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Kedarnath: सुरक्षित नहीं पैदल मार्ग, छह साल में पहाड़ी से बोल्डर गिरने से 16 यात्रियों की हो चुकी मौत

Fri, 04 Aug 2023 10:05 PM IST
अलका त्यागी संवाद न्यूज एजेंसी, रुद्रप्रयाग
संवाद न्यूज एजेंसी, रुद्रप्रयाग Published by: अलका त्यागी Updated Fri, 04 Aug 2023 10:05 PM IST
सार

केदारनाथ तक पहुंचने के लिए गौरीकुंड से 16 किमी पैदल दूरी तय करनी होती है। यह रास्ता शुरू से ही भूस्खलन को लेकर अति संवेदनशील है।

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Kedarnath pedestrian route is not safe 16 People have died due to landslide in six years
केदारनाथ पैदल मार्ग - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ड्रीम प्रोजेक्ट के तहत केदारनाथ को संवारा जा रहा है लेकिन केदारनाथ तक का पहुंच मार्ग अब भी सुरक्षित नहीं है। बीते छह वर्षों में पैदल मार्ग पर यात्रा के दौरान पहाड़ी से गिरे पत्थरों की चपेट में आने से 16 यात्रियों की मौत हो चुकी है। इसके बाद भी रास्ते पर सुरक्षा के कोई इंतजाम नहीं हो पाए हैं। इन दिनों बारिश में कई जगहों पर निरंतर पत्थर गिरने का खतरा बना है।

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केदारनाथ तक पहुंचने के लिए गौरीकुंड से 16 किमी पैदल दूरी तय करनी होती है। यह रास्ता शुरू से ही भूस्खलन को लेकर अति संवेदनशील है। चिरबासा, छौड़ी, जंगलचट्टी, रामबाड़ा, लिनचोली और छानी कैंप भूस्खलन जे साथ ही एवलांच जोन भी है। यहां रास्ते पर ऊपरी तरफ से कब पत्थर गिर जाए, कहना मुश्किल है।

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वर्ष 2017 में छौड़ी में पहाड़ी से गिरे पत्थर के कारण एक यात्री की खाई में गिरने मौत हो गई थी। इसी वर्ष चिरबासा में भी पहाड़ी से गिरे पत्थर से एक महिला यात्री की मौत हो गई थी। वर्ष 2018 में भीमबली में भूस्खलन से एक, 2018, 2019 में दो-दो यात्रियों की पत्थर लगने से मौत हो गई थी।

बीते वर्ष 2022 में सोनप्रयाग से छानी कैंप तक बोल्डर और पत्थरों के कारण 6 यात्रियों की मौत हो गई थी। इस वर्ष 25 अप्रैल से शुरू हुई केदारनाथ यात्रा में अभी तक पत्थर लगने से तीन लोगों की मौत हो चुकी है।

केदारनाथ पैदल मार्ग पहाड़ी से पत्थर गिरने व भूस्खलन की दृष्टि से काफी संवेदनशील है। इसे देखते हुए सुरक्षा के हर संभव इंतजाम किए गए है। यात्रियों की सुरक्षा व सतर्कता के लिए सुरक्षा जवानों की तैनाती गई है।
- नंदन सिंह रजवार, जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी रुद्रप्रयाग।

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