किशोर का लेटर बम, 'अगला चुनाव सीएम लड़ें या फिर मैं'
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कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष बनने के बाद मुख्यमंत्री हरीश रावत के सुर में सुर मिला रहे किशोर उपाध्याय अब अपनी नई भूमिका तय करा लेना चाहते हैं। इसके लिए उन्होंने कांग्रेस आलाकमान को पत्र लिखा है कि 2017 के विधानसभा चुनाव में मुख्यमंत्री या प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष में से कोई एक ही चुनाव लड़े।
सूत्रों की मानें तो आलाकमान को लिखे पत्र में प्रदेश अध्यक्ष ने सुझाव दिया है कि 2017 के चुनाव प्रबंधन की कमान किसी एक हाथ में ही होना बेहतर रहेगा।
पत्र के पीछे वजह कुछ दूसरी बताई जा रही हैं। कांग्रेस में अब क्रेडिट की लड़ाई शुरू हो गई है। विधानसभा उपचुनावों में जीत का सेहरा जिस तरह मुख्यमंत्री के सिर बंध रहा है, उससे पार्टी के भीतर खलबली मची है। किशोर उपाध्याय अपनी उपेक्षा और पार्टी फैसलों में हस्तक्षेप को लेकर बेहद नाराज हैं।
राज्यसभा की राह पकड़ सकते हैं किशोर
बताया जाता है कि किशोर चाहते हैं कि पार्टी विधानसभा चुनाव को लेकर उनकी भूमिका तय हो नहीं तो 2016 में खाली हो रही राज्यसभा सीट पर वे अपना दावा करें। पत्र के पीछे एक कारण उनकी टिहरी सीट पर पीडीएफ मंत्री दिनेश धनै पर मुख्यमंत्री का हाथ भी बताया जा रहा है। इससे भी किशोर का आगे का रास्ता बंद हो सकता है।
मुख्यमंत्री और प्रदेश अध्यक्ष अगर एक साथ चुनाव मैदान में होंगे तो चुनावी मैनेजमेंट में दिक्कत आएगी। लिहाजा आलाकमान को सुझाव दिया है कि किसी एक को ही चुनाव मैदान में उतारे।
-किशोर उपाध्याय, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष
मुख्यमंत्री पूर्व बहुमत के बाद भी लगातार पीडीएफ को साफ लेकर चलने की बात कह रहे हैं। सीएम के इस फैसले से भी कांग्रेस संगठन में नाराजगी है।