उत्तराखंड सरकार पर भाजपा नेताओं ने तेज किए हमले
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पूर्व मुख्यमंत्री और सांसद भगत सिंह कोश्यारी के हरीश रावत पर दिए बयान ने उत्तराखंड की सियासत में हलचल बढ़ा दी है।
सांसद भगत सिंह कोश्यारी ने सीधे तौर पर सरकार को गिराने की बात तो नहीं कही लेकिन यह जरूर कहा कि हरीश रावत को चुनाव लड़कर विधानसभा जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
उन्होंने कहा कि यह सरकार केवल सरक रही है और जनता का भरोसा खो बैठी है। आंख पर पट्टी बांधे बैठे कांग्रेसियों को भाजपा को मिला जनादेश नजर नहीं आ रहा है। वह अभी भी अपने खाने कमाने के साधन ढूंढ रहे है।
'पति-पत्नी को जनता ने नकार दिया'
हरिद्वार से मुख्यमंत्री की पत्नी रेणुका रावत को हराकर सांसद निर्वाचित हुए डॉ.रमेश पोखरियाल निशंक ने कहा कि हरिद्वार में मुख्यमंत्री हरीश रावत ने अपनी सरकार की स्थिरता के लिए वोट मांगे थे लेकिन जनता ने पति पत्नी को नकार दिया।
अब हरीश रावत में जरा भी नैतिकता बची है तो इस्तीफा देना चाहिए। उन्होंने कहा कि यह पहली बार हो रहा जब चुनाव एमपी के लिए नहीं बल्कि पीएम के लिए हुआ।
यह मोदी के आभामंडल का प्रभाव ही है कि चुनाव में बहुमत मिलते ही देश का सिस्टम पटरी पर आने लगा है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड में पांचों लोकसभा सीटों पर ऐसी जीत कभी नहीं हुई। भगत सिंह कोश्यारी ने 2.84 लाख के अंतर से जीतकर राज्य में नया रिकॉर्ड कायम किया है।
अब देश को सुशासन मिलेगा: खंडूड़ी
लगभग साढ़े ग्यारह बजे पौड़ी से नवनिर्वाचित सांसद व पूर्व सीएम बीसी खंडूड़ी भी प्रदेश मुख्यालय पहुंचे तो नेताओं व कार्यकर्ताओं ने उनका भव्य स्वागत किया।
खंडूड़ी ने कहा कि यह नरेंद्र मोदी का ही कमाल है कि भाजपा ने अकेले ही बहुमत जुटा लिया। लेकिन फिर भी एनडीए के सहयोगी घटक साथ रहेंगे।
उन्होंने कहा कि नरेंद्र मोदी का प्रधानमंत्री बनना ही देश को मजबूती प्रदान करने वाली बात है। खंडूड़ी ने कहा कि मोदी सरकार राष्ट्रवाद के लिए काम करेगी और देश तरक्की की तरफ बढ़ेगा।
भगतदा ने बताया राजनैतिक दर्शन
नैनीताल सांसद भगत सिंह कोश्यारी ने कहा कि कार्यकर्ताओं के समक्ष राजनैतिक दर्शन भी रखा।
उन्होंने कहा कि देश में जो परिवर्तन मोदी के नेतृत्व में हुआ है वह मुल्क आजाद होने के बाद पंडित जवाहरलाल नेहरू कर सकते थे लेकिन उन्होंने कार्ल मार्क्स को पढ़ा था, उनकी जड़े विदेशों में थी इसलिए वह देश की सूरत बदलने के बजाय अपनी जड़े बचाने में लगे रहे।
अटल बिहारी वाजपेई इस काम को कर सकते थे लेकिन भाजपा के पास पूर्ण बहुमत नहीं था, 24 राजनीतिक दलों का गठजोड़ था, इसलिए तमाम तरह के दबाव स्वतंत्र रूप से फैसला लेने में बाधा उत्पन्न कर रहे थे। मगर अब यह काम नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद हो जाएगा।