फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Dehradun News ›   kedarnath disaster completes two year.

कितनी भयानक थी केदारनाथ आपदा, ये दे रहे गवाही

Tue, 16 Jun 2015 03:23 PM IST
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून Updated Tue, 16 Jun 2015 03:23 PM IST
विज्ञापन
kedarnath disaster completes two year.

आज भी वो भयानक रात जब आंखों के सामने आती है तो नींद में भी दौड़ पड़ता हूं। यह देख घरवाले मुझे बार-बार दरवाजे से वापस लाते हैं। यह कहना है गौरीकुंड निवासी रामचंद्र का, जिनका आपदा में सब कुछ बह गया और अब तक ना मुआवजा मिल पाया ना कोई काम।

विज्ञापन


रामचंद्र का कहना है कि 16-17 जून 2013 की आपदा को चाहकर भी नहीं भूल सकता हूं। कारण कि अपना 22 कमरों का लॉज और रेस्तरां सब कुछ इस आपदा में खो दिया। खुद भी रातभर लोगों की चीख-पुकार के बीच जैसे-तैसे जान बचाई। रामचंद्र ने बताया कि उस रात मैं गौरीकुंड गांव में था, इसलिए बच गया। मुझे नहीं लग रहा था कि मैं भी बच पाऊंगा।
विज्ञापन


पूरी रात घबराहट के साथ मौत को सोचते हुए जागकर बिताई। अगले दिन सुबह जंगल का खतरनाक रास्ता पकड़ लिया और चलता गया। सोच लिया कि मुझे जीना है। तीन दिन बाद जंगल से बाहर कहीं निकला और कुछ लोग दिखाई दिए तो जान में जान आई। सबसे पहले खाने की तलाश में जुट गया।
विज्ञापन
विज्ञापन


खाने के लिए मारामारी मची थी। लोग एक दूसरे का निवाला छीनने को आतुर थे। जैसे तैसे दिन गुजरे। कुछ दिन बाद वापस अपने लॉज और रेस्तरां को देखने निकल गया, लेकिन वहां तो कुछ था ही नहीं। यकीन नहीं हो रहा था कि ये वही जगह है, जहां हम अपनी रोजी-रोटी चलाते थे। सदमे में कई दिनों तक रात में उठकर भागने लगता था।

हां अब यह समझ में आ गया कि दोबारा से हमें अपने लिए रोजगार ढूंढना है। धर्मपुर के सरस्वती विहार में रहने वाले गंगाराम उनियाल का भी गौरीकुंड में 20 कमरों का लॉज था पर आज वो भी अपने लिए रोजगार की तलाश कर रहे हैं।  मुआवजा ना मिल पाने से भी व्यापारियों में रोष है।

पति ने दे दी थी जान, पत्नी को जाना पड़ा गांव

गौरीकुंड में आपदा से हुए नुकसान के बाद डिप्रेशन में आए व्यापारी ओम प्रकाश उनियाल ने खुद तो जहर खा लिया, लेकिन परिवार पर आफत टूट पड़ी।

ओम प्रकाश की पत्नी अपने दोनों बच्चों संग दून में रहती थी, ताकि उन्हें बेहतर भविष्य दे सके, लेकिन ईश्वर को कुछ और ही मंजूर था। आपदा में हुए नुकसान के बाद आर्थिक तंगी की वजह से वापस गांव जाना पड़ा।

कहां से लाएं बिल
आपदा में अपना सब कुछ खो देने वाले लोग अब मुआवजे के लिए कार्यालयों के चक्कर काट रहे हैं। स्थिति यह है कि पीड़ितों से आपदा में हुए नुकसान से संबंधित सामानों का बिल मांगा जा रहा है। परेशान लोगों का कहना है कि आपदा में सब कुछ खोने के बाद अब वह सामानों का बिल कहां से लाएं।

आपदा में क्षतिग्रस्त हुईं थीं 2892 पेयजल योजनाएं
वर्ष-2013 में आई आपदा से राज्य में 2892 पेयजल योजनाएं क्षतिग्रस्त हो गईं थीं। इनमें से 2344 की मरम्मत हो गई और 548 योजनाओं पर अब भी काम चल रहा है। इन सभी योजनाओं के मरम्मतीकरण के लिए अलग-अलग फंड से 98 करोड़ रुपए पेयजल विभागों को दिए जा चुके हैं।

मालूम हो कि दो वर्ष पूर्व आई आपदा में चमोली, रुद्रप्रयाग, उत्तरकाशी, टिहरी, बागेश्वर, चंपावत आदि पहाड़ी क्षेत्रों की पेयजल योजनाएं ना सिर्फ क्षतिग्रस्त हो गईं, बल्कि कई योजनाएं तो पूरी बह गईं थीं। जल संस्थान के मुख्य महाप्रबंधक एसके गुप्ता ने बताया कि योजनाओं की मरम्मत के लिए 50 करोड़ रुपए विश्व बैंक से मिले।

इसके अलावा राज्य सरकार, मुख्यमंत्री राहत कोष, राष्ट्रीय ग्रामीण स्वच्छता मिशन से भी बजट मिला। उन्होंने बताया कि जिन योजनाओं पर काम चल रहा है, उन योजनाओं से भी लोगों को पानी दिया जा रहा है।

बेटे के डेथ सर्टिफिकेट के लिए भटक रही मां

kedarnath disaster completes two year.

जल प्रलय को आए दो साल पूरे हो चुके हैं, लेकिन हरियाणा के जींद जिले के नरवाना की रहने वाली 62 वर्षीय पतासो देवी के दिलो-दिमाग में आपदा से हुए घाव अब तक हरे हैं। उत्तराखंड में बनी मिसिंग लोगों की सूची में उनके बेटे चरण सिंह (34) का भी नाम है और नरवाना में गुमशुदगी भी दर्ज है, बावजूद इसके वह आज तक बेटे के डेथ सर्टिफिकेट के लिए भटक रही हैं।

सोमवार को पतासो देवी अपने रिश्तेदार पुलिस इंस्पेक्टर फूल सिंह के साथ दून कलेक्ट्रेट में डिप्टी कलेक्टर मुख्यालय एनएस डांगी के पास अपनी समस्या लेकर आई थीं। पतासो पढ़ी-लिखी नहीं हैं, बावजूद इसके वह अकेले ही दून के चार चक्कर काट चुकी हैं।

दरअसल नरवाना थाने में चरण सिंह की गुमशुदगी तो दर्ज कर ली गई, लेकिन जीरो एफआईआर करके उसे रुद्रप्रयाग ट्रांसफर नहीं किया गया। इस कारण मिसिंग में नाम दर्ज होने के बावजूद चरण के मामले में एफआईआर नहीं हो पाई। वहीं, उत्तराखंड पुलिस न तो हरियाणा गई और न ही हरियाणा पुलिस से कोई संपर्क ही साधा। कायदे से मिसिंग में नाम होने पर उत्तराखंड पुलिस को चरण सिंह की पड़ताल करनी चाहिए थी।

हरियाणा और उत्तराखंड पुलिस की सुस्ती की वजह से ही पतासो देवी परेशान हो रही हैं। अब डिप्टी कलेक्टर ने उन्हें या तो रुद्रप्रयाग जाकर एफआईआर दर्ज कराने और या फिर हरियाणा में जीरो एफआईआर कराकर उसे रुद्रप्रयाग ट्रांसफर कराने को कहा है। पतासो बताती हैं कि डेथ सर्टिफिकेट न होने से चरण सिंह की बीमा पालिसी का क्लेम नहीं मिल रहा है।

और भी कई मामलों में दिक्कत आ रही है। बताया कि चरण सिंह नौवीं बार चारधाम यात्रा पर आए थे। 13 जून 2013 को उन्होंने फोन करके मां को बताया था कि वह केदारनाथ पहुंच गए हैं, जिसके बाद फिर उनसे कोई संपर्क नहीं हो सका।

कब भरेंगे आपदा के जख्म

kedarnath disaster completes two year.

जून 2013 में आई आपदा के जख्मों की टीस दो साल बाद भी बरकरार है। हालांकि चारधाम यात्रा संचालित होने से इन जख्मों पर कुछ मरहम जरूर लगा है, लेकिन पुनर्निर्माण के कामों को देखें तो स्थिति चिंताजनक है। आपदा सरकार के लिए राजनीतिक सवाल ज्यादा बनकर उभर रही है।

आपदा प्रबंधन तंत्र को मजबूत करने, खतरे की पूर्व चेतावनी का तंत्र विकसित करने, नदियों का बाढ़ प्रभावित क्षेत्र चिह्नित करने जैसे कामों पर सरकार दो साल बाद भी आगे नहीं बढ़ पाई। सड़कों को चार धाम यात्रा के लिए ठीक तो कर दिया गया लेकिन भूस्खलन क्षेत्रों का उपचार करने और आपदा प्रभावित गांवों को विस्थापित करने का सवाल जस का तस खड़ा है।

आपदा के बाद के इन दो सालों को सरकार ने केदारनाथ पुनर्निर्माण का नाम दिया। लेकिन गुप्तकाशी से केदारनाथ तक जून 2013 की आपदा के निशान अब तक दिखाई दे रहे हैं। केदारनाथ की सूरत कुछ हद तक संवरी है। 2015 की चार धाम यात्रा में केदारनाथ मार्ग पर विभिन्न पड़ावों पर करीब चार हजार यात्रियों के ठहरने की व्यवस्था कर ली गई। बदरीनाथ, यमुनोत्री, गंगोत्री और हेमकुंड साहिब की यात्रा का संचालन हो पाया।

कुछ हद तक क्षतिग्रस्त सड़कों, पेयजल योजनाओं के पुनर्निर्माण भी हुआ, लेकिन इससे आगे की यात्रा बता रही है कि जून 2013 की आपदा का कोई और सबक अमल में नहीं लाया गया। केदारघाटी और आसपास के क्षेत्र में करीब 92 भूस्खलन क्षेत्र आपदा के दौरान विकसित हुए थे।

इन क्षेत्रों के उपचार का काम फिलहाल विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तक ही सीमित है। शासन के मुताबिक सिरोबगड़ क्षेत्र में दो पुल बनाकर भूस्खलन क्षेत्र को बाईपास किया जा रहा है। यह काम डीपीआर पर सिमटा हुआ है। लामबगड़ क्षेत्र में भूस्खलन का उपचार नहीं हो पाया है और यहां खतरा लगातार बना हुआ है। यही हाल बाकी के भूस्खलन क्षेत्रों का भी है।

आपदा के बाद सबसे अधिक जरूरत खतरे की पूर्व चेतावनी का तंत्र विकसित करने की महसूस की गई थी। लेकिन इस मामले में हमारा तंत्र सेटेलाइट फोन तक ही सीमित है। ग्लेशियर के अध्ययन के लिए 2007 में बनाई गई कमेटी ने 2008 में संस्तुति दे दी थी, लेकिन यह संस्तुति अब भी फाइलों में कैद है। डॉपलर रडार और ऑटोमेटिक वेदर स्टेशन स्थापित करने पर बात अभी आगे नहीं बढ़ पाई है।

आपदा के तुरंत बाद सरकार ने चार धाम यात्रा मार्ग पर वैकल्पिक मार्ग का निर्माण कराने का दावा किया था। इस पर अभी कार्ययोजना तक तैयार नहीं की जा सकी है। इसी तरह नदियों के बाढ़ प्रभावित क्षेत्र को चिह्नित करने पर जोर दिया गया था। यह काम शुरू तक नहीं हो पाया।

आपदा के दो साल भी पुनर्वास पर प्रदेश में कोई काम नहीं हो पाया। हाल यह है कि इस समय प्रदेश में संवेदनशील करीब 341 गांव हैं। इनमें से एक गांव का भी पुनर्वास सरकार नहीं कर पाई है।

इसी तरह आपदा प्रबंधन तंत्र की हालत में सुधार नहीं हो पाया। राज्य की अपनी आपदा प्रबंधन योजना तैयार है लेकिन इस योजना पर आगे काम नहीं हो पाया।  मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में गठित राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की बैठक ही अभी तक नहीं हो पाई है।

सरकार को यह मिली मदद

केंद्रीय सहायता - 1885.80 करोड़
केंद्रीय योजना - 50 करोड़
विशेष योजना सहायता - 1100 करोड़
बाह्य सहायतित - 3737.34 करोड़
कुल योजना - 7981.04 करोड़

नहीं हो पाए ये काम

kedarnath disaster completes two year.

सड़क और पुल
जून 2013 की आपदा के दौरान 31,430 किलोमीटर के सड़क नेटवर्क में से प्रदेश में 13 राष्ट्रीय राजमार्ग, 35 राज्य राजमार्ग और 2385 अन्य सड़कों को नुकसान पहुंचा था। 86 मोटर पुल और 185 पैदल पुल ध्वस्त हो गए थे। इनमें से न तो कोई सड़क पूरी तरह से ठीक हो पाई और न ही ध्वस्त पुलों की जगह नए पुल बन पाए।

आपदा के दौरान संपर्क मार्ग क्षतिग्रस्त होने से करीब 4220 गांवों का दूसरी जगह से संपर्क कट गया था। इन गांवों का संपर्क जरूर बहाल हुआ, लेकिन इसमें स्थानीय ग्रामीणों का प्रयास भी रहा। सड़कों और पुलों के लिए विश्व बैंक और एशियन डेवलपमेंट बैंक ने 970 करोड़ रुपये की मदद का ऐलान किया है। इसमें से करीब 650 करोड़ की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट बना ली गई है।

डॉप्लर रडार
टिहरी और अल्मोड़ा में डॉप्लर रडार स्थापित किए जाने हैं। अल्मोड़ा में तो डीएम ने जमीन के लिए अनापत्ति प्रमाणपत्र जारी कर दिया है। प्रस्ताव भारत मौसम विभाग को भेजा जा चुका है। टिहरी में भूमि चिह्नित कर ली गई है लेकिन हस्तांतरण की प्रक्रिया जारी है।

ऑटोमेटिक वेदर स्टेशन

तकनीकी और वित्तीय निविदाओं की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। टिहरी, चमोली, पिथौरागढ़ और देहरादून में ये स्टेशन स्थापित किए जाने हैं।

खतरे की पूर्व चेतावनी का तंत्र

तकनीकी स्तर पर मूल्यांकन किया जा रहा है। चार निविदाएं आमंत्रित की जा चुकी है।

राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण का ढांचा
15 फरवरी 2015 को हुई बैठक में राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण का ढांचा विकसित करने का फैसला किया गया था, लेकिन अभी तक इस पर शासन स्तर से मुहर नहीं लग पाई है।

भूस्खलन उपचार
अंतिम रूप से समझौता नहीं हो पाया है। इस मामले में ज्वाइंट वेंचर बनाया गया है। पूना की एक कंपनी को यह काम दिया जा रहा है। 20 जून तक जेवी अकाउंट डिटेल मिल जाने पर सहमति पत्र जारी होगा।

रिस्क एसेसमेंट
आपदा के खतरे का पहले से आकलन करने का यह प्रस्ताव विश्व बैंक को पांच जून को भेजा गया।

हेलीपैड
करीब 25 मिलियन यूएस डॉलर की इस परियोजना में विभिन्न स्थानों पर 50 हेलीपैड बनाए जाने हैं। इसमें से केदारनाथ में दो हेलीपैड बना लिए गए हैं। अन्य स्थानों पर जमीन चिह्नित करने तक ही मामला सिमटा हुआ है।

बच्चों को नहीं मिला अपना स्कूल

kedarnath disaster completes two year.

उत्तराखंड में आपदा के दो साल बाद भी 113 स्कूलों के बच्चों को अपना स्कूल नहीं मिल पाया है। 16 जून 2013 को आपदा से राज्य के 736 प्राथमिक और जूनियर हाईस्कूल क्षतिग्रस्त हुए थे। इसमें से अब तक 623 स्कूलों का निर्माण कार्य ही पूरा हो पाया है।

प्रदेश में दो साल पहले आज के दिन आई आपदा ने स्कूलों के बच्चों की मुश्किलें बढ़ा दी थी। स्कूल ढहने से रुद्रप्रयाग, पिथौरागढ़, चमोली, उत्तरकाशी, टिहरी और बागेश्वर आदि जनपदों के कई स्कूलों के बच्चों की सामुदायिक एवं पंचायत भवनों में कक्षाएं संचालित की गई बल्कि अब भी 113 स्कूलों के बच्चे जर्जर हाल भवनों में बैठने को मजबूर हैं।

शिक्षा विभाग के अधिकारियों का कहना है कि आपदा प्रभावित अधिकतर विद्यालय बनकर तैयार हो चुके हैं। अन्य स्कूल सुरक्षित जगह पर भूमि न मिल पाने एवं कुछ स्थानों पर विवाद के चलते नहीं बन पाए हैं।

डिजाइन तैयार कराने में बीत गए कई दिन
आपदा प्रभावित क्षेत्रों में स्कूल निर्माण में शुरू से ही देरी हुई है। आपदा के सौ दिन बाद विभाग ने सेंट्रल बिल्डिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट रुड़की (सीबीआरआई) से आपदा प्रभावित क्षेत्रों के लिए स्कूल भवन का डिजाइन तैयार करवाया था। इसके बाद ही भवन निर्माण शुरू हो पाया।    

दरबदर हो गए थे अगस्त्यमुनि के खिलाड़ी

जल प्रलय से केदारनाथ घाटी में हुई तबाही के कारण अगस्त्यमुनि के खिलाड़ियों को भी दरबदर होना पड़ा था। खिलाड़ियों को करीब डेढ़ महीने तक हरिद्वार में रहकर अभ्यास करना पड़ा। राहत कार्य पूरा होने के बाद ही खिलाड़ी हॉस्टल में पहुंच सके थे। आपदा का दंश करीब से देखने वाले इन खिलाड़ियों ने हॉस्टल से बाहर रहकर हरिद्वार में अभ्यास किया था।

16 जून 2013 को केदार घाटी से शुरू हुए जल प्रलय के दौरान सड़क से ऊपर होने के कारण अगस्त्यमुनि स्थित एथलेटिक्स बालिका आवासीय छात्रावास (गर्ल्स हॉस्टल) पानी के सैलाब से बच गया था। आपदा के दो-तीन दिन बाद पुलिस और राहत दल अगस्त्यमुनि पहुंचा। सुरक्षित स्थान की तलाश में उन्होंने गर्ल्स हॉस्टल और मैदान में डेरा डाल दिया था।

उस वक्त हॉस्टल के ऊपरी मंजिल में करीब 25 लड़कियां और कोच रह रहे थे। निचली मंजिल में आपदा राहत दल और पुलिस के डेरा डालने से लड़कियां अभ्यास के लिए मैदान में नहीं आ पा रही थीं। हॉस्टल से खेल विभाग के सहायक निदेशक डॉ. धर्मेंद्र भट्ट को इसकी सूचना दी गई। डॉ. भट्ट ने खेल निदेशक और उप खेल निदेशक से इस संबंध में बात की।

लड़कियों की सुरक्षा के लिए खेल निदेशक के निर्देश पर उनको हरिद्वार भेजा गया। डा. भट्ट ने बताया कि हरिद्वार में खेल विभाग के कार्यालय में जगह की व्यवस्था न होने के बावजूद कार्यालय के स्टोर रूम और अन्य कमरों को साफ करवाया गया। उप निदेशक खेल अजय अग्रवाल ने बताया कि इसके बाद करीब डेढ़ महीने तक लड़कियों को वहीं रखा गया।

आपदा का दंश करीब से देखने वाले ये खिलाड़ी पुराने अंदाज में खेल रहे हैं और राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भी प्रतिभाग कर रहीं हैं। जो अब नई उम्मीद को दर्शाता है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed