कर रहे हैं। अगर चारों स्थानों पर प्रयोग सफल रहा, तो उसे अन्य भूस्खलन प्रभावित जगहों पर इस्तेमाल किया जाएगा।

-अनूप मलिक, अपर मुख्य वन संरक्षक व परियोजना निदेशक जायका

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