...तो नहीं हो पाएगा केदारधाम में पुनर्निर्माण
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केदारनाथ के पुनर्निर्माण में अब ध्वस्तीकरण का काम रोड़े अटका सकता है। पुरोहितों में केदारनाथ में अपने मकानों के ध्वस्तीकरण को लेकर सहमति नहीं है। ऐसे में ध्वस्तीकरण का काम अटक सकता है। अभी तक निम तीन सरकारी इमारतों के ध्वस्तीकरण में जुटा हुआ है। अब आगे का काम तीर्थ पुरोहितों की सहमति से ही किया जा सकता है।
केदारनाथ धाम में ही करीब 700 तीर्थ पुरोहित ऐसे हैं जो हक हकूकधारी हैं या फिर इनके नाम केदारनाथ में जमीन हैं जिस पर इन्होंने जून 2013 की आपदा से पहले गेस्ट हाउस, लॉज, मकान, दुकान आदि बनाए हुए थे। इन लोगों के लिए सरकार ने केदारनाथ के ले आउट प्लान के हिसाब से मकान, दुकान बनाकर देने, जमीन का मुआवजा देने का भी भरोसा दिलाया।
सूत्रों के मुताबिक अधिक पुरोहित इस पर सहमत भी हैं। पर कुछ पुरोहितों का मानना है कि सरकार पुरोहितों को ही निर्माण की अनुमति दे और नुकसान की भरपाई करें। इनमें से सबसे ज्यादा विरोध उनका है जिनकी जमीन बिल्कुल मंदिर से ही सटी हुई है। सरकार की मंशा है कि मंदिर के सामने करीब 50 फुट रास्ताछोड़ा जाए और मंदिर के आसपास निर्माण इस तरह से हो कि मंदिर से कुछ दूर पर स्थित देवदर्शनी से मंदिर साफ दिखाई दे।
165 मकान मंदिर के आसपास
पर इसकी राह में अब पुरोहितों का हित भी आड़े आ गया है। इनका कहना है कि जो मकान या अन्य स्ट्रकचर पूरी तरह से सुरक्षित हैं उनको तोड़ना सही नही है। ऐसे करीब 165 मकान बताए जा रहे हैं जो मंदिर के आसपास ही हैं।
वहीं, निम सरकारी इमारतों के ध्वस्तीकरण का काम करीब-करीब पूरा करने जा रहा है। इसके बाद अगला कदम मंदिर के आसपास के क्षेत्र में ध्वस्तीकरण का है। सरकार पहले ही कह चुकी है कि पुरोहितों को विश्वास में लेकर ही आगे की योजना पर अमल किया जाएगा।
उधर केदार सभा का भी साफ कहना है कि अभी सहमति नहीं बनी है। मुसीबत यह भी है कि उच्च हिमालयी क्षेत्र में होने के कारण ज्यादा से ज्दादा 15-20 जनवरी तक ही यहां काम किया जा सकता है। इसके बादअप्रैल में ही काम करने का मौका मिलेगा और मई में अगली यात्रा शुरू होगी।
अतिक्रमण वालों को भी फायदा
एक पुरोहित के मुताबिक सरकार की योजना में उन लोगों को ज्यादा फायदा है जिन्होंने अतिक्रमण किया हुआ है। इन लोगों को न नक्शे की दिक्कत होगी और न ही किसी और तरह के सबूत की। सरकार इनके लिए निर्माण करकेदे देगी और एक तरह से अतिक्रमण को वैध भी मान लिया जाएगा। आखिर यह कहां का इंसाफ है।
-मैं सिर्फ इतना कह सकता हूं कि अभी सहमति नही बनी है। सरकार और जिला प्रशासन का नजरिया सकारात्मक है पर पुरोहितों को तो दुनिया जहान देखनी है। कुछ लोग सहमत भी हैं।
-केशव तिवारी, महामंत्री केदार सभा