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केदारनाथ आपदा के दौरान अफसरों की 'ऐश' सही: CM

Mon, 01 Jun 2015 04:08 PM IST
ब्यूरो / अमर उजाला, रुद्रप्रयाग/चमोली
ब्यूरो / अमर उजाला, रुद्रप्रयाग/चमोली Updated Mon, 01 Jun 2015 04:08 PM IST
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kedarnath disaster scam.

आपदा राहत के दौरान भ्रष्टाचार के खुलासे के बाद विपक्ष की ओर से घेराबंदी का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कहा कि आपदा के दौरान अफसरों का मांस खाना कोई गलत बात नहीं है।

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रुद्रप्रयाग में सेना, पुलिस, एसडीआरफ से लेकर अधिकारी और प्रेस के लोग मौजूद थे, तब अगर किसी ने चिकन-मटन खाया, तो इसमें बुरा भी क्या है। सेना और पुलिस के मेस में तो चिकन-मटन बनता ही है। रविवार को रुद्रप्रयाग और चमोली जिले के दौरे पर पहुंचे मुख्यमंत्री ने पत्रकारों से कहा कि मुख्य सचिव मामले की जांच कर रहे हैं।
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जांच में कोई भी दोषी पाया जाता है तो सख्त कार्रवाई की जाएगी। यूं तो जांच के लिए 15 दिन का समय दिया गया है, लेकिन एक माह के अंदर जांच रिपोर्ट सबके सामने होगी। मालूम हो कि सूचना के अधिकार के तहत मिली जानकारी में पिछले दिनों यह बात सामने आई थी कि जून 2013 की आपदा के बाद जब लोग भूखों मर रहे थे, अधिकारी राहत कार्य के दौरान चिकन-मटन खा रहे थे।

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दोषियों पर होगी कड़ी कार्रवाई

kedarnath disaster scam.

अगस्त्यमुनि में मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार की प्राथमिकता केदारनाथ में पुनर्निर्माण और चारधाम यात्रा का बेहतर संचालन है। ऐसे में इस समय वह अधिकारियों को किसी जांच में नहीं फंसाना चाहते। फिर भी जरूरत हुई तो आपदा राहत में भ्रष्टाचार की और जांच करवाई जाएगी। दोषियों पर कड़ी कार्रवाई होगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि होटल से लेकर खाने-पीने और डीजल, पेट्रोल के बिल में गड़बड़ी के जो तर्क दिए जा रहे हैं, उस संबंध में सरकार पूरी जानकारी जुटा रही है। जब तक सरकार अपने स्तर से पूरी जांच नहीं करती, किसी तरह की कार्रवाई संभव नहीं है। गोविंदघाट में मुख्यमंत्री ने कहा कि आपदा इतनी बड़ी थी कि तब स्थितियां असाधारण हो गई थीं।

तेज राहत कार्य के लिए कुछ अधिक खर्च किया गया होगा। कुछ लोगों की ओर से किए गए अनावश्यक खर्च को देख सभी अधिकारियों को दोषी नहीं ठहराया जा सकता है। नैनीताल में मुख्यंत्री ने कहा कि मीट परोसे जाने के प्राथमिक सर्वे में इसका पैरामिलिट्री कैंप से संबधित होना पाया गया है।

खनन पर कहा कि यह पूरे देश भर का मुद्दा है। खनन आमदनी का बड़ा स्रोत होने के साथ ही नदियों और उसके आसपास बसे लोगों के जीवन के लिए भी जरूरी है। जरूरत है बेहतर नियोजन और उसे प्रभावी करने की। पूर्व मुख्यमंत्री की सुविधाओं के संबंध में पूछे सवाल पर सीएम रावत ने कहा कि इस मुद्दे पर विधानसभा में चर्चा करेंगे।

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