उत्तराखंड: हाईवे पर पिलर को सीधा करने के दौरान श्रमिक कुएं में गिरा, ऊपर गिरे 35 ब्लॉक बोल्डर
- रायवाला-नेपालीफार्म के बीच सत्यनारायण मंदिर के पास सुसवा नदी पर पुल निर्माण का चल रहा है काम
- देर शाम तक काफी खोजबीन के बाद भी नहीं मिला कोई सुराग
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
उत्तराखंड के रायवाला में राष्ट्रीय राजमार्ग निर्माण पर तिरछे पिलर को सीधा करने की जद्दोजहद में लगा एक श्रमिक कुएं में गिर गया। बताया जा रहा है कि श्रमिक बिना सुरक्षा उपाय के पिलर पर चढ़कर काम कर रहा था। इसी दौरान श्रमिक के ऊपर कई दर्जन बोल्डर गिर गए। देर शाम तक श्रमिक का पता नहीं लग पाया था।
कुएं में गिरे श्रमिक की पहचान गौतम (22 वर्ष) पुत्र सोहनलाल निवासी मेरठ (यूपी) के रूप में हुई है। सोमवार की सुबह सत्यनारायण मंदिर के पास हाइवे निर्माण कंपनी उत्तर प्रदेश सेतु निगम लिमिटेड का सुसवा नदी पर पुल निर्माण कार्य चल रहा था।
पुल का एक कुआं जोकि तिरछा हो गया था उसे सीधा करने की कोशिश की जा रही थी। इसके लिए एक क्रेन मशीन चालक और चार अन्य श्रमिक लगाए गए थे। पिलर को सीधा करने के लिए करीब तीन सौ पचास किलो वजन के पहले से रखे 26 ब्लॉक बोल्डरों के ऊपर क्रेन के सहारे नौ और ब्लॉक बोल्डरों को रखा जाने लगा।
इन्हें खोलने और सही क्रम में रखने के लिए श्रमिक गौतम पिलर पर चढ़ा हुआ था। अचानक लोहे के गाटरों के नीचे लगी लकड़ी की कड़ी टूट गई और पिलर पर रखे 35 ब्लॉक बोल्डर खिसककर नीचे गिरने लगे। इस दौरान ब्लॉक बोल्डरों के ऊपरी हिस्से पर चढ़ा गौतम भी पिलर के बीच बने गहरे कुएं में जा गिरा।
इसके बाद सारे बोल्डर कुएं में जा गिरे और श्रमिक भी उसी में दब गया। हादसे के बाद साथी श्रमिक और क्रेन चालक घटनास्थल की ओर भागे। तब तक श्रमिक गहरे कुंए में भरे पानी और बोल्डर के बीच दब चुका था।
मौके पर कंपनी के अधिकारी और पुलिस के सिपाही पहुंचे। श्रमिक को बाहर निकालने के लिए एसडीआरएफ टीम भी पहुंची। पंप के जरिए कुएं में भरे पानी को निकालने के लिए काफी देर तक कोशिश जारी रही, लेकिन देर शाम तक गौतम को बाहर नहीं निकाला जा सका।
पिछले पांच सालों से तिरछा था पिलर
नदी पर पुल निर्माण के लिए पिलर तो बना दिए गए, लेकिन इसमें मानकों का ख्याल नहीं रखा गया। इसका नतीजा ये रहा कि एक पिलर की बुनियाद तिरछी हो गई। तिरछे पिलर को पहली निर्माण कंपनी ने भी सीधा करने की काफी कोशिश की किंतु सफल नहीं हुई।
इसके बाद वर्तमान में कार्य कर रही उप्र राज्य सेतु निगम की ओर से इसे भी लगातार दो सालों से सीधा करने की जद्दोजहद जारी थी। पिछले कई दिनों से इसके एक किनारे पर वजनी ब्लॉक बोल्डर रखे जाने का क्रम चल रहा था।
हादसे के बाद भी नहीं चेते कंपनी के अधिकारी
हादसे के बाद भी कंपनी के अधिकारियों ने सबक नहीं लिया। कुएं में गिरे श्रमिक कोे निकालने के कार्य में दूसरे श्रमिकों को बिना किसी सेफ्टी उपकरण के बचे हुए ब्लॉक पिलर पर क्रेन की तार बांधने के लिए भेज दिया गया। हालांकि कुछ देर बाद मौके पर खड़े लोगों के एतराज पर सेतु निगम के अधिकारी चेते और श्रमिक को दोबारा सिर्फ हेल्मेट पहनाकर भेज दिया गया।