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चुनावी मौसम में खप रही करोड़ों की खादी
अमर उजाला, देहरादून
Updated Thu, 27 Mar 2014 09:28 AM IST
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राजधानी देहरादून में चुनावी मौसम है, लिहाजा खादी की भी चल निकली है।
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राजनीति में बापू को फालो करने वाले नेता इस वक्त खादी को अपना जरूर रहे हैं, लेकिन अपना स्टाइल कायम रख। पश्चिम बंगाल की फाइन खादी उन्हें सबसे ज्यादा भा रही है। जैकेट भी वह इसी कपड़े की तैयार कराकर पहन रहे हैं।
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परपल, सी ग्रीन जैसे रंगों को इस वक्त तवज्जो मिल रही है। आम आदमी जहां 200-220 रुपए प्रति मीटर की खादी पर रीझा है, वहीं नेताओं के बीच 350 रुपये प्रति मीटर की खादी का बोल-बाला है।
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एक अकेले क्षेत्रीय गांधी आश्रम की बात करें तो यहां से अब तक 30 लाख से अधिक की खादी बिक चुकी है। आश्रम के वीरेंद्र तिवारी की मानें तो मार्च में यह आंकड़ा अन्य महीनों से कहीं ज्यादा है।
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हालांकि वह इसे पूरी तरह चुनावी मौसम का असर नहीं मानते। शहर में मुख्य स्थानों पर चार आश्रम हैं। एक पलटन बाजार, एक धामावाला, एक प्रिंस चौक के पास, जबकि एक सहारनपुर रोड पर।
शहर की हृदय स्थली होने केचलते सर्वाधिक ग्राहक पलटन बाजार स्थित गांधी आश्रम पर उमड़ते हैं। सभी की बिक्री को एक साथ जोड़ने बैठें तो साफ है कि करोड़ों की खादी चुनावी सीजन में खप चुकी है।
सर्दी में देसी खादी पर भारी आस्ट्रेलियन
सर्दी में बापू की देसी खादी पर आस्ट्रेलियन वैरायटी भारी पड़ी है खादी के सबसे अधिक ऊनी उत्पाद इसी वैरायटी के मांग में हैं।
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राजस्थान, हल्द्वानी से पहुंचे कच्चे माल से तैयार होने वाली इस खादी के रेट भी दूसरी वैरायटी के मुकाबले कुछ ज्यादा हैं। दरअसल, यह खादी आस्ट्रेलियन नस्ल की भेड़ों केबालों से तैयार होती है, जो देसी भेड़ों के मुकाबले ज्यादा मुलायम रहती है।
फैब इंडिया में महुआ सिल्क की बहार
खादी के चाहने वाले कम नहीं, यह इसके उत्पादों से जुड़े फैब इंडिया की बिक्री से भी साबित होता है। सबसे ज्यादा डिमांड काटन, सिल्क की है। महुआ सिल्क इसमें भी अव्वल है। शर्ट, सूट, ट्यूनिक हर किसी उत्पाद की तरफ रुझान देखने को मिल रहा है।