{"_id":"60e6e2798ebc3ee2201d96e4","slug":"kedarnath-dham-biogas-and-electricity-will-be-made-from-feces-and-urine-of-horse-mules","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"केदारनाथ धाम: घोड़े-खच्चरों के मल-मूत्र से बनेगी बायोगैस और बिजली, गौरीकुंड में लगेगा प्लांट ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
केदारनाथ धाम: घोड़े-खच्चरों के मल-मूत्र से बनेगी बायोगैस और बिजली, गौरीकुंड में लगेगा प्लांट
Thu, 08 Jul 2021 05:07 PM IST
अलका त्यागी
विनय बहुगुणा, अमर उजाला, रुद्रप्रयाग
विनय बहुगुणा, अमर उजाला, रुद्रप्रयाग
Published by: अलका त्यागी
Updated Thu, 08 Jul 2021 05:07 PM IST
सार
गंगा को स्वच्छ और निर्मल बनाने के लिए केंद्र सरकार की नमामि गंगे परियोजना के तहत गौरीकुंड में बायोगैस प्लांट लगाया जाएगा।
विज्ञापन
केदारनाथ
- फोटो : अमर उजाला फाइल फोटो
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
तीर्थयात्रियों को केदारनाथ धाम तक पहुंचने वाले घोड़ों और खच्चरों का मल-मूत्र अब मंदाकिनी नदी को मैला नहीं करेगा। इससे अब बिजली, रसोई गैस और खाद तैयार की जाएगी। इसके लिए यात्रा के मुख्य पड़ाव गौरीकुंड में बायोगैस प्लांट और कंपोस्ट पिट स्थापित किए जाएंगे। इससे 15 घरों को बिजली और रसोई गैस मुहैया हो पाएगी।
विज्ञापन
गंगा को स्वच्छ और निर्मल बनाने के लिए केंद्र सरकार की नमामि गंगे परियोजना के तहत गौरीकुंड में बायोगैस प्लांट लगाया जाएगा। इसमें घोड़े और खच्चरों के मल-मूत्र से बायोगैस तैयार की जाएगी और इससे 48 से 50 किलोवाट बिजली का उत्पादन होगा।
विज्ञापन
चारधाम यात्रा 2021: अब केदारनाथ में पितरों को तर्पण दे सकेंगे श्रद्धालु, आस्था पथ पर बनाए गए चार पितृ घाट
विज्ञापन
यह बिजली 15 घरों को सप्लाई की जाएगी। साथ ही इससे बाजार व पैदल मार्ग पर स्ट्रीट लाइटें भी रोशन होंगी। यही नहीं, बायोगैस से 58 से 60 मीटर क्यूबिक रसोई गैस तैयार की जाएगी।
केदारनाथ यात्रा में आपदा के बाद 2014 से 2019 तक प्रतिवर्ष घोड़ा-खच्चरों के संचालन में वृद्धि हुई है। दो वर्ष पूर्व यात्रा में सात हजार घोड़ा-खच्चरों का संचालन हुआ था। इनके मल-मूत्र से पूरे पैदल मार्ग पर गंदगी रहती है, जो बारिश में सीधे मंदाकिनी नदी में बह जाती है। इसलिए, अब इसका उपयोग बिजली, रसोई गैस व खाद बनाने में किया जाएगा। इसके लिए प्रयोग के तौर पर गौरीकुंड में मिनी बायोगैस प्लांट स्थापित किया जाएगा।
परियोजना से जुड़े अधिकारियों ने दो दिन पूर्व गौरीकुंड में बायोगैंस प्लांट के लिए भूमि का निरीक्षण किया है। अधिकारियों के अनुसार बायोगैस प्लांट के लिए केंद्र सरकार से 34 लाख 59 हजार रुपये की धनराशि स्वीकृत हो जा चुकी है।
बायोगैस प्लांट व कंपोस्ट पिट के निर्माण की योजना बनाई थी
बता दें कि वर्ष 2018 में तत्कालीन केंद्रीय मंत्री उमा भारती के गौरीकुंड भ्रमण के दौरान स्थानीय लोगों ने घोड़ा-खच्चरों के मल व मूत्र से होने वाली गंदगी से निजात दिलाने की मांग की थी। उसके बाद से केंद्र सरकार ने इस स्थान पर बायोगैस प्लांट व कंपोस्ट पिट के निर्माण की योजना बनाई थी।
मल से तैयार होगी खाद
यात्राकाल में घोड़ा-खच्चरों के मल से खाद भी बनाई जाएगी। इसके लिए गौरीकुंड में एक कंपोस्ट पिट तैयार किया जाएगा। अधिकारियों के अनुसार इस पिट में खाद बनाने के लिए एक समय में 120 घोड़ा-खच्चरों का एक समय का मल पर्याप्त होगा। वैज्ञानिक विधि से मल से लगभग 25 से 30 दिन में खाद तैयार हो जाएगी, जिसे न्यूनतम दरों पर स्थानीय काश्तकारों को बेचा जाएगा।
घोड़े-खच्चरों के मल-मूत्र से पड़ाव व पैदल मार्ग पर गंदगी होती है। इस गंदगी के निस्तारण के लिए गौरीकुंड में बायोगैस प्लांट व कंपोस्ट पिट का निर्माण किया जाना है। इसके लिए भूमि चयन सहित अन्य औपचारिकताएं पूरी हो चुकी है। जल्द ही बायोगैस प्लांट बनाने का कार्य शुरू कर दिया जाएगा।
- रोहित जयाड़ा, मॉनीटरिंग विशेषज्ञ उत्तराखंड, नमामि गंगे परियोजना।
मल से तैयार होगी खाद
यात्राकाल में घोड़ा-खच्चरों के मल से खाद भी बनाई जाएगी। इसके लिए गौरीकुंड में एक कंपोस्ट पिट तैयार किया जाएगा। अधिकारियों के अनुसार इस पिट में खाद बनाने के लिए एक समय में 120 घोड़ा-खच्चरों का एक समय का मल पर्याप्त होगा। वैज्ञानिक विधि से मल से लगभग 25 से 30 दिन में खाद तैयार हो जाएगी, जिसे न्यूनतम दरों पर स्थानीय काश्तकारों को बेचा जाएगा।
घोड़े-खच्चरों के मल-मूत्र से पड़ाव व पैदल मार्ग पर गंदगी होती है। इस गंदगी के निस्तारण के लिए गौरीकुंड में बायोगैस प्लांट व कंपोस्ट पिट का निर्माण किया जाना है। इसके लिए भूमि चयन सहित अन्य औपचारिकताएं पूरी हो चुकी है। जल्द ही बायोगैस प्लांट बनाने का कार्य शुरू कर दिया जाएगा।
- रोहित जयाड़ा, मॉनीटरिंग विशेषज्ञ उत्तराखंड, नमामि गंगे परियोजना।