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उत्तराखंड के लिए फायदेमंद होगा केजरीवाल का यह फॉर्मूला
अमर उजाला, देहरादून
Updated Sun, 05 Jan 2014 09:21 AM IST
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उत्तराखंड ऊर्जा निगम यदि चाहे तो दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की तर्ज पर प्रदेश के 14 लाख घरेलू उपभोक्ताओं को बिजली बिल में राहत दे सकता है।
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बिजली चोरी रुकेगी
यही नहीं अगले दो साल तक बिजली की दरें भी बढ़ाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। इसके लिए करना केवल इतना होगा कि लाइन लास को पांच फीसदी तक कम कर दिया जाए। इसमें सफलता तभी मिलेगी जबकि बिजली चोरी को प्रभावी तरीके से रोका जाए।
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एक अनुमान के अनुसार एक फीसदी लाइन लास पर 40 करोड़ रुपए का सालाना नुकसान होता है। प्रदेश में करीब 15.50 लाख बिजली उपभोक्ता हैं। इनमें से 14 लाख से अधिक उपभोक्ता घरेलू श्रेणी के हैं, जिनके द्वारा कुल खपत की 22 फीसदी बिजली का उपभोग होता है।
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लगभग 78 फीसदी बिजली का इस्तेमाल व्यावसायिक और औद्योगिक इकाईयां करती हैं। ऊर्जा निगम के रिकार्ड के अनुसार प्रदेश में लगभग 23 फीसदी बिजली लाइन लास के रूप में बेकार चली जाती है।
उत्तराखंड विद्युत नियामक आयोग की ओर से लाइन लास को 23 से कम करके 18 फीसदी करने पर जोर दिया जाता रहा है, लेकिन ऊर्जा निगम प्रबंधन का आज तक इस पर फोकस ही नहीं कर पाया।
तो बिजली की कमी हो जाएगी दूर
लाइन लास कम करने से बिजली की कमी भी दूर हो जाएगी। ऐसी स्थिति में ऊर्जा निगम को रोजाना अतिरिक्त बिजली नहीं खरीदनी पड़ेगी। पूरा प्रदेश बिजली कटौती से मुक्त हो जाएगा।
200 करोड़ का नुकसान
यदि लाइन लास को 23 से घटाकर 18 फीसदी कर दिया जाए तो इससे काफी फायदा होगा। इससे निगम को हर साल होने वाले 200 करोड़ रुपए के राजस्व की क्षति से बचाया जा सकता है। इस रकम से घरेलू उपभोक्ताओं को राहत दी जा सकती है।
लाइन लॉस और उसका खेल
लाइन लॉस का आशय एक छोर से दूसरे छोर तक बिजली सप्लाई करने में होने वाली क्षति से होता है। मानकों के अनुसार यह क्षति 10 से 12 फीसदी से अधिक नहीं होनी चाहिए।
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अगर इससे अधिक क्षति हो रही है तो माना जाता है कि बिजली की चोरी हो रही है। ऐसा आरोप लगता रहता है कि बिजली की चोरी ऊर्जा निगम के कर्मचारी और अधिकारी ही कराते हैं।
औद्योगिक इकाईयों, व्यावसायिक संस्थानों आदि में अधिक और बड़ी चोरी होती है। जिससे हर साल अरबों रुपए का नुकसान ऊर्जा निगम को होता है।
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निश्चित तौर पर लाइन लास को कम करके घरेलू उपभोक्ताओं को बड़ी राहत दी जा सकती है। इस संबंध में काम शुरू किया गया है। बिजली चोरी रोकने और लाइन लास को कम करने के लिए अभियंताओं को सख्त निर्देश दिए जा रहे हैं।
- एसएस यादव, प्रबंध निदेशक, ऊर्जा निगम
पिछले टैरिफ आर्डर में भी लाइन लास को कम करने पर जोर दिया गया था, लेकिन इस संबंध में निगम प्रबंधन की ओर से ठोस कदम नहीं उठाया गया। इस तरफ उसकी रुचि भी दिखाई नहीं देती।
- जगमोहन लाल, अध्यक्ष उत्तराखंड विद्युत नियामक आयोग