टेंशन में केदारनाथ के वन्य जीव, पता लगाने जुटे वैज्ञानिक
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जी, हां केदारनाथ के वन्य जीव इन दिनों टेंशन में हैं। उन्हें यह टेंशन हेलीकॉप्टरों की उड़ान से मिली है। अब विज्ञानी इन जीवों के तनाव का ग्राफ तैयार करेंगे।
बिना एनओसी उड़ान भर रहे हेलीकॉप्टरों के शोर से केदारनाथ वन्य जीव विहार के किस पशु और पक्षी को कितनी टेंशन हो रहा है, इसकी जांच शुरू हो गई है। जैसे ही हेलीकॉप्टर गुजरता है और इसका शोर सुनकर पशु-पक्षी भागते हैं उस वक्त वो जो बीट करते हैं, विज्ञानी उसका सैंपल करके टेंशन का ग्राफ निकाल रहे हैं।
इसके साथ ही पहले से पड़ी बीट के सैंपलों से भी रसायन निकाल कर पशु-पक्षियों के डिस्टर्बेंस का अंदाजा लगाया जा रहा है। भारतीय वन्य जीव संस्थान की टीम इस समय केदारनाथ वन्य जीव विहार पहुंच गई है और काम शुरू कर दिया है। संस्थान की टीम के सर्वेक्षण का पहला चरण नवंबर तक चलेगा।
वन्य जीवों की प्रजनन क्षमता हो रही प्रभावित
यह टीम संस्थान के वरिष्ठ विज्ञानी डॉ. सत्य कुमार के नेतृत्व में शोध कार्य कर रही है। डॉ. कुमार ने बताया टीम नवंबर में अंतरिम रिपोर्ट सौंप देगी। इसके बाद मई-जून में सर्वेक्षण का दूसरा चरण शुरू होगा। केदारनाथ मंदिर के कपाट खुलने के साथ ही सर्वेक्षण शुरू हो जाएगा। कपाट बंद होने के बाद प्रमुख वन संरक्षक (वन्य जीव) को सर्वे रिपोर्ट सौंप दी जाएगी।
गौरतलब है कि केदारनाथ में बिना एनओसी उड़ रहे हेलीकॉप्टरों के शोर से वन्य जीवों के भागने और उनकी प्रजनन क्षमता प्रभावित होने के संबंध में मार्च 2013 में तत्कालीन उप वन संरक्षक आकाश कुमार वर्मा ने रिपोर्ट दी थी, जिस पर वन विभाग कान में तेल डाले बैठा रहा।
इसी रिपोर्ट के आधार पर अमर उजाला ने श्रंखला छापी। बाद में नेशनल ग्रीन ट्रिब्युनल में यह मामला गया। तब प्रमुख वन संरक्षक (वन्य जीव) ने भारतीय वन जीव संस्थान को केदारनाथ वन्य विहार के पशु-पक्षियों पर हेलीकॉप्टर के शोर के दुष्प्रभाव पता लगाने के लिए शोध करने के लिए कहा था।
पशु-पक्षियों के तनाव का पता लगाने का एक ही तरीका है उनकी बीट। इनकी बीट में कुछ रसायनों की जांच की जाती है। जब इनकी मात्रा में असंतुलन होता है तो पशु-पक्षियों के तनाव का पता लगता है। उसी आधार पर तनाव का ग्राफ तैयार किया जाता है।
- डॉ. वीबी माथुर, निदेशक भारतीय वन्य जीव संस्थान