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'डॉक्टर मर रहा नर्स पर, मरीज मर रहा फर्श पर'
अमर उजाला, देहरादून
Updated Fri, 21 Mar 2014 10:31 AM IST
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नब्ज ठीक से दिखती नहीं, और निगाहें रहती हैं पर्स पर, सबकुछ लुटाने को तैयार हैं मात्र एक स्पर्श पर, सरकारी अस्पताल का आलम हमसे पूछिए, डॉक्टर मर रहा नर्स पर और मरीज मर रहा फर्श पर...।
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कुछ इसी अंदाज में कवि राकेश जैन ने जब सरकारी अस्पतालों के हालात बयां किए तो सुनने वाले ठहाकों के साथ लोटपोट हो गए।
युवाओं की नब्ज छेड़ी
मौका था डीबीएस पीजी कॉलेज के छात्र संघ समारोह में कवि सम्मेलन का। शुभारंभ मुख्य अतिथि मसूरी विधायक गणेश जोशी, विशिष्ठ अतिथि कुंवर जपेंद्र सिंह, डा. सुनील अग्रवाल, सरदार जीवन सिंह ने दीप जलाकर किया।
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इसके बाद कवि आनंद शरण ने जज्बात कागजों पे जब भी कभी उतारों, एक हाथ में हो खंजर एक हाथ में कलम हो सुनाकर युवाओं में जोश भरा।
शायर शादाब अली ने बहुत कोमल है दिल के जज्ब ए ईमान वाले हैं, उलझना मत हमसे हम अलग पहचान वाले हैं... सुनाकर युवाओं की नब्ज छेड़ी।
नीता कुकरेती ने उत्तराखंड गीत, आशु घोष ने वनगीत और विपिन बिहारी सुमन ने गीत और गजल पेश कर तालियां बटोरी। इस दौरान राधा माधव मंडूली, डा. रामविनय सिंह, प्राचार्य डा. ओपी कुलश्रेष्ठ, छात्र संघ अध्यक्ष विनय रावत, महासचिव सागर भट्ट, उपाध्यक्ष गुंजन, विवि प्रतिनिधि देशराज आदि मौजूद रहे।
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