हां मैं बिगड़ैल सांड़ हूं... तभी हरीश रावत बिलबिलाए हुए हैं, वीडियो में देखें इंटरव्यू...
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खानपुर के पूर्व विधायक और भाजपा नेता प्रणव सिंह चैंपियन कभी रिवाल्वर लेकर ठुमके लगाते तो कभी बालाओं के नृत्य का लुत्फ उठाते हमेशा चर्चाओं में रहे हैं। इससे पहले मगरमच्छ के शिकार मामले में भी वे सुर्खियों में थे। लगभग 14 साल तक कांग्रेस में रहने के बाद, उनको कांग्रेस में सब कुछ खराब दिखा और वे विजय बहुगुणा-हरक सिंह रावत के साथ हरीश रावत के खिलाफ बगावत की आवाज बुलंद कर बैठे।
बगावत के बाद भाजपा में शामिल होने से हरिद्वार के बदले राजनीतिक हालात, लंढौरा में हुए बवाल और आगामी चुनाव के मद्देनजर चल रही रस्साकसी सहित चैंपियन पर लगने वाले तमाम आरोपों पर अमर उजाला रुड़की ब्यूरो प्रभारी विनोद कुमार सिंह ने प्रणव सिंह चैंपियन से तीखे सवाल किए। इस दौरान उन्होंने न सिर्फ अपनी सफाई पेश की बल्कि मुख्यमंत्री हरीश रावत पर जमकर हमला बोला। आप भी सुनिए उन्होंने किस तरह जवाबों के ठुमके लगाए-
कांग्रेस में रहने के दौरान आप मुस्लिमों के हिमायती बने रहे, लेकिन भाजपा में जाते ही लंढौरा में दंगा हो गया। कहा जा रहा है कि यह सब प्रायोजित था ?
मैं किसी का हिमायती नहीं हूं और सबका हिमायती हूं। मुस्लिमों के तो हमें वोट ही नहीं मिले, कभी दो प्रतिशत मिले तो कभी पांच प्रतिशत। लंढौरा में सांप्रदायिक दंगा मेरी नहीं बल्कि हरीश रावत सरकार की सोची-समझी साजिश थी। हमारे महल में आग लगाई जा रही थी और हरीश रावत हरिद्वार में मौजूद थे। उनके इशारे पर ही कांग्रेस के विधायक फुरकान, पूर्व विधायक निजामुददीन और जिलाध्यक्ष राजेंद्र चौधरी ने दंगे को हवा दी। मैं लगातार एसएसपी, आईजी और डीजीपी को फोन करता रहा, लेकिन पुलिस को मौके पर जाने से रोका गया। आज भी आरोपी खुलेआम घूम रहे हैं और मेरी एफआईआर तक दर्ज नहीं की गई। मामले में किसी भी मुस्लिम ने अफसोस तक नहीं जताया। कोई भी व्यक्ति अपने घर में आग नहीं लगवा सकता।
'महापंचायत तो होगी, चाहे चनाव के पहले हो या बाद'
जो चार-पांच प्रतिशत मिलते थे, अब तो वे भी हाथ से गए ही समझिए। ऐसे में अल्पसंख्यक वोटों की भरपाई कैसे करेंगे ?
विरासत में मुझे पिछड़ा क्षेत्र मिला था, जिसके विकास के लिए मैने हर संभव प्रयास किया। क्षेत्र में डिग्री कॉलेज, बालावाली गंगा रेलवे ओवरब्रिज, लक्सर रेलवे ओवरब्रिज, बाढ़ से बचाव के लिए तटबंध का निर्माण, गगनौली में बिजलीघर जैसे कई ऐतिहासिक कार्य हमने क्षेत्र में कराए हैं, जिसे हमसे पहले तीन कैबिनेट मंत्री और विधायक नहीं करा सके थे। आज भी हम विकास को लेकर ही लड़ाई लड़ रहे हैं, इसी कारण मुझे बगावत भी करनी पड़ी। विकास के लिए हमने 18-18 घंटे कार्य किए हैं। हरीश रावत ने हमारे क्षेत्र में लगभग साढ़े चार सौ करोड़ के स्वीकृत विकास कार्य निरस्त कर दिए हैं। अगले चुनाव में भी विकास कार्य ही हमारे मुख्य मुददे होंगे। जनता हमें विकास के नाम पर वोट देगी।
लंढौरा को लेकर आपने महापंचायत का ऐलान किया, मगर महापंचायत करवा नहीं पाए ?
महापंचायत तो होकर रहेगी। चाहे चुनाव से पहले हो या फिर बाद में। कारण कि महापंचायत उस कुकर के वाल्व की तरह है जो लोगों के आक्रोश को थाम सके, वरना सांप्रदायिक दंगा भी हो सकता है, जो हम नहीं चाहते हैं। महापंचायत के लिए सात जुलाई की तारीख नियत थी, लेकिन इसे रोकने के लिए यूपी और उत्तराखंड ने दोनों राज्यों की पुलिस लगा दी। इसके बावजूद पांच हजार लोग खानपुर के शेरपुर गांव में पहुंचे थे। हां, इसके बाद मैने दिल्ली में महापंचायत की बात कही थी, जो नहीं हो सकी।
'कांग्रेस में कौन सा हरी घास मिल रही थी'
चर्चा है कि कांग्रेस से बगावत कर भाजपा में शामिल हुए विधायकों को पार्टी में तवज्जो नहीं मिल रही है। भाजपा कार्यकर्ता आपको हजम नहीं कर पा रहे हैं। पछतावा महसूस हो रहा है ?
कांग्रेस में मुझे कौन सी हरी घास मिल रही थी, गुड़ चने की सानी हो रही थी। एक बार निर्दलीय और दो बार कांग्रेस से विधायक रहा, हमेशा निर्दलीयों की तरह ही बना रहा। तीन बार जीतने के बाद भी मुझे मंत्री नहीं बनाया गया, जो कि मेरा हक था। यही नहीं 2012 के चुनाव में हरीश रावत ने मुझे हराने के लिए पूरा जोर लगाया, लेकिन जनता ने मुझे सिर आंखों पर बिठाया। जब से भाजपा में आया मुझे लगा कि मेरा 14 साल का वनवास खत्म हो गया और मैं अयोध्या में आ गया हूं। यहां मेरा पूरा सम्मान हो रहा है, यही कारण है कि राज्य सरकार की ओर से सुरक्षा हटाए जाने पर मुझे केंद्र ने सुरक्षा मुहैया कराया है। मैं राष्ट्रीय अध्यक्ष सहित कैबिनेट मंत्रियों से आसानी से मिल सकता हूं, जो कांग्रेस में नहीं था। डेढ़ साल इंतजार और कई बार दिल्ली जाने के बाद भी कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष और उपाध्यक्ष से मेरी मुलाकात तक नहीं हो सकी थी।
बिगड़ैल बैल नहीं, सांड़ हूं
आखिर हरीश रावत से आपकी क्या दुश्मनी है। जब तक आप कांग्रेस में रहे तो सब ठीक था और पार्टी छोड़ते ही उन्होंने आपको बिगड़ैल बैल की उपाधि से नवाज दिया ?
बिगडै़ल बैल नहीं, सांड़। हां मैं सांड़ हूं, तभी तो हरीश रावत में इतने छेद कर दिए कि बिलबिलाए हुए हैं। आखिर कुछ तो कहेंगे ही। बिगड़ैल सांड़ हूं इसलिए बच के ही रहना। मारूंगा तो बचेगा नहीं।
कभी हाथ में रिवाल्वर लेकर डांस तो कभी बालाओं के ठुमके की वीडियो। आपको चर्चा में बने रहने का इतना शौक क्यों ? चर्चा है कि कई बार आप स्वयं ही वीडियो बनाकर वायरल कराते हैं?
हम अपना वीडियो स्वयं क्यों वायरल कराएंगे। हां, कार्यक्रम के दौरान गनर होते हैं, ड्राइवर होते हैं और होटल के कर्मी भी होते हैं। किसके द्वारा वीडियो वायरल की गई यह ज्ञात नहीं हो सका है। कुछ विभूतियां ऐसी होती हैं जो निकलते भी हैं तो खबर बन जाती है मैं उन्हीं में से एक हूं। जहां तक रिवाल्वर लेकर डांस करने का सवाल है तो जो वीडियो वायरल हुआ वो कोई सार्वजनिक मंच नहीं था, बल्कि मेरा व्यक्तिगत कार्यक्रम था। एक अन्य वीडियो रागिनी नृत्य से जुड़ा है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में रागिनी नृत्य का चलन है। मैं इस लुप्त होती कला को पुनर्जीवित रखना चाहता हूं। उसका वीडियो वायरल कर दिया गया। मुझ जैसे नेता को कुर्ते पायजामा में बांधना उचित नहीं है। मैं अन्य विधायकों से अलग हूं।
खानपुर से अगर भाजपा का टिकट नहीं मिला तो क्या करेंगे?
टिकट के लिए आश्वासन मिला है और उम्मीद है कि मिलेगा जरूर, इसमें दो राय नहीं। पत्नी के टिकट के संबंध में जनता के आदेश का सम्मान करुंगा। फिलहाल 40 दिन से बेड पर हूं, स्वस्थ्य होने के बाद क्षेत्र की जनता से जानने का प्रयास करूंगा।
कुंवर प्रणव चैंपियन का इंटरव्यू वीडियो में देखें
सुना है आपकी पत्नी भी टिकट के लिए दावेदार हैं ?
अगर जनता चाहेगी तो पत्नी के टिकट के लिए दावा किया जाएगा, हालांकि अंतिम निर्णय भाजपा के नेतृत्व को लेना है।
बात-बात में आप अपने मसल्स दिखाकर क्या साबित करना चाहते हैं ?
जनता का प्रेम मुझे इसके लिए मजबूर करता है। कई बार मंच पर जनता के अनुरोध पर मैने मसल्स दिखाई। यही नहीं एक बार तो हरीश रावत ने भी मुझे इसके लिए कहा था।
आप नाम के आगे चैंपियन लिखते हैं। आखिर किस बात के चैंपियन हैं ?
जवाब...अभी हाल ही में मैं राष्ट्रपति से मिलने गया था तो उन्होंने भी यही सवाल पूछा था। दरअसल 1991 में टाइटल फाइट हुई थी एशिया चैंपियनशिप में। वहां मैने टाइटल चैंपियनशिप जीता था। इसके बाद मुझे टाइटल मिला था चैंपियन आफ चैंपियंस। जैसे राजेश पायलट जी अपने नाम के साथ पायलट लिखा करते थे तो हमने चैंपियन लिखना शुरू किया। इसके लिए विधायक बनने के बाद वर्ष-2002 हमने बाकायदा शपथपत्र के माध्यम से नाम परिवर्तित किया। फिर नाम के साथ चैंपियन लिखना शुरू किया।
वीडियो में देखें इंटरव्यू...