फिर मिली आपदा में बिछड़ी महिला, चाहिए आपकी मदद
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जून 2013 में केदारनाथ में आई आपदा कितनी भयानक थी, इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि आपदा के दौरान बिछडे़ लोग अब भी अपनों की तलाश में भटक रहे हैं।
शासन-प्रशासन भी आज तक उन्हें घर नहीं पहुंचा सका। पिथौरागढ़ के मोस्टामानू और देवलथल में दो महिलाओं के मिलने के बाद अब एक और 45 वर्षीय महिला सोमेश्वर के पास बदहवास हालत में मिली है।
महिला ने बताया कि आपदा में 13 साल का बेटा उसके सामने ही बह गया। पति और बेटी का कोई पता नहीं है। इस महिला को एक ग्रामीण ने आश्रय दिया है। आप इस खबर को ज्यादा से ज्यादा शेयर करके इस महिला की मदद कर सकते हैं।
करीब आठ दिन पूर्व भटकते हुए 45 वर्षीय महिला सोमेश्वर से पांच किमी दूर धौनीगाड़ गांव पहुंची। तीन-चार दिन तक यह महिला सड़क किनारे गुमसुम बैठी रही। महिला को इस हालत में देख गांव के संतोष कुमार जोशी ने पुलिस को सूचना दी।
पुलिस ने की महिला से पूछताछ
पुलिस ने गांव में पहुंचकर महिला से पूछताछ की। बार-बार पूछने पर महिला ने बताया कि उसका नाम शीला है। वह गोपालपुर कस्बे के धुले जिला, महाराष्ट्र की रहने वाली है। महिला लोकल टोन में जिसे धुले कह रही है यह गुना हो सकता है।
शीला ने बताया कि जून 2013 में वह पति विलास, 13 वर्षीय बेटे राजू और तीन साल की बेटी रीता के साथ केदारनाथ में पूजा अर्चना के लिए आई थी। केदारनाथ में आए सैलाब में बेटा राजू उसकी आंखों के सामने बह गया जबकि पति और बेटी का कोई पता नहीं है।
महिला की व्यथा सुनकर आपसी सहमति पर संतोष महिला को देखभाल के लिए अपने घर ले आए। चार दिन से शीला उनके घर में रह रही है। वह बताती है कि परिजनों को ढूंढते और भटकते हुए यहां तक पहुंची है।
इसके अलावा वह अपने परिजनों के बारे में कुछ नहीं बता पा रही है। संतोष और बौरारो संघर्ष समिति के संयोजक सुरेश बोरा ने प्रशासन से महिला को उसके घर तक पहुंचाने की मांग की है।